March 28, 2017

ताज़ा खबर

 

रविवारीय स्तम्भ

दक्षिणावर्त: छोटी छोटी खुशियां

तरुण विजय जनसत्ता 12 अक्तूबर, 2014: जिंदगी सिर्फ उन बड़े कामों के लिए बीत जाती है, जिन्हें हम जीने के लिए जरूरी मानते हैं।...

नोबेल पुरस्कार: नोबेल प्रतिभाओं के घोर अभाव में

राजकिशोर जनसत्ता 12 अक्तूबर, 2014: नोबेल शांति पुरस्कार कई बार अपने को लज्जित कर चुका है। बहुत संक्षेप में कहा जाए तो उसने महात्मा...

दस्तावेज: संघ पर जेपी की राय

जनसत्ता 12 अक्तूबर, 2014: प्रश्न: आपके आंदोलन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय मजदूर संघ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जनसंघ के साथ...

कभी-कभार: आवाज और खामोशी

अशोक वाजपेयी जनसत्ता 12 अक्तूबर, 2014: हममें से अधिकतर लोग यह नहीं समझ पाते कि कब आवाज उठानी चाहिए और कब खामोश रहना चाहिए।...

पुस्तकायन: मनुष्य होने का अधिकार

कुमार प्रशांत जनसत्ता 12 अक्तूबर, 2014: सत्य नारायण साबत की किताब भारत में मानवाधिकार सब कुछ लिखती है, लेकिन दो सौ पृष्ठों की किताब...

पुस्तकायन: आत्मीयता की जमीन

राजेश राव जनसत्ता 12 अक्तूबर, 2014: विवेक मिश्र के कहानी संग्रह पार उतरना धीरे से में आत्मिक धरातल को समझने का भाव प्रबल है।...

निनाद: अतीत और वर्तमान

कुलदीप कुमार जनसत्ता 5 अक्तूबर, 2014: पिछले कुछ समय से बलात्कार की घटनाओं में भारी बढ़ोतरी हुई है और इसके अपराधियों के लिए अनेक...

अप्रासंगिक: आत्मालोचन से परहेज क्यों

अपूर्वानंद जनसत्ता 5 अक्तूबर, 2014: अर्धेंदु भूषण बर्धन नब्बे वर्ष के हो गए। अब भी उनकी मानसिक त्वरा किसी युवा को लज्जित कर सकती...

प्रसंग: बराबरी की आदत

विकास नारायण राय जनसत्ता 5 अक्तूबर, 2014: अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने एक अंगरेजी अखबार में अपनी विरूपित छवि की नुमाइश का विरोध किया, तो...

प्रसंग: अहिंसा और वैचारिक विसंगतियां

प्रफुल्ल कोलख्यान जनसत्ता 5 अक्तूबर, 2014: यह भारत के लिए गौरव की बात है कि महात्मा गांधी के जन्मदिन- दो अक्तूबर- को संयुक्त राष्ट्र...

कभी-कभार: तिमिर, झरता समय और मुक्तिबोध

अशोक वाजपेयी जनसत्ता 5 अक्तूबर, 2014: मुक्तिबोध पर इधर व्यापक रूप से विचार-पुनर्विचार होना शुरू हुआ है और दिल्ली, रायपुर के अलावा इलाहाबाद, बनारस,...

अवसर: कागजी है पैरहन

वागीश शुक्ल जनसत्ता 5 अक्तूबर, 2014: जाक देरीदा के देहत्याग को अब दस बरस हो रहे हैं- वे शनिवार 9 अक्तूबर, 2004 को तड़के...

पुस्तकायन: उम्मीद का स्वर

सुखप्रीत कौर जनसत्ता 5 अक्तूबर, 2014: लाल सिंह दिल पंजाबी के चर्चित कवियों में हैं। उनकी चर्चा हिंदी में बहुत कम हुई है। हिंदी...

पुस्तकायन: आलोचना के वैज्ञानिक औजार

रमेश दवे जनसत्ता 5 अक्तूबर, 2014: प्रसिद्ध आस्ट्रियन दार्शनिक विटगेन्स्टाइन ने ‘द इनर’ नाम से अभ्यंतर का विचार रचा, जो बताता है कि मनुष्य...

दक्षिणावर्त: वह छुटकी-सी माताराम

तरुण विजय जनसत्ता 28 सितंबर, 2014: वह नाराजगी और गुस्सा। वह चिड़चिड़ापन और ‘मैं न मानूं’ का अतिरेकी बालहठ। जब मन में आए सोना,...

समांतर संसार: चमक और उदास चेहरे

सय्यद मुबीन ज़ेहरा जनसत्ता 28 सितंबर, 2014: मंगल ग्रह पर भारत की दस्तक की तस्वीरों के बीच कुछ तस्वीरें सबसे आकर्षक थीं। वे महिला...

टेलीविजन: लोकप्रियता का भ्रामक पैमाना

सतीश सिंह जनसत्ता 28 सितंबर, 2014: आज टेलीविजन रेटिंग पॉइंट यानी टीआरपी शब्द का प्रयोग आम हो गया है, पर इसके वास्तविक तंत्र से...

मतांतर: हकीकत से उलट

दीपशिखा जनसत्ता 28 सितंबर, 2014: आजकल हमारे राजनीतिक और बुद्धिजीवी तबके में स्त्रियों का पहनावा और उनकी जीवन-शैली बहस का मुद्दा बना हुआ है।...

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