May 27, 2017

ताज़ा खबर

 

रविवारीय स्तम्भ

प्रसंग : भाषा के पहरुए

 हरजेंद्र चौधरी मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने केंद्रीय विद्यालयों में तृतीय भाषा के रूप में जर्मन की जगह संस्कृत पढ़ाने का निर्णय किया तो...

सिनेमा : प्रतिरोध, परदा और प्रतिबंध

देवेंद्र पाल फ्रांसीसी फिल्मकार फ्रांसुआ त्रुफो कहते थे कि सिनेमा अच्छा होता है या बुरा होता है। मगर उन्हें कहां पता था कि भारत...

समांतर संसार : दरकते रिश्ते

सय्यद मुबीन ज़ेहरा यह बहुत चौंकाने और परेशान करने वाली सच्चाई देश की राजधानी दिल्ली से उभर कर सामने आई है। हमारे समाज का...

दक्षिणावर्त : कश्मीर में केसर

तरुण विजय वक्त यों बदलता है। जहां एक बार जाने की कीमत डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को अपनी जान से चुकानी पड़ी थी, वहां...

कभी-कभार : दरगाह में रज़ा

अशोक वाजपेयी कई महीनों से हमारे मित्र चित्रकार सैयद हैदर रज़ा का, अजमेर में ख्वाजा मोइउद्दीन चिश्ती की विश्वप्रसिद्ध दरगाह में जाना, उनकी तबीयत...

मीडिया : अंगरेजी पत्रकारिता के दुराग्रह

विष्णु नागर हिंदी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को हाल ही में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया। इसमें शायद ही...

पुस्तकायन : स्त्री मुक्ति का बिगुल

कर्मेंदु शिशिर भारतीय नवजागरण के ऐसे कई इलाके हैं, जिन पर हिंदी में काम नहीं हुए। ऐसे कई पक्ष और व्यक्तित्व हैं, जिन पर...

पुस्तकायन : समकाल में लोक लय

अर्पण कुमार श्रीप्रकाश शुक्ल तमाम समकालीन समस्याओं से दो चार होते हुए उन्हें कविता की संवेदनात्मक सघनता में बुनते हैं। उनका नया संग्रह है-...

निनाद: साहसिक प्रयोग के गायक

कुलदीप कुमार कुमार गंधर्व अपने जीवनकाल में ही किंवदंतीपुरुष बन गए थे। सभी मानते थे कि हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के समकालीन परिदृश्य में- और,...

अप्रासंगिक: जीवन की कलात्मकता

अपूर्वानंद ‘‘उन्नीस सौ सोलह…। मैंने पहली बार बापू को देखा था। तब से एक पूरा जमाना गुजर गया है। (तब से आज तक की)...

प्रसंग: दायित्वहीन आनंदवाद

प्रभु जोशी इन दिनों ‘किस ऑफ लव’ मीडिया की सुर्खियों में है। प्रतिरोध की यह प्रविधि भारतीय समाज के लिए थोड़ी नई है। हिंसा...

प्रसंग: नैतिकता के पहरुए

क्षमा शर्मा ‘किस ऑफ लव’ कोचीन से शुरू हुआ और कोलकाता, हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली आदि स्थानों पर फैल गया। कोच्चि में एक जोड़े के...

वक्त की नब्ज़: नेहरू बनाम मोदी

तवलीन सिंह नरेंद्र मोदी की नजरों में जवाहरलाल नेहरू बहुत बड़े हीरो नहीं हैं। यह बात उनके किसी भी भाषण से मालूम हो सकती...

कानून: मृत्युदंड बनाम जीवन का अधिकार

अरविंद कुमार पिछले दिनों मृत्युदंड से जुड़े तीन मामलों पर व्यापक चर्चा चली। पहला मामला है, ईरान की छब्बीस वर्षीय रेहना जब्बारी का, जिसे...

कभी-कभार: अनुपस्थित श्रोता

अशोक वाजपेयी दिल्ली में अंगरेजी का बोलबाला है यह तो जगजाहिर है। अलबत्ता यहां के चिकने-चुपड़े लोग जब-तब सूफियाना संगीत आदि में दिलचस्पी लेते...

पुस्तकायन: सन्नाटे को भेदते हुए

ज्योति चावला ‘शब्द वहां ज्यादा हैं जहां उनकी जरूरत नहीं है/ और जहां होनी चाहिए थी भाषा की मजबूत उपस्थिति/ वहां दूर तक फैली...

पुस्तकायन: मुसलिम समाज का सच

सुनील यादव एम फीरोज खान की पुस्तक मुसलिम विमर्श: साहित्य के आईने में वैज्ञानिक तरीके से मुसलिम समाज की सरंचना, उसके रीति-रिवाज और मान्यताओं...

भाषा: जय हिंद् (ई)

लक्ष्मीधर मालवीय जनसत्ता 9 नवंबर, 2014: अकेली हिंदी को लेकर बहस हो कि हिंदी बनाम अंगरेजी पर, सारी बहस धूल की रस्सी बटने के...

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