ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

प्रसंग: अस्मिता और वितंडा

महाराष्ट्र सरकार ने फैसला किया कि मुंबई में छह से नौ बजे के प्राइम टाइम में मल्टीप्लेक्सों को एक मराठी फिल्म दिखानी होगी। इस...

कभी-कभार: मौन का अस्फुटन

यों तो कला और कलारचना के अनेक लक्ष्य और प्रक्रियाएं होती हैं, मोटे तौर पर उनमें यह सामान्य विभाजन किया जा सकता है: कला...

निनाद: पुत्र का मोह

वर्ष 2012 में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि गर्भस्थ शिशु के लिंग का निर्धारण करने वाले परीक्षणों के कारण विश्व...

पुस्तकायन: कुंवर नारायण को गुनते हुए

कुंवर नारायण उन यशस्वी कवियों में हैं, जिनकी कविता में मिथक और इतिहास, परंपरा और आधुनिकता, पूर्व और पश्चिम की काव्यात्मक परंपरा, कलात्मक औदात्य,...

अप्रासंगिक: संवाद बनाम लफ्फाजी

पिछले दिनों राहुल गांधी का संसद में भाषण चर्चा में रहा। उसके पहले दिल्ली में किसानों की सभा के उनके संबोधन को लेकर मीडिया...

पुस्तकायन: उन्माद के साए में

जीवन एक नदी के समान है, जिसमें प्रवाह जरूरी है। जब भी इसकी राह में धर्म, अंधविश्वास, महत्त्वाकांक्षा, कुंठा, क्षोभ के अवरोध आते हैं,...

अनन्तर : बदलाव के लिए

ओम थानवी छब्बीस वर्ष पहले आतंकवाद के चरम दौर में जब जनसत्ता का चंडीगढ़ संस्करण संभालने गया, तब भी मित्रों ने कुछ ऐेसे ही...

निनाद : घाटी में बिखराव के बीज

कुलदीप कुमार जम्मू-कश्मीर में क्या खेल खेला जा रहा है? सुपर राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी की शिरकत से चल रही मुफ्ती मुहम्मद सईद की...

अप्रासंगिक : तुच्छता का परिवेश

अपूर्वानंद तुच्छता या क्षुद्रता क्या मानवीय स्वभाव का अनिवार्य अंग है? या कुछ लोग स्वभावत: क्षुद्र होते हैं और उनकी क्षुद्रता मौका मिलते ही...

प्रसंग : आखिर यह मर्जी है किसकी

मृणाल पाण्डे दीपिका पादुकोण और निन्यानबे अन्य (पहले इस तरह का प्रचार हमने दारा सिंह की फिल्मों के संदर्भ में ही सुना था) सशक्तीकृत...

प्रतिक्रिया : शिक्षा की कसौटी

गणपत तेली सय्यद मुबीन जेहरा ने ‘पढ़ाई में भटकाव के रास्ते’ (12 अप्रैल) में शिक्षा पर बात करते हुए कुछ महत्त्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं।...

दक्षिणावर्त: भरोसा सरहद पार

तरुण विजय अगर ठान लिया गया है कि बस विरोध करना है, चाहे उसकी वजह सिर्फ ईर्ष्या हो, तो विरोध ही होगा। हम तय...

समांतर संसार: पढ़ाई में भटकाव के रास्ते

सय्यद मुबीन ज़ेहरा ज्ञान का उद्देश्य मनुष्य को मनुष्य बनाना है। शिक्षा प्राप्त ही इसलिए की जाती है कि हम मानवीय मूल्यों पर चलते...

मतांतर: उपन्यास की जन्मभूमि

महेंद्र राजा जैन ‘उपन्यास की कला’ पर विचार करते हुए अशोक वाजपेयी ने (कभी-कभार, 22 मार्च) लिखा है कि ‘‘उपन्यास का विधागत विवेक, उसकी...

मतांतर: एकांगी मूल्यांकन

विकास सिंह मौर्य रघु ठाकुर के लेख ‘गांधी निंदा के नए प्रयोग’ (3 अप्रैल) में गांधी को लेकर उनकी जानकारी और विश्लेषण शैली सराहनीय...

परिदृश्य: विस्थापन का विकास

प्रमोद मीणा पर्यावरण एवं वन मंत्रालय पिछले कुछ सालों से विवादों के केंद्र में रहा है। इस पर जहां कुछ उद्योगपतियों और मंत्रियों ने...

कभी-कभार: विलाप समय का

अशोक वाजपेयी   एक आकाशहीन संसार में, जमीन हो जाती है एक रसातल। और कविता समवेदना के उपहारों में से एक। और हवा का...

पुस्तकायन: आलोचना का रचनात्मक पाठ

नंदकिशोर नवल की पुस्तक हिंदी कविता: अभी, बिल्कुल अभी समकालीन हिंदी कविता-आलोचना का नया रचनात्मक पाठ है। रचना के साथ ‘सहयात्री’ बनने का भाव...