ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

परिदृश्य : तर्कशीलता की मशाल

सुभाष गाताडे शब्द और विचार हर किस्म, हर रंग के कठमुल्लों को बहुत डराते हैं। महज यह संभावना कि तमाम बंधनों से मुक्त मन...

मीडिया : धारणा बनाम हकीकत

अमित चमड़िया भारत की ज्यादातर आबादी आज भी मीडिया द्वारा परोसी गई सामाग्री को स्वाभाविक मानती है। शायद उसमें खबरों के विश्लेषण की क्षमता...

सिनेमा : अवांछित तर्क

महेंद्र राजा जैन फिल्म निर्माताओं को राहत देते हुए पिछले दिनों फिल्म सेंसर बोर्ड की सात घंटे तक चली बैठक में सदस्यों ने इस...

अप्रासंगिक : प्रश्न परंपरा

अपूर्वानंद प्रश्न करें या न करें: प्रश्न यही है! रोमिला थापर ने निखिल चक्रवर्ती की याद में दिए व्याख्यान में यह सवाल उठाया। यह...

निनाद : सुर धरोहर

कुलदीप कुमार इतिहास में कुछ क्षण ऐसे आते हैं जो उसकी दिशा ही बदल देते हैं। 1837 में जब तक जेम्स प्रिंसेप ने ब्राह्मी...

दक्षिणावर्त : बंद आंखों का खुलापन

तरुण विजय समय की रफ्तार बदल रही है और कुछ तो ऐसा नयापन है जो द्वार पर दस्तक दे रहा है। आप चाहें तो...

समांतर संसार : परीक्षा की घड़ी

सय्यद मुबीन ज़ेहरा इस समय जबकि सारा देश आम बजट की बारीकियों में उलझा है, हमारी उलझन का कारण कुछ और है। देश भर...

अभिमत : आम आवाज की ताकत

शंभुनाथ ‘रंगभूमि’ (1925) का अंधा सूरदास उजबक-सा दिखता है, पर पहला आम आदमी है जो अपनी जमीन बचाने के लिए निर्दय औद्योगिक विकास और...

साहित्य : अदृश्य पत्रिकाएं

वेंकटेश कुमार हिंदी में चार सौ से भी ज्यादा साहित्यिक पत्रिकाएं छपती हैं। लेकिन इस देश में एक भी ऐसी जगह नहीं जहां एक...

निनाद: इतिहास में सेंध

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे जुड़े संगठन और व्यक्ति इतिहास को केवल किस्सा-कहानी मानने के अभ्यस्त हैं। प्राचीन इतिहास के बारे में उनके द्वारा...

अप्रासंगिक: वक्तव्य का मंतव्य

आखिर वह वक्तव्य आ गया जिसका देश और दुनिया बेसब्री और बेचैनी से इंतजार कर रही थी। प्रधानमंत्री ने, पद ग्रहण करने के नौ...

प्रसंग: एक पुस्तक की आत्मकथा

मैं पुस्तक हूं। कई साल पहले, मेरे बगल में एक किताब पड़ी थी, जिसका नाम था: ‘मैं दलित हूं।’ गोदाम में आने-जाने वाले लोगों...

अभिमत: अभिव्यक्ति और समाज

फ्रांस में पत्रकारों पर हुए हमले ने भारत में भी कुछ दिन के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सवाल को केंद्र में ला दिया।...

साहित्य: लेखक और पाठक

लेखक और पाठक के संबंधों पर विचार किया जाता है, तो संदर्भ आमतौर पर साहित्य रहता है। ज्ञान-विज्ञान की शाखाओं के संदर्भ में ऐसी...

कभी-कभार: कला-नर्मदा

लेकिन हो पाना एक बार, हालांकि सिर्फ एक बार ही यह पार्थिव हो पाना लगता है टिकाऊ, निरसन से परे यथासंभव जो हम पा...

पुस्तकायन: अनुभव का दोआब

सुपरिचित कवि लीलाधर मंडलोई उन कवियों में हैं जिनके गद्य में भी कविता जैसा प्रवाह है। ‘दिल का किस्सा’ और ‘दाना पानी’ में हम...

पुस्तकायन: स्त्री आख्यान की कविताएं

हाल ही में आए सुधा अरोड़ा के कविता संग्रह कम से कम एक दरवाजा के कवर पर छपा है- ‘सातवें दशक की चर्चित कथाकार...

प्रतिक्रिया : मुसलमान की मुश्किल

चांद खां रहमानी अपूर्वानंद ने ‘ओबामा का गांधी-स्मरण’ (8 फरवरी) में बहुत साहसिक ढंग से सारगर्भित बात कही है। ‘घृणा और असहिष्णुता का अभ्यास...

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