June 27, 2017

ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

लकीर अपनी अपनी

अमेरिका में डोनाल्ड टंप के राष्ट्रपति बनने से उस देश का इस्लाम के प्रति रवैया बहुत हद तक साफ हो गया है। ट्रंप ने...

वक्त की नब्ज: मंदी के दौर में गोरक्षा

हर हफ्ते सोचती हूं किसी दूसरे विषय पर लिखने का, लेकिन कुछ न कुछ ऐसा हो जाता है कि मजबूर होकर हिंदुत्व पर ही...

दूसरी नजर- सरकार को आईना दिखाते आंकड़े

मैंने भविष्यवाणी की थी कि अर्थव्यवस्था को एक से डेढ़ फीसद की चपत लगेगी। मैं सही साबित हुआ, यह मेरे लिए कोई खुशी की...

प्रसंग-रचना और इतिहास का द्वंद्व

दुनिया की तमाम भाषाओं में ऐतिहासिक घटनाओं और इतिहास के प्रमुख पात्रों को विषय बना कर उपन्यास लिखने की लंबी परंपरा रही है।

अमूर्तन का चिंतनीय पक्ष

आत्म को तिरोहित किए बिना दृश्य नहीं रचा जा सकता, क्योंकि जो प्रकाश चित्रफलक पर उद्भाषित होता है वह दरअसल आत्म की आभा ही...

बाखबर, सुधीश पचौरी का लेख: जो भरा नहीं है भावों से

पाक पर फिर सर्जिकल स्ट्राइक/ सर्जिकल स्ट्राइक नंबर दो/ भारतीय सेना ने पाक के नौशेरा में गोले दागे/ परमजीत प्रेमसागर का बदला लिया/ देशभक्तों...

प्रसंग- जो बात नहीं कहनी

जीवन में सच्चाई और सपने के संगम रोज-रोज, क्षण-प्रतिक्षण होते रहते हैं। जीवन गतिशील है। गति लक्ष्य के प्रति होती है। जो है, उसमें...

वक्त की नब्ज- हकीकत के बजाय हंगामा

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत में हिंदू-मुसलिम दंगे फैल जाएंगे और धीरे-धीरे भाईचारा इस हद तक खत्म हो जाएगा कि भारत...

दूसरी नजर- जश्न के बरक्स : न रोजगार न शांति

मतदाता जब वोट डालने जाता है तो दूसरे मुद््दे भी उसके दिमाग में आ सकते हैं, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में वह रोटी-रोजगार, मजदूरी/आय,...

राष्ट्रवादी विश्वविद्यालय है जेएनयू

चाहे वह वामपंथी हों या दक्षिणपंथी, हम सभी देश के लिए काम करते हैं। हमारे विचार भिन्न हो सकते हैं, हमारे काम करने...

बाखबर: सच्ची खुशी कभी कभी

हेग अदालत के फैसले पर इस कदर वीरता बरसी कि किसी को जरा-सा भी किंतु परंतु गवारा नहीं था, जबकि कई पैनलिस्ट जानते थे...

तीरंदाज- चक्कर घनचक्कर

एक दिन पंडित जी एक सेंटेंस बोले और फिर कहा सेमी कोलन। हमसे न रहा गया और हमारे मुंह से निकल गया, नहीं चचा...

वक्त की नब्ज- अभी बहुत कुछ करना बाकी है

शहरीकरण और अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा जरूरत है परिवर्तन की, क्योंकि इन क्षेत्रों में परिवर्तन आएगा तो पूरे देश का माहौल बदल जाएगा। इन...

दूसरी नजर- वे आशंकाएं-3

सत्ता के सामने सच्चाई बयान करना एक दुर्लभ गुण है। देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन में यह गुण है।

साहित्य और सिनेमा: आज तक साहित्य पढ़ कर कोई डाकू या बलात्कारी नहीं हुआ, जबकि सिनेमा से यह भी हो सका है

साहित्य और सिनेमा का संबंध उतना ही पुराना है, जितना सिनेमा का इतिहास। दोनों भिन्न और अपनी-अपनी तरह के बेजोड़ कला-माध्यम हैं।

चर्चा: साहित्य का अनुवाद नहीं है सिनेमा

साहित्य को उसके मूल रूप में उतार पाना सिनेमा के बूते की बात नहीं, पर कहानी के स्तर पर वह साहित्य की तरफ जरूर...

कंपटीशन का बाजार गरम है

अंग्रेजी चैनल सीएनएन न्यूज अठारह में ‘हिंदू युवा वाहिनी’ की एक दिन की एक हिंसक कथा कही जा रही थी, लेकिन स्क्रीन पर बड़े-बड़े...

भाषा का लोकतंत्र

लोकतंत्र वाणी की स्वतंत्रता देता है, लेकिन वाणी के प्रदूषण या हवस की नहीं। लोकतंत्र व्यवस्था की स्वायत्तता देता है, लेकिन सत्ता की निरंकुशता...

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