ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

सुबह विपक्ष नाराज होता है, दोपहर बाद सीरियस हो जाता है!

एआइबी की फुलफार्म इतनी गंदी है भाईसाब कि मैं टीवी पर बोल तक नहीं सकता। इनको हवा क्यों देते हो।

नाद का आनंद

इन्हीं के सम्मिश्रण से चराचर का उद्भव हुआ। इस सृष्टि के अभ्युदय के इस सिद्धांत से सभी सहमत हैं, चाहे वे ब्रह्मज्ञानी हों या...

वक्त की नब्ज- चुनौती भरे दिन

फर्क सिर्फ यह है कि उस साल सब कहते थे कि अटल बिहारी वाजपेयी किसी हाल में नहीं चुनाव हार सकते और इस बार...

दूसरी नजर: गरीब सपने न देखें

वर्ष 2005 में मैंने तथाकथित शिक्षा-ऋण नीति की पड़ताल शुरू की। मैंने पाया कि ये ऋण गरीबों को अमूमन नहीं मिल पाते थे। गरीबों...

फुंदनों की लीला

कोसने से बचाया तो उस आक्रमित बस के ड्राइवर सलीम शेख ने बचाया। वह सभी चैनलों का हीरो था। सब उसे सलाम करते थे।...

हरकत में बरकत

यूरोप के कई देश जैसे ब्रिटेन, फ्रांस, पुर्तगाल, स्पेन, जर्मनी और यहां तक कि बेल्जियम और आस्ट्रिया विश्व मंच पर अपना दबदबा तभी बना...

वक्त की नब्ज: लोकप्रियता के बावजूद

समाजवादी देशों में- अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं- वे भी इस देश के आम आदमी को नसीब नहीं हुई हैं। थोड़ी बहुत समृद्धि आई...

दूसरी नजर: एक दूसरे को कगार की तरफ धकेलना

इससे पहले, लड़के सड़कों पर उतर आते थे और पत्थर फेंकते थे; अब लड़कियां भी सड़कों पर उतर रही हैं। पहले, माता-पिता अपने बच्चों...

बाखबर: साझी जगह

जब तीन-तीन अंगरेजी चैनल मामूली भाषाई विवाद को भाषा युद्ध की तरह बनाते रहेंगे तब वह भाषा युद्ध क्या न बनेगा? यही हुआ! एंकर...

डिजिटल मीडिया का सच

भारतीय लोकतंत्र की व्यापक परिधि में आज भी वह परिपक्वता नहीं है, जो किसी स्वस्थ समाज और लोक कल्याणकारी राज्य के लिए आवश्यक है।...

वक्त की नब्ज: जिहादी आतंक और दोहरी मानसिकता

आज भी केरल और तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में जिहादी इस्लाम के आसार दिखते हैं। आज भी राजस्थान के नागौर जिले में कुछ ऐसे...

दूसरी नजर: किसी को खाने नहीं दूंगा

भाजपा कठपुतली की तरह सबको नचा रही है और चारों धड़ों के धागे उसके हाथ में हैं।

विचारहीनता के दौर में

साहित्यकार की प्रतिबद्धता किसी भी तरह की सामाजिक या राजनीतिक सत्ता के प्रति न होकर आम जन के प्रति होनी चाहिए। तभी वह...

चर्चा- धीरे धीरे रे मना…

एक गहरी ऊब, जड़ता, निरर्थकता से भरी जीवनशैली में जब सांस लेने को हवा का एक झोंका तक नहीं रहता, तब बिलबिला कर जिंदा...

बाखबर- गोरक्षक, शर्तें लागू

कांग्रेसी कब समझंगे कि यह तमाशे का ही जमाना है। तमाशा ही असली चीज है। टैक्स लगाओ, मगर गा-बजा कर, तो वह पीड़ा कम...

वक्त की नब्ज- सिर्फ नसीहत से कुछ नहीं होगा

गोरक्षा के नाम पर हिंसा रोकना मुश्किल होगा अब, क्योंकि आज के ‘नए भारत’ में इस तरह की हिंसा को देशभक्ति माना जाता है।

तीरंदाज- चीन की सीनाजोरी

चीन के राष्ट्रपति भारत में दोस्ताना निभाने जब दाखिल हुए तो चुपचाप पीछे चीनी फौज लद्दाख के चूमर इलाके में घुस गई और अपना...

दूसरी नजर- परेशानी के लिए तैयार रहें

एक बार जब सारे राज्यों ने जीएसटी में ये खूबियां मान लीं, तो जीएसटी के अहम पहलुओं पर सहमति बनाने की हर कोशिश की...

सबरंग