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समांतर संसार : परीक्षा की घड़ी

सय्यद मुबीन ज़ेहरा इस समय जबकि सारा देश आम बजट की बारीकियों में उलझा है, हमारी उलझन का कारण कुछ और है। देश भर में बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं आरंभ हो रही हैं। इसमें बारह लाख से अधिक विद्यार्थी भाग लेने जा रहे हैं। बारहवीं कक्षा की परीक्षा इसलिए भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है […]
Author March 1, 2015 16:45 pm

सय्यद मुबीन ज़ेहरा

इस समय जबकि सारा देश आम बजट की बारीकियों में उलझा है, हमारी उलझन का कारण कुछ और है। देश भर में बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं आरंभ हो रही हैं। इसमें बारह लाख से अधिक विद्यार्थी भाग लेने जा रहे हैं। बारहवीं कक्षा की परीक्षा इसलिए भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है कि बच्चों के बड़े कॉलेजों और विभिन्न व्यावसायिक कॉलेजों में प्रवेश की भागदौड़ भी इससे जुड़ी है। जिस अंदाज में शिक्षा का बाजार गर्म हुआ है, उसने बोर्ड परीक्षाओं को अधिक कठिन बना दिया है। बच्चे पूरी मेहनत करने के बाद अगर नब्बे प्रतिशत से अधिक अंक नहीं लाते तो अच्छे शिक्षण संस्थानों में मनचाहे पाठ्यक्रम में उनका प्रवेश संभव नहीं रहता। इसलिए बच्चों से अधिक माता-पिता आतंकित रहते हैं। उनके अपने अंदर का डर धीरे-धीरे बच्चों को दबाव में ला देता है और कई बार बच्चे सब कुछ पढ़े होने के बावजूद घबराहट के कारण परीक्षा में अच्छा नहीं कर पाते हैं। जब परीक्षाफल मिलता है तब पता चलता है कि सब कुछ आने के बावजूद छोटी-छोटी गलतियों के कारण वे इतने नंबर नहीं ला पाए कि किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला पा सकें।

यों भी, हमारे यहां बच्चों को परीक्षा के दौरान भटकाने के कई रास्ते मौजूद हैं। इन दिनों विश्वकप क्रिकेट का बुखार चढ़ा हुआ है। बहुत कम बच्चे ऐसे होंगे, जिन्हें क्रिकेट अपनी ओर खींचता न हो। खेलता न भी हो, मगर स्कोर क्या हुआ है, जैसे सवाल उनके मन में भी आते ही होंगे। विश्वकप बच्चों की परीक्षा के साथ ही पूरा होगा। हमारे आसपास का मीडिया जिस तरह काम कर रहा है, उसमें यह तय है कि देश में ऐसी किसी महत्त्वपूर्ण घटना को खबरों में शायद जगह न मिले, जिससे विश्वकप क्रिकेट का चमक कम पड़े। अब ऐसे में उन बच्चों का क्या होगा जो क्रिकेट से दिल लगा कर बैठे हैं। उनके दिमाग में क्रिकेट घूमता रहेगा। माता-पिता उन्हें रोकेंगे तो वे किसी और बहाने से दूसरी जगह मैच देखे लेंगे या फिर अपने मोबाइल में मौजूद रेडियो पर कमेंटरी सुनेंगे। मैच एकाध घंटे का हो या फुटबॉल जैसा, यहां तो पूरा दिन चाहिए। हर गेंद के फेंके जाने पर मैच की नई तस्वीर सामने आती है। ऐसे में क्या किया जाए!

अगर आपके बच्चे की परीक्षाएं चल रही हैं तो उसे समझाना होगा कि यह कोई अंतिम क्रिकेट विश्वकप नहीं है। कोई हारे या जीते इससे देश के जीडीपी पर कोई अच्छा या बुरा असर नहीं पड़ने वाला है। लेकिन तुम्हारे लिए यह ऐसा मुकाबला है जहां तुम्हारी हार तुम्हारी ही हार है और तुम जीते तो तुम ही सिकंदर हो। मेरा मानना है कि वे जरूर समझेंगे, अगर आप भी समझते हैं कि यह विश्वकप अंतिम नहीं है। यानी आप खुद भी इस दौरान क्रिकेट के मनोरंजन से दूर रहें, ताकि आपके बच्चे के मानसिक प्रवाह में व्यवधान न आ पाए जो उसने परीक्षा की तैयारी को लेकर बनाया है। बात अगर मैच को देखने की है तो बोर्ड परीक्षा के बाद वह ऐसे मैच इंटरनेट पर देख सकता है जो विशेष रहे हों। बाद में मैच देखने का अलग ही आनंद होगा।

इस दौरान बच्चों को समझा कर उनके फोन अपने पास रख लेने चाहिए, जो आज दुनिया भर से जुड़ने की शक्ति रखते हैं। जरूरी हो तो घर से जुड़े रहने के लिए कोई बिना इंटरनेट वाला फोन दे दीजिए। हालांकि फोन का काम पहले यही था। अब यह फोन से अधिक कंप्यूटर बन गया है। यह अच्छी बात है। लेकिन हमारा लक्ष्य बच्चों का ध्यान ऐसी बातों और चीजों से हटाना है, जिससे उनका समय बर्बाद हो सकता है या ध्यान बंटता है। उनके पास जितना समय है, उसे सलीके से बांटना चाहिए कि परीक्षा के अंतिम दिनों में अगर कुछ पढ़ना या समझना रह गया हो तो उसकी ओर ध्यान दिया जा सके। यहां बच्चों का अधिकार छीन लेने की बात नहीं हो रही है, बल्कि उन्हें मनोवैज्ञानिक रूप से परीक्षा के लिए तैयार करने का सवाल है। जितना कम ध्यान बंटने के रास्ते होंगे, उतना ही उनका ध्यान परीक्षा की तैयारी पर रहेगा।

यही नहीं, माता-पिता को बच्चों को बिल्कुल दबाव में नहीं रखना है, बस उन्हें किसी तरह परीक्षा के महत्त्व को इस तरह समझाना है कि वे बिना किसी के कहे तैयारी में लगे रहें। घर का माहौल भी कुछ दिन के लिए ऐसा करना होगा कि बच्चे को पढ़ाई में कठिनाई न आए। इस परीक्षा की घड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के द्वारा छात्रों को संबोधित करके उनके अंदर का डर समाप्त करने की जो कोशिश की है, वह सराहनीय है। समाज को भी इसी प्रकार बच्चों का थोड़ा साथ देना चाहिए। अगर आपके आसपास कुछ ऐसे छात्र हैं जो बोर्ड परीक्षा दे रहे हैं तो उन्हें प्रोत्साहित करें। उनका सकारात्मक रूप से मार्गदर्शन करें। आपके पास कोई अनुभव है तो उनसे बांटिए। बच्चे परीक्षा की तैयारी की छुट्टियों में अलग समय पर सोते और जागते हैं। इसलिए आप कोशिश करें कि गली-मुहल्लों में शोर कम हो।

हमने पिछले सप्ताह भारत-पाक मैच के बाद अपने क्षेत्र में देखा कि चार लोग भारत का झंडा लेकर एक खुली जीप में इस तरह निकले कि उन्होंने अपना हाथ हॉर्न से नहीं हटाया। वह कान फाड़ने वाला शोर ऐसा था कि सभी राह चलते लोग परेशान हो गए। भारत मैच जीता था, लेकिन हम सड़क के इस शोर से ऐसा महसूस कर रहे थे, मानो हम अपने देश के इन चार लोगों से हार गए हैं। इस प्रकार की हरकत से बचने की कोशिश करें। ज्यादा शोर यों भी बीमार और वृद्ध लोगों को परेशान कर देता है। हमें एक सभ्य समाज के गठन में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

परीक्षा के दौरान कई संवेदनशील बच्चे अपने खाने का ध्यान नहीं रख पाते। इनका ध्यान रखना माता-पिता की जिम्मेदारी है। उन्हें समझाना होगा कि ऊर्जा नहीं होगी तो वे कैसे मेहनत करेंगे। संभव हो तो उन्हें फल, हरी सब्जी या ऐसा खाना खिलाएं जो आसानी से पच जाता है। बच्चों को एक ही जगह बैठ कर पढ़ते रहने से बचना चाहिए और थोड़े अंतराल से उठ कर चल-फिर लेना चाहिए। अगर सुबह या शाम सैर भी कर सकें तो अच्छा रहता है। अगर किसी मुहल्ले के कुछ बच्चे ऐसे हैं जो कॉलेज जा रहे हैं और पढ़ाई में अच्छे हैं तो अपने आसपास परीक्षा देने वाले और कमजोर बच्चों की पढ़ाई में जरूर सहायता करें।

कहते हैं कि पूरे साल जो अपनी पढ़ाई को गंभीरता से लेता है, उसके लिए हर दिन परीक्षा का दिन है। वह परीक्षा को लेकर इतना परेशान नहीं होता। जिन बच्चों ने समय गंवाया है, उन्हें परीक्षा पहाड़ जैसी दिखती है। लेकिन घबराना नहीं चाहिए। अभी समय बचा हुआ है। विभिन्न पर्चों के बीच तैयारी का समय भी होता है। बस अभी से जुट जाएं। उनकी मदद लीजिए जो आपकी तैयारी में मदद कर सकते हैं। आप उन पर्चों पर ज्यादा ध्यान दीजिए, जिनमें कमजोर हैं। पुराने पर्चे हल कीजिए। लगातार एक ही पेपर की तैयारी करने से बचिए। एक से थक जाएं तो दूसरा उठा लें। बस ध्यान रखें कि आपका विचार परीक्षा के अलावा इधर-उधर न भटके। परीक्षा के दौरान अगर आप पूजा और इबादत के लिए भी समय निकालें तो यह न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है, बल्कि आपके स्वास्थ्य के लिए उपयोगी रहता है।

अगर यह पता है कि आपको एक बेहतर दुनिया के निर्माण में अपना भरपूर योगदान देना है और समाज के लिए कुछ करना है तब आप जीवन की हर परीक्षा में हमेशा सफल होकर निकल सकते हैं। याद रखें कि यही अंतिम परीक्षा नहीं है। जिंदगी हर पल एक इम्तिहान है। खुदा आपको जीवन के हर इम्तिहान में सफलता प्रदान करे।

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