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भाषा : कोश की कसौटी

उर्मिला जैन शब्दों के संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी, जैसे हिज्जे, अर्थ, उच्चारण, उत्पत्ति आदि के लिए प्रधान सूत्र और साधन शब्दकोश ही होते हैं। विश्वकोश से शब्दकोश इस अर्थ में भिन्न होता है कि विश्वकोश में किसी वस्तु के विषय में जानकारी दी होती है। आधुनिक वृहद शब्दकोशों की यह भी एक […]
Author March 15, 2015 08:05 am

उर्मिला जैन

शब्दों के संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी, जैसे हिज्जे, अर्थ, उच्चारण, उत्पत्ति आदि के लिए प्रधान सूत्र और साधन शब्दकोश ही होते हैं। विश्वकोश से शब्दकोश इस अर्थ में भिन्न होता है कि विश्वकोश में किसी वस्तु के विषय में जानकारी दी होती है। आधुनिक वृहद शब्दकोशों की यह भी एक विशेषता मानी जाती है कि वे शब्द के बारे में तो सूचित करते ही हैं, अक्सर विश्वकोशों के समान संबंधित वस्तु के विषय में भी बताते हैं। इस प्रकार एक अच्छा शब्दकोश दो प्रकार के संदर्भ ग्रंथों यानी विश्वकोश और शब्दकोश का काम देता है।

विद्यार्थी अवस्था से लेकर अंत काल तक शब्दकोश ही एक मात्र ऐसा ग्रंथ है जो कभी भी अनुपयोगी नहीं होता। इसलिए अब पाश्चात्य देशों में शब्दकोशों के ‘विश्वकोश’ रूप पर तरह-तरह के परिशिष्ट और चित्र आदि देकर निखार पर विशेष ध्यान दिया जाने लगा है और उनके नाम में भी ‘विश्वकोश’ या ‘विश्वकोश संबंधी’ शब्द, जैसे ‘एनसाइक्लोपीडिक डिक्शनरी’ जोड़े जाने लगे हैं। यही कारण है कि विदेशों में प्रकाशित शब्दकोश शब्दों के अर्थ जानने के अलावा अन्य प्रकार की सूचनाओं के लिए भी उपयोगी बन जाते हैं। जिन शब्दकोशों में शब्दों का अर्थ स्पष्ट करने और उनकी प्राचीनता का प्रमाण देने के लिए उद्धरण भी दिए जाते हैं, उनका उपयोग किसी उद्धरण का सूत्र मालूम करने के लिए भी किया जा सकता है। कुछ शब्दकोशों में प्रसिद्ध विद्वानों, लेखकों, राजनीतिज्ञों आदि के उद्धरण भी शब्दों के अर्थ के साथ दिए रहते हैं। इस प्रकार किसी स्वतंत्र ‘उद्धरण कोश’ के अभाव में इस प्रकार के शब्दकोश बहुत उपयोगी बन जाते हैं।

मगर शब्दकोश तैयार करने और उसके मुद्रण में प्रकाशक और लेखक से जिस सावधानी की अपेक्षा की जाती है, वह भारत में प्रकाशित किसी भी भाषा के शब्दकोश में शायद ही देखने को मिलती है। कभी-कभी प्रकाशक योग्य व्यक्तियों को थोड़ा-सा पारिश्रमिक देकर शब्दकोश तैयार करा लेते हैं और फिर बिना परीक्षण कराए उसे ज्यों का त्यों छाप देते हैं। यह भी देखा गया है कि प्रकाशक नए संस्करण के नाम पर पुराना संस्करण ही बिना किसी संशोधन या परिवर्द्धन के छाप देते हैं। इस कारण पिछले संस्करण में रह गई भूलों का संशोधन तथाकथित नए संस्करण में नहीं हो पाता और न ही उनमें भाषा में प्रचलित हो चुके नए शब्दों का समावेश हो पाता है।

किसी भी शब्दकोश की उपयोगिता जानने के लिए सबसे पहले आवश्यक है कि उसमें प्रयुक्त भाषा को परखा जाए। कुछ ऐसे भी शब्दकोश प्रकाशित हुए हैं, जिनका उद्देश्य किसी एक काल या युग के शब्दों के अर्थ देना है। इसलिए वर्तमान काल की भाषा के शब्दों के लिए मध्यकालीन या वैदिक काल की भाषा का कोश उपयोगी नहीं होगा। इसी प्रकार कोई व्यक्ति अगर प्राचीन ऐतिहासिक काल के शब्दों के अर्थ जानने के लिए अधुनातन भाषा का शब्दकोश देखे तो यह उसकी भूल होगी और उसे अपेक्षित सूचना नहीं मिल सकेगी।

कुछ प्रकाशक अपने शब्दकोश के प्रचार के लिए ‘शब्द संख्या’ की घोषणा भी करते हैं। पर यह बहुत भ्रामक है। इससे यह पता नहीं चलता कि शब्दों की संख्या किस प्रकार आंकी गई है। घोषित या प्रचारित शब्द संख्या में केवल मुख्य शब्दों को शामिल किया गया है या मुख्य शब्दों के अन्य रूपों को भी गिना गया है, मसलन एक आदर्श शब्दकोश में ‘पिछ’, ‘पिछलगा’, ‘पिछ्लगी’ और ‘पिछलग्गू’- को केवल एक शब्द गिना जाएगा। पर कुछ प्रकाशक ‘पिछ’ जैसे कुछ अन्य शब्दों से निकले रूपों को भी शब्दों की संख्या में शामिल करके शब्द संख्या भ्रमात्मक रूप से बढ़ा कर प्रचारित करते हैं। शब्दों के संबंध में यह भी देखना चाहिए कि कोश में किस प्रकार के शब्द लिए गए हैं। उसमें बोली और उपभाषा के शब्दों के साथ ही प्रचलित और वैज्ञानिक शब्द भी शामिल किए गए हैं या नहीं।

यह भी देखना चाहिए कि कोश में हर शब्द का विवेचन/ निरूपण किस प्रकार किया गया है, मसलन शब्द के हिज्जे शुद्ध हैं या अशुद्ध; हिज्जे के चयन में किन सिद्धांतों को अपनाया गया है; शब्द के बहुवचन, क्रिया रूप, कृदंत आदि भी दिए गए हैं या नहीं। शब्दों का उच्चारण दिया गया है या नहीं और उच्चारण देने के लिए जो नियम अपनाया गया है वह यथातथ्य और स्पष्ट है या नहीं।

शब्द का इतिहास दिया गया है या नहीं; किसी शब्द के अर्थ में समय-समय पर जो परिवर्तन हुए हैं या होते रहे हैं, उनका उल्लेख है या नहीं; शब्द की परिभाषा स्पष्ट, सही और उपयुक्त है या नहीं; कठिन शब्दों का अर्थ और परिभाषा स्पष्ट करने के लिए उदाहरण और उद्धरण भी दिए गए हैं या नहीं; उद्धरण किस रूप में दिए गए हैं और उद्धरणों का सही-सही संदर्भ दिया गया है या नहीं; क्या संदर्भ कालक्रम से रखे गए हैं और हरेक के साथ समय दिया गया है, ताकि शब्द विशेष का इतिहास भी मालूम हो सके? क्या शब्द के साथ उसका परिचय, जैसे- स्तरीय, अप्रचलित, बोलचाल संबंधी आदि दिया गया है? शब्द के पर्यायवाची और विलोम भी दिए गए हैं या नहीं? शब्द के साथ विश्वकोश के समान सूचना दी गई है या नहीं?

शब्दकोश मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं। एक वे जो किसी एक भाषा के शब्दों तक सीमित हैं, जैसे ‘अंगरेजी-अंगरेजी’ या ‘हिंदी-हिंदी’ कोश। इस प्रकार के कोश उन्हीं लोगों के लिए उपयोगी होते हैं, जिन्हें कोश में प्रयुक्त भाषा का अच्छा ज्ञान है। चूंकि ये कोश अपने आप में पूर्ण होते हैं, उनका उपयोग किसी शब्द विशेष का पूरा विवरण, इतिहास, परिभाषा आदि जानने के लिए भी किया जाता है। दूसरे प्रकार के कोश द्विभाषी होते हैं। उनका उपयोग खासकर उन लोगों द्वारा किया जाता है, जो कोई भाषा सीख रहे होते हैं या जो किसी एक भाषा के किसी शब्द का अर्थ दूसरी भाषा में जानना चाहते हैं। इस कारण इन कोशों में शब्द संख्या आमतौर पर उतनी नहीं होती, जितनी एक भाषा वाले शब्दकोश में होती है और उनमें शब्दों के संबंध में न तो कोई ऐतिहासिक विवेचन होता है और न उनकी विस्तृत परिभाषा। इन कोशों का मुख्य उद्देश्य पाठक को किसी दूसरी भाषा के शब्द का समानार्थी शब्द उसकी अपनी भाषा में बताना मात्र होता है। एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद कार्य के लिए द्विभाषी कोश बहुत उपयोगी और आवश्यक होते हैं।

द्विभाषी शब्दकोश भी पाठकों की आवश्यकता को ध्यान में रख कर अलग-अलग प्रकार से तैयार किए जाते हैं और वे उसी हिसाब से पाठकों के लिए कम या अधिक लाभदायक होते हैं, जैसे अंगरेजी और हिंदी भाषा का कोई द्विभाषी शब्दकोश या तो केवल ‘अंगरेजी-हिंदी’ कोश होगा या उसमें ‘अंगरेजी-हिंदी’ और ‘हिंदी-अंगरेजी’ दो अलग-अलग खंड होंगे। अंगरेजी भाषा सीख रहे हिंदी भाषा-भाषी लोगों के लिए तैयार किए गए द्विभाषी शब्दकोश में ‘अंगरेजी-हिंदी’ खंड अधिक बड़ा और महत्त्वपूर्ण होगा और उसे तैयार करने में अधिक सावाधानी बरती जाएगी। अंगरेजी भाषा-भाषी ऐसे लोगों के लिए जो हिंदी सीख रहे होते हैं, ‘अंगरेजी-हिंदी’ की अपेक्षा ‘हिंदी-अंगरेजी’ खंड अधिक महत्त्वपूर्ण समझा जाएगा। इसका अर्थ यह कतई नहीं कि ‘हिंदी-अंगरेजी’ कोश उन लोगों के लिए उपयोगी नहीं है जो हिंदी भाषी हैं और अंगरेजी सीखना चाहते हैं। दरअसल, दोनों प्रकार के कोश दोनों भाषाओं के जिज्ञासुओं के लिए समान रूप से उपयोगी होते हैं और जहां तक संभव हो, दोनों का उपयोग करना चाहिए।

यूरोपीय भाषाओं के अच्छे शब्दकोशों में आमतौर पर शब्दों की परिभाषा या समानार्थी शब्दों के अलावा कुछ और महत्त्वपूर्ण और उपयोगी सूचनाएं भी दी रहती हैं। इस प्रकार के बड़े शब्दकोशों में कुछ सूचनाएं विश्वकोश की शैली में होती है। कुछ शब्दकोशों में उद्धरण भी खूब दिए रहते हैं, जिनका उपयोग ‘विदेशी उद्धरण कोश’ के पूरक के रूप में किया जा सकता है। कुछ शब्दकोशों में अप्रचलित शब्द और स्थानीय प्रयोग में आने वाले शब्द अलग से दिए रहते हैं। इसलिए स्थानीय इतिहास, आचार-विचार, लोक-व्यवहार आदि की थोड़ी-बहुत जानकारी के लिए भी ये उपयोगी होते हैं।

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