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जनसत्ता बारादरी: विपक्ष को अपनी मर्यादा खुद सीखनी होगी

पार्टी को जनादेश मिलने का गलत अर्थ लगाया जाने लगा है और उसमें एक तरह की तानाशाही आ गई है। वह कांग्रेस मुक्त भारत बनाने के नाम पर कांग्रेस के लोगों को अपने में शामिल करती जा रही है।
भाजपा के उपाध्यक्ष प्रभात झा।

केंद्र में भाजपा की अगुआई वाली सरकार के तीन साल पूरे हो गए। अब कहा जाने लगा है कि उसने चुनावों में जोे वादे किए थे, वे पूरे नहीं हो पाए। पार्टी को जनादेश मिलने का गलत अर्थ लगाया जाने लगा है और उसमें एक तरह की तानाशाही आ गई है। वह कांग्रेस मुक्त भारत बनाने के नाम पर कांग्रेस के लोगों को अपने में शामिल करती जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार उसे अपनी बात कहने का मौका नहीं दे रही है। ऐसे अनेक सवाल उठ रहे हैं। मगर भाजपा के लोगों के पास इसके अपने जवाब हैं। भाजपा के उपाध्यक्ष प्रभात झा ने इस बार बारादरी में शिरकत की और पार्टी तथा सरकार के कामकाज को लेकर बड़े खुले मन से बातचीत की। बारादरी का संचालन किया कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज ने।

मनोज मिश्र : प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस-मुक्त भारत बनाना है। कांग्रेस के बहुत से नेता भाजपा में शामिल हो रहे हैं। क्या इसी तरह कांग्रेस-मुक्त भारत बनाने की योजना है?

प्रभात झा : कांग्रेस का आजादी की लड़ाई में बड़ा योगदान रहा है। यह कहना कि वहां सब कुछ गलत है, मैं नहीं मानता। हमने आह्वान किया है कि वे सारे कांग्रेसी, जो राष्ट्रभक्त हैं, जिन्हें भारत माता की सेवा करने का मन है, उनका कांग्रेस में मन नहीं लगता, तो वे हमारी पार्टी में आ जाएं। मगर हमारे यहां आकर कोई कांग्रेस के चरित्र से काम नहीं कर सकता, उसे भाजपा के चरित्र से ही काम करना पड़ेगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघ चालक सदाशिव गोलवलकर का घोषवाक्य था कि आज के विरोधी को हमें कल का समर्थक बनाना है। इसलिए हम अपने विरोधी को भी अपने साथ जोड़ने की दिशा में सोचते रहते हैं। अभी हमारे पास ग्यारह करोड़ सदस्य संख्या है। चीन से भी हम आगे निकल गए हैं। हर राज्य में हम फिर से पच्चीस-तीस लाख सदस्य बनाने जा रहे हैं। हर पोलिंग बूथ पर बीस-बीस नए सदस्य। इतने सूक्ष्म स्तर पर हमने काम करते किसी को नहीं देखा। अमित शाह जी ने माइक्रो मैनेजमेंट किया है।

राम जन्म पाठक : भाजपा के विस्तारीकरण को लेकर सोशल मीडिया पर एक जुमला चल रहा है कि या तो आप भाजपा में जाइए, नहीं तो जेल जाइए। क्या ऐसा है?
’भारत की राजनीति का कोई पाठ्यक्रम नहीं है। एक राजनेता को क्या करना चाहिए, इसका कोई पाठ्यक्रम नहीं है। अभी तक होता क्या आ रहा है कि अगर विपक्ष में रहेंगे, तो चक्का जाम करेंगे, विरोध प्रदर्शन करेंगे और सत्ता में होंगे तो विरोधियों को कुचलेंगे। मगर पहली बार ऐसा हो रहा है कि राजनीति का पाठ्यक्रम बन रहा है। कांग्रेस ने कोई पाठ्यक्रम दिया ही नहीं। कहा जा रहा है कि हम विपक्ष को मजबूत नहीं होने दे रहे। हम सत्ता में हैं, हमारी तो कोशिश होगी कि हम मजबूत बनें। विपक्ष को तो अपनी दिनचर्या से मजबूत होना पड़ेगा।

दीपक रस्तोगी : मगर विपक्ष का आरोप है कि आप उसे जगह नहीं दे रहे!
’हमारी पार्टी का जन्म हुआ 21 अक्तूबर, 1951 को और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जन्म हुआ 1925 में विजया दशमी के दिन। भारतीय जनसंघ का उदय ही इस मकसद से हुआ था कि संसद में हमारे पक्ष की भी बात उठे। मगर तबसे हमें गालियां पड़ रही हैं कि ये सांप्रदायिक हैं, गांधी के हत्यारे हैं। मगर वे कहते रह गए और एक संघ का प्रचारक देश का प्रधानमंत्री बन गया। वे गाली देते रहे, हम सुनते रहे और आज स्थिति यह हो गई कि जनादेश हमारे पक्ष में आ गया। देश का राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष सब संघ से जुड़े लोग बन गए। अब राजनीतिक परिदृश्य काफी बदल गया है। हम विपक्ष को दबा नहीं रहे। दबाया तो हमें गया था आपातकाल लगा कर, क्या हमने आपातकाल लगाया!

मुकेश भारद्वाज : आपने अभी जनादेश की बात की, मगर जब जनादेश का गलत अर्थ लगा कर पार्टी में एक तरह की तानाशाही आ जाती है, तो वह ठीक नहीं होता। आपकी पार्टी पर तानाशाही का आरोप लग रहा है, क्यों?
’हम तलाश कर रहे है कि अभी विपक्ष में कोई अटल बिहारी वाजपेयी है क्या। विपक्ष के नेता के रूप में उनका देश भर में सम्मान था और देश सोचने लगा था कि कभी न कभी प्रतिपक्ष का नेता देश का प्रधानमंत्री जरूर बनेगा। अब किसी नेता में वैसा गुण है क्या! विपक्ष को अपनी मर्यादा खुद सीखनी पड़ेगी। अभी विपक्ष चूंकि हताशा में है, इसलिए वह समझता है कि सत्ता पक्ष तानाशाही कर रहा है। दरअसल, कांग्रेस बर्दाश्त नहीं कर पा रही है हमें। उसे लगता है कि उसकी सल्तनत थी, वह छिन गई। उन्हीं के नेता ने कहा कि सल्तनत चली गई, सुल्तानिया नहीं गई। विपक्ष को सोचना होगा कि उसे कैसे काम करना है।

पारुल शर्मा : प्रधानमंत्री कहते हैं कि सबका साथ सबका विकास, पर यह भी धारणा बनी है कि भाजपा फूट डालो राज करो की नीति अपना रही है।
’क्या एआईडीएमके के लोगों को हमने अलग किया था। वे खुद अलग हुए थे और खुद एक हुए हैं। दरअसल, क्षेत्रीय दलों की अपनी सीमा है, वे उससे बाहर जा नहीं पाते। बिहार में जो हुआ, उसके पीछे यही था कि नीतीश कुमार जानते थे कि वे बिहार से बाहर निकल नहीं पाएंगे और लालू यादव के चलते और परेशानी बढ़ गई, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया। ये लोग अपनी सुविधा से अलग होते या साथ होते हैं। दूसरी बात कि हम भी चाहते हैं कि अनुकूल स्थितियां बनें और हम सत्ता में आएं। जद(एकी) को हमने नहीं कहा कि हमारे साथ मिल जाओ, जद(एकी) खुद फैसला करके हममें शामिल हुआ।

सूर्यनाथ सिंह : सरकार के कामकाज से बहुत सारे लोग खुश नहीं हैं। महंगाई, बेरोजगारी आदि को लेकर आपने जो वादे किए थे, वे पूरे होते नहीं दिख रहे। क्यों?
’मेरे पास सरकार के कामकाज को लेकर एक चार्ट है, इसे देखें। 31 मई, 2014 से 31 मार्च, 2017 का। उपभोक्ता महंगाई 31 मार्च, 2014 को थी 9.46 और आज 3.81 है। तब 60.03 रुपए कीमत थी डॉलर की और आज 60.08 है। हमारे रुपए की औकात बढ़ी है। औद्योगिक उत्पादन: पहले -1.10 था, जो अब 5.2 हो गया है। यह चमत्कार है। इसका मतलब है कि रोजगार की दशा भी सुधरी है। 10.25 गृहऋण की ब्याज दर थी, आज घट कर 8.60 हो गई है। सकल घरेलू उत्पाद की दर 6.50 थी, जो अब बढ़ कर 7.10 पहुंच गई है। विदेशी मुद्रा भंडार 330.7 अरब डॉलर था, वह बढ़ कर 372.72 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। विदेशी निवेश 2014 में 24.2 अरब डॉलर था, अब 56.3 अरब डॉलर हो गया है। राजकोषीय घाटा उस वक्त 4.5 था अब 3.2 है। निर्यात: 314 अरब डॉलर था, आज 21 अरब डॉलर है, यानी निर्यात में हम पिछड़े हैं। सेंसेक्स निफ्टी- बाईस हजार पर था अब उनतीस हजार से ऊपर है। किस चीज में पीछे हुए हैं हम!

मृणाल वल्लरी : आपकी पार्टी में सिद्धार्थनाथ सिंह जैसे नेता हैं, जो कहते हैं कि अगस्त में बच्चे मरते हैं। क्या पार्टी में कोई अनुशासन नहीं है कि ऐसे असंवेदनशील बयान आते हैं?
’उनके उस बयान को किसी ने सही नहीं कहा। वह बयान आंकड़ों का नहीं, भावनात्मक था। उनके बयान को मैं उचित नहीं मानता। उन्होंने यह सोच कर कहा होगा कि वे मंत्री हैं इसलिए उन्हें बयान देना है। मगर उन्हें स्थिति को ध्यान में रखते हुए बयान देने चाहिए। उन्हें आंकड़े वाला वह बयान नहीं देना चाहिए था।

मनोज मिश्र : यह तीन तलाक वाला मामला अचानक आ गया, इसके पीछे क्या रणनीति है?
’तीन तलाक किसी भी परिवार के लिए घातक है। प्रधानमंत्री को इस पर लाल किले की प्राचीर से बोलना पड़ता है, इसका मतलब है कि उनकी संवेदना से निकली हुई बात है। जो लोग हम पर आरोप लगाते हैं कि हम सांप्रदायिक हैं, उन्हें सोचना चाहिए कि हम मुसलमान महिलाओं की चिंता करते हैं। हम अगर सीधे कानून बनाते तो लोग फिर हम पर अंगुली उठाते। अब तो सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आ गया, अब उस फैसले के आधार पर कानून बनाएंगे।

पारुल शर्मा : केरल में भारतीय जनता पार्टी खाने-पहनने को लेकर भी दबाव की राजनीति कर रही है, यह कहां तक उचित है?
’मैं क्या खाता हूं, यह मैं तय करूंगा, कोई मुझे खिला नहीं सकता। लेकिन गाय का मांस हाथ में लेकर आप सरेआम कहते फिरें कि हां मैं खाता हूं, तो यह उचित नहीं है। आपके खाने का मतलब यह नहीं हो सकता कि दूसरों को आहत करें। मैं क्या खाता हूं, यह दिखाने की चीज नहीं है। इस देश में दूसरों की भावना को आहत करने का अधिकार किसी को नहीं है, हिंदू को न मुसलमान को। केरल में दो सौ तिरानबे कार्यकर्ता मारे गए आरएसएस के, कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के भी मारे गए। यह हिंसा की राजनीति भी ठीक नहीं है। अब हमने ध्यान केंद्रित किया है कि केरल में सरकार बना कर रहेंगे। वहां वामपंथ कमजोर हो गया है, खत्म होने की कगार पर है।

राम जन्म पाठक : पनामा कांड में आपकी पार्टी के कई लोगों का नाम है!
’सदन के भीतर और बाहर साफ तौर पर अरुण जेटली जी ने कहा है कि विमुद्रीकरण और जीएसटी से हमारे लोग प्रभावित नहीं हो रहे हैं क्या? देश के सामने कोई अपना या पराया नहीं होता। पनामा में जो भी होगा, वह जाएगा।

सूर्यनाथ सिंह : पहले आपकी सरकार ने कश्मीर मसले पर सख्ती का रास्ता अख्तियार किया। अब प्रधानमंत्री गले लगाने की बात कर रहे हैं। क्या सरकार की कोई कश्मीर नीति नहीं है?
’कश्मीर के मामले में सबसे बड़ी गलती नेहरू जी ने की थी। सारी रियासतें मिलें और शेख अब्दुल्ला साहब न मिलें, क्या है यह? आज वहां स्थिति को सामान्य बनाने के लिए प्रधानमंत्री ने कहा कि गले लगा कर होगा, गाली देकर या गोली से नहीं होगा। आप हमारे पैसे से कश्मीर को अलग करने की कोशिश करो, तो वह नहीं चलेगा। इसलिए उनकी सब फंडिंग बंद की गई। इसी का नतीजा है कि अब पैसे की कमी के कारण वहां आतंकवादी कुछ कर नहीं पा रहे हैं।

मनोज मिश्र : कांग्रेस को खत्म करना आपके एजेंडे में है क्या?
’नहीं, नहीं। कौन खत्म कर सकता है। हम व्यक्ति को खत्म नहीं कर सकते, पार्टी को कौन कर सकता है!

मृणाल वल्लरी : कारपोरेट फंडिंग को लेकर कहा जा रहा है कि आप छोटे व्यापारियों पर इसलिए ध्यान नहीं दे रहे, क्योंकि बड़े पूंजीपति आपका सहयोग करते हैं।
’गलत जानकारी है वह। दो हजार रुपए वाला नियम किसने बनाया। कांग्रेस कर पाई क्या आज तक। उसमें हमें कितनी मुश्किल हुई, क्या कोई अंदाजा लगा सकता है? अभी हम लोगों ने तय किया है कि अगर सौ रुपए भी लेते हो तो चेक से लो। अमित शाह बोल कर आए हैं कि सौ रुपए भी लेना हो तो चेक से लो। हमारा सारा हिसाब-किताब पारदर्शी है।

मृणाल वल्लरी : नमामि गंगे मोदी जी की महत्त्वाकांक्षी योजना है, मगर उसके लिए वे समय नहीं निकाल पाते। क्या उसे वे भूल गए?
’गंगा पर हम लोग जितना काम कर रहे हैं, किसी ने नहीं किया। नरेंद्र मोदी बहुत बड़े विजनरी हैं। उन्होंने अभी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। वे चाहते हैं कि योजनाओं में एकरूपता हो, सभी राज्य एक तरह से उन पर काम करें। यही दीनदयालजी का सिद्धांत था- एकात्मता।

राजेंद्र राजन : अभी उत्तराखंड सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी कर दिया, जबकि भाजपा हिंदी की पक्षधर है। यह कैसी भाषा नीति है?
’उत्तराखंड की जानकारी नहीं है मुझे। मध्यप्रदेश सरकार ने भी प्राथमिक कक्षाओं में अंग्रेजी लागू कर दी थी। भाषा का ज्ञान बुरी बात नहीं है। हिंदी हमारी राजभाषा है, पंद्रह वर्ष में अंग्रेजी खत्म करने का संविधान में संकल्प किया गया था, पर नहीं हुआ। आज उत्तराखंड में क्यों किया गया, उसकी मुझे जानकारी नहीं है। सरस्वती शिशु मंदिर में भी सब कुछ पढ़ाया जाता है, मगर देखा गया कि छुट््िटयों में वहां के बच्चे खुद को हीन महसूस करते थे, तो अब वहां भी सीबीएसई का पाठ्यक्रम शुरू किया है, अंग्रेजी माध्यम से। समय के साथ चलना पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क की भाषा अंग्रेजी है, इसलिए बच्चों को उसके हिसाब से तैयार करने में बुराई नहीं है। बच्चे में कॉम्प्लेक्स नहीं होना चाहिए भाषा को लेकर। अगर वे अंग्रेजी पढ़ा रहे हैं तो उसमें बुराई नहीं है।

 

प्रस्तुति: सूर्यनाथ सिंह / मृणाल वल्लरी

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