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बाखबर- ये कंवल के फूल मुरझाने लगे हैं!

वीडियो दिखाता रहा। थप्पड़ लीला करती नेता कहती रहीं कि अगर कोई हिंदू लड़की किसी मुसलमान लड़के के साथ दिखी तो मैं फिर मारूंगी!
Author October 1, 2017 06:11 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (PTI)

दिन काशी। काशी में दुर्गा कुंड मंदिर। मंदिर में पूजा। सब कुछ शुभ शुभ। सभी चैनल दूरदर्शन से उधार लेकर लाइव दिखाते हैं। खबर टूटती है: पीएम साढेÞ तीन घंटे का ‘रोड शो’ देंगे। लेकिन रोड शो नहीं दिखता!
लाइव कवरेज जारी है। पीएम एक टायलेट की आधारशिला रखते हैं। फिर शहंशाहपुरा में किसानों को संबोधित करते हैं। एक हजार करोड़ की तेईस योजनाएं लांच करते हैं: एक टायलेट पचास हजार रुपए बचाता है। एलईडी बल्बों ने बनारस की बचत कराई है। लेकिन लाइव कवर करते डीडी के कैमरे न तो कोई ‘जन-समुद्र’ दिखाते हैं, न उसकी तालियां सुनवाते हैं। जरूरतमंदों को पीएम दस हजार मकान आबंटित करते हैं, लेकिन एक भी ताली नहीं सुनाई पड़ती! पहली बार पीएम का भाषण सूना-सूना दिखा! हर वाक्य पर ताली सुनने के आदी हमारे कान इस पर विश्वास नहीं करते! लोग शायद अति-दर्शन से बोर होने लगे हैं।

और जादू टूटता है!
कट टू बीएचयू। एक छात्रा को छेड़ा गया। छात्रा शिकायत करती रही। लेकिन किसी ने शिकायत तक नहीं सुनी। वे कहते हैं कि पीएम आ रहे हैं, अभी शांत रहो बाद में देखेंगे। छात्राओं की मांगें हैं- कैंपस में गुंडागर्दी बंद कराओ। सड़कों पर बल्ब लगाओ, लेकिन वीसी मिलते तक नहीं।
अगले रोज धरने पर बैठी शांत छात्राओं पर मर्द पुलिस लाठी भांजने लगती है। वीसी कहते हैं कि ‘मोलेस्टेशन’ नहीं हुआ। सिर्फ छेड़छाड़ की बात है।
चैनलों के एंकर इस बर्बर लाठीचार्ज की निंदा करते हैं। करते रहें! छेड़छाड़ भी कोई शिकायत करने लायक चीज है! शिकायत करोगे तो लाठी मिलेगी।
ऐसे बनता है ‘न्यू इंडिया’!  एक प्रवक्ता इंडिया टुडे पर समझाता है कि जब भी कोई बड़ा ईवेंट होता है, तो ऐसा क्यों किया जाता है? जब पीएम टायलेट बना रहे थे, योजनाएं घोषित कर रहे थे, तभी ऐसा क्यों किया गया? बीएचयू को जेएनयू बनाना चाहते हैं कुछ लोग!
हमारी प्यारी ‘न्यू इंडिया’ को नजर लगाने वालो! तुम्हारा मुंह काला!
हाय! अलीगढ़ की एक छात्रा ने एक मुसलमान लड़के के साथ चाय क्या पी ली कि ‘भारतीय संस्कृति’ खतरे में आ गई। भाजपा की एक स्त्री नेता ने छात्रा के गाल पर बाएं हाथ से एक के बाद एक दो थप्पड़ रसीद किए। वीडियो दिखाता रहा। थप्पड़ लीला करती नेता कहती रहीं कि अगर कोई हिंदू लड़की किसी मुसलमान लड़के के साथ दिखी तो मैं फिर मारूंगी!
थप्पड़ बनाते हैं ‘न्यू इंडिया’! एक ‘थप्पड़ श्री’ सम्मान तो बनता ही है सर जी!
रेप के आरोपित फारुकी को लेकर एक अदालत के एक फैसले पर रिपब्लिक पूछने लगा: ‘ना’ का मतलब ‘ना’ है कि ‘हां’? कैसी कानूनी कताई करते हैं सर जी? एक फिल्मी गाना लाइन देता है: ‘पहली पहली ना का आधा मतलब है हां’ और दूसरा गाना तो ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे’ की थीसिस तक दे डालता है!

देशभक्त चैनल उस शाम बगलें बजाने लगे जब उनको मालूम हुआ कि अपनी सेना ने म्यामां की सीमा पर नगा विद्रोहियों को मारा है। हमेशा सर्जिकल भाव से भरे रहने वाले दो एंकरों के लिए ये ‘सर्जिकल टू’ थी, जबकि खबर कहती थी कि बार्डर क्रॉस किए बिना सर्जिकल नहीं होती! लेकिन जोशीले एंकरों को तो हर दिन सर्जिकल दिखाई देती है।
अपशकुन होने लगे हैं। अपने ही बोलने लगे हैं। यशवंत सिन्हा ने लिखा कि ‘मुझे अब बोलना चाहिए!’
इधर ये इतनी मेहनत से ‘न्यू इंडिया’ के ‘न्यू नार्मल’ गढ़ रहे हैं और उधर ‘हताश’ लोग तोहमतें मढ़ रहे हैं: नोटबंदी की मार। उस पर जीएसटी का कोड़ा! इकोनॉमी मुंह के बल गिरने वाली है…! इन जलोकड़ों को उपलब्धियां नहीं दिखतीं और बकवास किए जाते हैं! इसका जवाब दिया जाएगा! दिया गया! एक मंत्री जी कहे कि यह तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। स्वच्छ सरकार है। कुछ देर का दर्द है फिर आनंद ही आनंद! दूसरे कहे कि प्रस्थापना परिवर्तन हो रहा है। बाकी अर्थव्यवस्था ठीकठाक है।

यहां तक तो ठीक था। लेकिन यशवंत की चोट से आहत मंत्री जी यहां तक कह गए कि ‘अस्सी साल का आदमी’ नौकरी ढूंढ़ रहा है! आप कितना भी मुस्कुराएं सर जी, था तो यह एक सीनियर सिटीजन के प्रति ‘हिट बिलो द बेल्ट’ ही! आप तो एकदम पर्सनलाय गए! क्या यही है ‘न्यू इंडिया’ का ‘न्यू नार्मल’? फिर बाप और बेटे के बीच बहस को पर्सनल बना दिया गया! इति सिद्धम! सत्ता कभी गलती नहीं करती। करती है तो मानती नहीं। यही है ‘न्यू इंडिया’ का ‘न्यू नार्मल’
लेकिन, अब लोग बोलने लगे हैं। मुंबई के एल्फिंस्टन फुटओवर ब्रिज पर भगदड़ से सत्ताईस कुचल कर मर गए! लोगों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए। पांच बार पुल चौड़ाने का आग्रह किया। एक ने नहीं सुनी! चैनल-चीख पुकार और दबी-कुचली लाशों को पूरे दिन दिखाते रहे। सरकार से जवाब मांगते रहे। लोग नाराज होकर बोलते रहे। टाइम्स नाउ का एंकर कहता रहा- एक दिन नेता लोग ट्रेन से ट्रैवल करें तब दाल आटे का भाव मालूम पड़े! ‘न्यू इंडिया’ के उक्त सीनों को देख दुष्यंत की एक गजल के दो मिसरे मुलाहिजा फरमाएं:
‘कैसे कैसे मंजर सामने आने लगे हैं!
गाते गाते लोग चिल्लाने लगे हैं!!
अब तो इस तालाब का पानी बदल दो!
ये कंवल के फूल मुरझाने लगे हैं!!’

 

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