June 29, 2017

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बाखबर कॉलम: स्टूडियो की देशभक्ति

देश का प्राइम टाइम युद्धोत्सुक वीरों के हवाले था। एंकरों को ‘देशभक्तों’ के बरक्स ‘देश-अभक्तों’ को पेश करना था, क्योंकि ऐसे ‘अभक्तों’ की धुलाई भी होनी थी।

Author May 7, 2017 05:06 am
भारतीय तिरंगा (पीटीआई फोटो, चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीक के तौर पर किया गया है)

चार साल के बालक के लिए एंबुलेंस नहीं मिली…! एनडीटीवी खबर देता है, लेकिन इस पर बहुत ‘हाय हाय’ नहीं करता। गऊ माता के लिए एंबुलेंस है… एनडीटीवी यह भी बता रहा है, लेकिन ‘वाह वाह’ नहीं करता। ये अर्धसमाजवादी ब्याधि काहे पाले हो भैये? ये तो गऊ समाजवाद है! टाइम्स नाउ खबर ब्रेक करता है: हेटवाहिनी यानी ‘घृणा वाहिनी’ बुलंदशहर में। फिर लाइन: एक वृद्ध मुसलमान को वाहिनी वालों ने मारा। कट। एक चश्मदीद कि वे हिंदू युवावाहिनी वाले थे…। फिर एक लाइन: वृद्ध ने एक युवा को ‘भागने’ में मदद की थी… हेट वाहिनी का आतंक! शाम तक की बहसों में वाहिनी को बचाने वाले निकल आए थे। बचाने के तर्क इस तरह चलते थे: पहले हिंसा की निंदा कर दो, फिर कह दो कि वे वाहिनी के थे भी कि नहीं क्या प्रमाण और अगर कोई वाहिनी को बैन करने के लिए कहे तो कहो कि एक संगठन है वो जाने। जांच होगी फैसला होगा!
अपने को एशिया का नंबर वन चैनल होने का दावा करने वाला लाइन लिख कर पूछ रहा था: क्या योगी जी हिंदू युवावाहिनी को वश में रख सकेंगे? दर्शकों से ऐसे छद्म सवाल क्यों पूछा करते हैं सर जी! बुधवार की शाम तक सीन बदलता है। रामदेव मोदी जी के सान्निध्य में पुलकित हैं। अवसर है पतंजलि के रिसर्च सेंटर के उद्घाटन का। बाबा रामदेव मोदी जी की प्रशंसा में विह्वल हैं। दिव्य भव्य आदर्श नेतृत्व… मोदी जी राष्ट्रऋषि हैं…।

लेकिन विघ्नसंतोषी दिग्विजय जी को कौन चुप करे? वे तो कह दिए कि नकली डिग्री रैकेटियर पीएम को राष्ट्रऋषि का सम्मान दे रहे हैं और विडंबना यह कि पीएम उसे स्वीकार कर रहे हैं। इंडिया टुडे की खबर में यह लाइन भी रही कि वे आसाराम बापू को भी राष्ट्रऋषि की उपाधि दे चुके हैं! रविवार को जब गुजरात के एक एमपी के ‘हनीट्रैप’ में फंसने की खबर आ रही थी और ब्लैकमेल करने वाली के खिलाफ केस बन चुका था, तभी पाक द्वारा दो सैनिकों के क्षत-विक्षत शरीर की खबर ब्रेक होने लगी। इस कहानी को भूल कर चैनल बदलेखोर वीररस से ओतप्रोत होने लगे: एक से एक लाइनें जोेश दिलाने लगीं: शहीदों का बदला लो। बर्बर राज्य! पाक से कीमत बसूलो। देश कब तक सहेगा? सर्जिकल स्ट्राइक अभी। कसाई सेना। न्यूज एक्स ने लाइन दी: क्या बदले की कार्रवाई होगी? एक चैनल ने लाइन दी: हाउ डू वी मेक पाक ब्लीड! हम पाक का खून कैसे बहाएं? टाइम्स नाउ पर एक नागरिक बोला: गृहमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए। इन दो सैनिकों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा। जोश और वीर रस के एक्सपर्ट एंकर राहुल शिवशंकर बोले: पाक सिर्फ एक भाषा समझता है, बदले की भाषा। सुरजेवाला बोले: हम छप्पन इंच का सीना कब दिखाएंगे?

देश का प्राइम टाइम युद्धोत्सुक वीरों के हवाले था। एंकरों को ‘देशभक्तों’ के बरक्स ‘देश-अभक्तों’ को पेश करना था, क्योंकि ऐसे ‘अभक्तों’ की धुलाई भी होनी थी। हुई। जान दयाल ने इसे ‘जिम्म्मेदारी से भागने वाला’ क्या कह दिया कि एक सेवानिवृत्त जी ने उनको ‘डर्टिऐस्ट समथिंग’ कह दिया। धुलाई के ऐसे हर मौके पर समझदार एंकर देर तक खामोश रहते हैं। जब अभक्त पक्ष की धुलाई हो चुकी होती है तब वे ‘शांति शांति’ करते हुए आते हैं। सरकार जब जैसी कार्रवाई करेगी तब करेगी, फिलहाल अगर तीन अंग्रेजी चैनलों के तीन वीर पुंगव एंकरों को बार्डर पर नई सर्जिकल करने भेज दिया जाए तो पाकिस्तान के होश हमेशा के लिए ठिकाने आ जाएं। स्टूडियो की देशभक्ति बड़ी जोरदार होती है, क्योंकि वह टाइ-सूट वाली होती है। बदला लेने की फौरी जरूरत को राजदीप सरदेसाई ने यह खबर देकर पूरा किया कि जिन पाक पोस्टों ने हत्यारों को कवर दिया उन्हें भारतीय सेना ने नष्ट कर दिया है!
शहीदों के अंतिम संस्कार आए दिन की बात है। वे आए दिन मारे जाते हैं, हम शहीदों को सलामी देते रहते हैं। एक क्रम-सा बन चला है, जिसके हम सब आदी होने लगे हैं, लेकिन अगर किसी ने जरा भी किंतु-परंतु की तो वह तुरंत एक अंग्रेजी एंकर द्वारा देशद्रोही करार दे दिया जाता है। शहीद बरक्स देशद्रोही होता रहता है। एंकर दर्शकों को क्रोध, क्षोभ, अपराधबोध और शर्म के कोड़े मारने लगते हैं।

एनडटीवी का वह शायद ‘वी द पीपल’ ही था, जिसमें एक शहीद की विधवा ने बताया कि मुझसे सर्टिफिकेट मांगे जा रहे हैं कि ये दो वो दो। मुझे यह नौकरी मिल सकती है। मेरी उम्र चालीस की है। फील्ड की नौकरी नहीं कर सकती, लेकिन कोई सुनता नहीं। फिर रुंआसी होकर बोली कि कुछ दिन तक तोे सब पूछते हैं, लेकिन सच यह है कि जिसका आदमी खो चुका होता है आखिर में उसे ही सब भुगतना पड़ता है…।यह क्या कहती हो बहन? अगर उस अंग्रेजी एंकर को सुनाई पड़ गया तो तुमको भी देशद्रोही की सनद दे देगा!  कितनी आसानी से गढ़े जाने लगे हैं ‘देशभक्त’ और ‘देशद्रोही’! जय जय बोले तो देशभक्त, एक भी सवाल पूछे तो देशद्रोही! लगता है, कुछ एंकरों ने देशभक्ति के सर्टिफिकेट बांटने की दुकान खोल रखी है! ये कौन-सी पत्राकारिता हुई जनाब?एंकरों की देशभक्ति के इस नकली जुनून को निपटाया कुमार विश्वास के विद्रोह ने!कई एंकरों के चेहरे पुरसुकून नजर आए! अहा! ‘आप’ अब टूटी कि तब टूटी। एक चैनल ने लाइन दी: ‘पच्चीस से तीस विधायक हैं कुमार विश्वास के पास’! ‘आप में युद्ध’, ‘आप में सिविल वार’! ‘विश्वास का आप में अविश्वास’! ‘केजरी का विश्वास टूटा’! ‘आप टूट के कगार पर’! मीटिंग दर मीटिंगें, लेकिन दो दिन चली कहानी का एंटीक्लाइमेक्स कइयों का धंधा चैपट कर गया!

एक हिंदी चैनल यूपीमय से ज्यादा योगीमय हो चला है। योगी जी जहां, चैनल जी वहां!रसीली खबर तो बीजेपी के एक नेता के ‘पोर्नप्रिय’ होने की थी। ऐसी ‘अनैतिकता’ में अगर कोई कांग्रेसी फंसा होता तो तीन दिन तक उसके कपड़े फटते। एक एंकर यह खबर देते हुए न जाने क्यों खुश हुआ जा रहा था कि बाहुबली ने चार दिन में पांच सौ करोड़ कमाए, लेकिन जब इतने से पेट न भरा तो चैनल ने लिखा कि बाहुबली रजनीकांत से भी बड़ा निकल गया! अब तक आपने बाहुबली झेला, अब झेलिए रजनीकांत को!

 

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First Published on May 7, 2017 3:45 am

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