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बाखबर- दो दिन जब इंडिया हिल उठी

जो कल तक तीन तलाक के पक्ष में बोलते थे, हकला कर कहने लगे कि ठीक है। अब हम अपना प्रस्ताव लाएंगे, लेकिन मुसलिम पर्सनल लॉ मूल अधिकार है! इस पर भी मुहर लगी है।
Author August 27, 2017 05:56 am
प्रतिकात्मक तस्वीर।

रता तीन तलाक को ‘ना’!
निजता के अधिकार को ‘हां’!
पहले फैसले से मुसलिम समाज हिला। दूसरे से सरकार!
बड़ी अदालत जिंदाबाद! कानून जिंदाबाद! अपना संविधान जिंदाबाद! हर तरह की निरंकुशता का जवाब है अपना संविधान!
‘तुरता तीन तलाक’ से पीड़ित हो सकने वाली मुसलिम महिलाओं को मुक्ति मिली। मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड खफा हुआ। उसके प्रवक्ता परेशान नजर आए!
जो कल तक तीन तलाक के पक्ष में बोलते थे, हकला कर कहने लगे कि ठीक है। अब हम अपना प्रस्ताव लाएंगे, लेकिन मुसलिम पर्सनल लॉ मूल अधिकार है! इस पर भी मुहर लगी है।
चैनलों के पास पीड़ित महिलाओं के हजूम थे। पीड़िताएं दो-टूक बात करतीं। दिल दहला देने वाली आपबीती कहतीं। मौलानाआें से कुछ कहते न बनता!
एक पीड़िता ने कहा कि बिना कसूर मुझे तलाक दिया गया। मैं कैसे जिंदा रही, मुझे ही मालूम है। मैंने तीन लड़कियों की शादी की है और आप यहां बैठ कर बोलते रहते हैं कि तीन तलाक ठीक! क्या ठीक है? दाल में नमक कम डला, तो तलाक तलाक तलाक। ये न हुआ तो तलाक। वो न हुआ तो तलाक।
एक बोली: मैं तो मोदी जी से कहंूगी कि कानून बनाएं। उन्हीं से उम्मीद है। पीड़िता शायरा बानो के पिता ने यहां तक कहा: हमें हलाला से नजात चाहिए, कामन सिविल कोड चाहिए!
अखिल भारतीय मुसलिम महिला मंच की जकिया सोमन ने कहा है यह पहला बड़ा कदम है, यह प्रगतिवादी कदम है, लेकिन अभी लड़ाई बाकी है।
पीड़ित महिलाएं मिठाइयां बांट रही थीं और फ्रेमों में बैठे मुसलिम नेता बगलें झांक रहे थे। तत्त्ववादी हिले हुए नजर आ रहे थे!
शाम होते-होते सभी अंग्रेजी चैनलों में तीन सौ पंचानबे पेज के फैसले की बारीकी से पड़ताल की जाने लगी। यहीं कुछ न्यायाधीशों की कुछ व्यवस्थाएं भी प्रश्नांकित की गर्इं!

अमित शाह ने लाइन देने में देर न लगाई। मोदी जी को बधाई देते हुए कह उठे कि यह एक बड़ा फैसला है, लेकिन इसे किसी की जय-पराजय की तरह नहीं लिया जाना चाहिए।
कांग्रेस के नेताओं ने तुरंत लाइन बदली। कल तक वे किंतु परंतु करते थे, अब फैसले का स्वागत करने लगे, लेकिन उनका संदर्भ पर्सनल लॉ ही रहा!
एंकरों के लिए यह खुशी का दिन था। रिपोर्टर खुश थे। ‘तुरता तीन तलाक’ से पीड़ित मुसलिम महिलाआें के साथ यह हमदर्दी अभूतपूर्व थी!
उत्साहित होकर एक अंग्रेजी चैनल ने अगला एजंडा दे डाला: अगला कदम ‘यूनीफार्म सिविल कोड’ की मांग!
दूसरा झटका सरकार को लगा।
नौ जजों की पीठ ने एक सुर से ‘निजता के अधिकार’ को ‘मौलिक अधिकार’ करार देकर निजता का हनन करने वाले तमाम तरीकों को जवाबदेह बना डाला।
एक बड़े वकील ने साफ कहा कि यह नागरिकों की जीत है और सरकार की हार!
प्रश्न उठने लगे : तेरा क्या होगा आधार कार्ड? मोबाइल सेवाएं जो बड़ा डाटा रखती हैं, उनका क्या होगा? फेसबुक पर दिए लिए जाते डाटा का क्या होगा?
टॉप के वकील आते और एक सुर से कहते कि यह सत्ता को हिलाने वाला है। आज नागरिक की निजता सर्वाेपरि है। प्रशांत भूषण फोकस में रहे।
चैनल खुशी से पागल थे। टाइम्स नाउ ने लाइन दी : एक बहुत बड़ी छलांग! सीएनएन न्यूज अठारह ने लाइन लगाई : ‘वी द पीपल’ की बड़ी जीत !
मिरर नाउ ने लाइन दी : निजता का अधिकार सर्वोपरि : दूसरी बड़ी जीत का क्षण!
इन हिलाने वाली कहानियों के बरक्स कर्नल पुरोहित की कहानी भी कम हिलाने वाली नहीं रही!
कई चैनल तो कर्नल पुरोहित की कहानी में की गई साजिशों को एक-एक कर खोलते रहे, लेकिन कर्नल पुरोहित की जमानत के फैसले के बाद यह सब चैनलों की कहानी बन गई!

एकदम नई उत्तर-कहानी सी नजर आई। चैनलों ने दस्तावेज तक दिखाए कि पुरोहित को हिंदू आतंकवादी बनाने की कहानी किस तरह बनाई गई! फंसाने के लिए भी जांच में कहां-कहां गड़बड़ हुई?
वकील हरीश साल्वे लगभग हर चैनल पर थे। उन्होंने कहा कि ‘मकोका’ की कहानी उसे जेल में सड़ाने के लिए ही बुनी गई। बदलती कहानी देख-सुन पुरोहित के प्रति हमदर्दी पैदा होती थी!
दो चैनल चाहते रहे कि तमिलनाडु में ओपीएस और ईपीएस एक साथ हो जाएं। वे एक शाम हो भी गए। चैनलों ने बधावे गाए। लेकिन फिर टीटीएन ने विघ्न डाल दिया। उन्नीस विधायकों को ले उड़े और फिर रिसॉर्ट राजनीति शुरू! ओपीएस प्लस ईपीएस माइनस टीटीएन यानी सब बेकार!
अब लीजिए, हरियाणा सरकार को हिला रहे हैं एमएसजी बाबा राम रहीम! दो दिन से यह कहानी हर हिंदी चैनल पर छाई हुई है।
बाबा की फिल्मों के सीनों में उनके डेरे के सीन, उनके समर्थकों के सीन, मिक्स कर कर के चैनल बताते रहे कि पच्चीस अगस्त को सीबीआई की अदालत बाबा पर लगे रेप के आरोप पर अपना फैसला सुनाने वाली है, इसलिए पंचकूला में टेंशन है।

एक चैनल ने कहा, बाबा के एक लाख समर्थक डेरे में जमा हैं। दूसरे ने कहा, दस लाख जमा हैं। तीसरे ने बताया कि वे केरोसिन और गैस सिलेंडर इकठ्ठे कर रहे हैं। प्रशासन ने तगड़ा बंदोबस्त किया है। मगर हैरानी कि प्रशासन ने इतनी बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा होने दिया। फिर वही हुआ, जिसकी आशंका थी- गिरफ्तारी का फैसला आते ही बाबा के भक्तों ने खुल कर उत्पात मचाया। जगह-जगह तोड़फोड़, आगजनी और हिंसा की।
चैनलों ने इस घटना को भी खूब कवरेज दी। इससे साफ नजर आता था कि एक बाबा के आगे प्रशासन के हाथ-पैर फूले हुए हैं। स्कूल कॉलेज बंद रहे। सोलह हजार पुलिस लगी है। बाबा समर्थकों से निपटने में उसके पसीने छूट गए।
उधर बाबा के समर्थक उनके नाम के कीर्तन गाते रहे और कई युवा कहते दिखे कि हम बाबा के लिए अपनी जान तक दे सकते हैं!
एक ओर ‘माडर्निटी’ हिला रही है, तो दूसरी तरफ ‘मध्यकालीनता’ हिला रही है।
धन्य है हमारा प्यारा भारतवर्ष!

 

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  1. S
    Sidheswar Misra
    Aug 27, 2017 at 11:34 am
    राष्ट्र भक्त जलते राष्ट्र को देखते रहे ,खुद लगाई आग पानी कहा पाते .किसका तुस्टीकरण .
    (0)(0)
    Reply
    सबरंग