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अश्विनी भटनागर का कॉलम : धांधली का जनतंत्र

सात जून को यह तय हो जाएगा कि अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार कौन होगा। रिपब्लिकन पार्टी ने अपना उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प के रूप में पहले ही चुन लिया है।
Author नई दिल्ली | June 5, 2016 04:41 am
राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप। (REUTERS/Jim Urquhart/File Photo)

सात जून को यह तय हो जाएगा कि अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार कौन होगा। रिपब्लिकन पार्टी ने अपना उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प के रूप में पहले ही चुन लिया है। डेमोक्रेटिक पार्टी की सिलेक्शन (इलेक्शन?) प्रक्रिया में अब दो ही उम्मीदवार बचे हैं- पूर्व सेक्रेटरी आॅफ स्टेट हिलेरी क्लिंटन और समाजवादी विचारधारा के सिनेटर बर्नी सांडर्स। इन दोनों के बीच में आखिरी घमासान कैलिफोर्निया में सात जून को होना है। कैलिफोर्निया अंतिम राज्य है, जो इन दोनों के बीच चुनाव करेगा और उसके बाद पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार की औपचारिक घोषणा होगी।

पर इस बार अमेरिका में चुनाव की प्रक्रिया पर सीधी अंगुलियां उठ रही हैं। शुरुआत में वोट हरण की जो दबी जुबान में चर्चा होती थी वह आज सड़कों पर नारों में बदल गई है। बर्नी सांडर्स के समर्थक अपनी ही पार्टी के अधिकारियों से वोट हरण और वोट शमन के आरोपों को लेकर हाथापाई तक पर उतर आए हैं।

उनका कहना है कि चुनाव के हर चरण में और लगभग हर राज्य में क्लिंटन के पक्ष में वोट चुराए गए हैं। जहां वोट हरण नहीं हो पाया है वहां सांडर्स के समर्थकों को वोट डालने से रोका गया है।

यह गंभीर आरोप है और कुछ की तो जांच भी हो रही है। इन जांचों का निष्कर्ष कुछ भी निकले, पर अमेरिका में गलत गिनती, बूथ कैप्चरिंग, वोट शमन और मतदाताओं को गुमराह कर गलत उम्मीदवार को वोट पड़वाने के सबूतों की वजह से चुनाव प्रक्रिया बुरी तरह दूषित हो गई है।

अमेरिका में कम से कम आधा दर्जन राज्य ऐसे हैं, जिनमें व्यापक तौर पर गड़बड़ी हुई है। इनमें से एक अरिजोना राज्य में पिछड़े वर्गों (जैसे लैटिनो या अश्वेत) के वोट दबाने के लिए मतदान केंद्रों की संख्या चार सौ से घटा कर मात्र साठ कर दी गई थी। इसका सीधा असर यह पड़ा कि ज्यादातर मतदाता वोट डाल ही नहीं पाए और जो डाल पाए उन्हें लाइन में पांच पांच घंटे लगे रहना पड़ा।

न्यूयार्क जैसे बड़े शहर में भी एक हजार से ज्यादा गंभीर शिकायतें दर्ज की गर्इं। ब्रुकलिन इलाके में एक लाख बीस हजार मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से गायब पाया गया। नेवडा राज्य, जो कि अपने जुआ घरों के लिए मशहूर है, में वोट हरण के लिए कैसिनो के मालिकों से कहा गया कि एंटी क्लिंटन कर्मचारियों की पहचान करे और मतदान वाले दिन उनको वोट डालने के लिए छुट्टी न दे।

विस्कॉन्सिन और ओहयो जैसे राज्यों में कई तरह के पहचान-पत्रों को स्वीकार नहीं किया गया, जिससे विद्यार्थियों का एक बड़ा तबका वोट नहीं डाल पाया। कनेटिकट में मतदाताओं को वापस भेज दिया गया, क्योंकि ‘मतपत्र कम पड़ गए’ थे और रोड आइलैंड में जान बूझ कर वोटरों को पहचान-पत्र की गलत जानकारी दी गई। वोटर जब अपना गलत आइडी लेकर बूथ पर पहुंचे तो उन्हें वोट नहीं डालने दिया गया।

हिलेरी क्लिंटन जिस तरह से मेसाचुसेट और आयोवा में जीतीं उसके बारे में चुनाव विश्लेषण के जानेमाने गुरु नेट सिल्वर कहते हैं: ‘हिलेरी पता नहीं कैसे आयोवा में जीत गर्इं, जबकि वे केंसास और मिन्निसोता में बुरी तरह से हार गई थीं। और पता नहीं कैसे सांडर्स मेसाचुसेट में हार गए, जबकि वे न्यू हैंपशायर में बहुत बड़े बहुमत से जीते थे। यह हो नहीं सकता था और इसीलिए मुझे लगता है कि हमारी चुनाव-व्यस्था धवस्त-सी हो गई है।इस पर अब विश्वास नहीं किया जा सकता।’

केंटकी राज्य में 17 मई को क्लिंटन और सांडर्स की उम्मीदवारी पर मतदान हुआ। मैं उन दिनों वहीं था। हिलेरी और उनके पति बिल क्लिंटन ने एक हफ्ते में चार बार राज्य का दौर किया। दोनों की सभाओं में मुश्किल से भीड़ जुटी। हाल यह हो गया था कि हिलेरी क्लिंटन ने केंटकी के सबसे बड़े शहर लुइविल में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए वहीं से अपनी नेशनल पॉलिसी की घोषणा की। इसमें उन्होंने बताया कि अगर वे राष्ट्रपति बन जाती हैं तो वे किन मुद्दों बार विशेष ध्यान देंगी।

जब इसका भी कोई खास असर उन्हें नजर नहीं आया तो उन्होंने कह दिया कि अमेरिका की राष्ट्रपति बनने पर वे अपने पति और पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को देश की अर्थव्यस्था सुधारने के काम में लगाएंगी। ‘आपको याद है न कि जब बिल राष्ट्रपति थे तो अमेरिका की अर्थव्यस्था कितनी मजबूत थी?’ उन्होंने बड़े उत्साह से लोगों से पूछा था।

दूसरी तरफ सांडर्स की सभाओं में जन सैलाब उमड़ा। मतदान के दिन भी सांडर्स समर्थकों की लंबी लाइन बूथों पर लगी थी और उत्साह का माहौल था। पर देर शाम घोषणा हुई कि हिलेरी चुनाव जीत गई हैं- मात्र दशमलव चार प्रतिशत वोटों से, यानी सिर्फ पांच हजार वोटों से। सभी हतप्रभ थे।

वास्तव में हिलेरी क्लिंटन की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पाने की चुनावी दौड़ में लगभग सभी राज्यों से गड़बड़ी की गंभीर शिकायतें आ रही हैं। हालत यह है कि जाने-माने गैलअप पोल के एक सर्वे के अनुसार सत्तर प्रतिशत अमेरिकियों को इस चुनाव प्रक्रिया में विश्वास नहीं है। वे मानते हैं कि यह व्यवस्था भरोसेमंद नहीं रही और जो कुछ हो रहा है वह एक इलेक्शन फ्रॉड है।

हिलेरी क्लिंटन इन सारे आरोपों पर चुप्पी साधे हुई हैं, जबकि सांडर्स जम कर शोर मचा रहे हैं। कैलिफोर्निया उनके लिए करो या मरो की लड़ाई है, क्योंकि अगर यहां से वे एक बड़े अंतर से जीत जाते हैं तो डेमोक्रेटिक पार्टी के सम्मेलन में हिलेरी क्लिंटन की उम्मीदवारी को नई चुनौती दे सकते हैं। दूसरी तरफ हिलेरी समर्थकों का कहना है कि वे चुनाव जीत चुकी हैं और अगर सांडर्स कैलिफोर्निया में विजयी भी होते हैं, तो हिलेरी के नामांकन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अभी तक पड़े वोटों की गिनती के हिसाब से यह सही भी है।

पर जो सही नहीं है वह यह कि ये वोट पड़े कैसे? क्या प्रक्रिया स्वच्छ थी? क्या उसमें पारदर्शिता थी? क्या लोकतांत्रिक मूल्यों को ईमानदारी से निभाया गया? या फिर हिलेरी क्लिंटन ने वोट हरण, वोट शमन और गलत गिनती करा कर लोगों से चुनाव अपने पक्ष में छीन लिया?

और सबसे अहम सवाल: क्या ‘स्वतंत्र’ अमेरिकी मीडिया की भूमिका पक्षपात भरी थी, जैसा सांडर्स लगातार कह रहे हैं? अगर हां, तो आगे उसे क्या करना चाहिए? ये सभी सवाल सात जून के बाद ठंडे नहीं पड़ेंगे, बल्कि आगामी राष्ट्रपति चुनाव पर गहरा असर डालेंगे। अमेरिका विश्व में लोकतंत्र की मिसाल है। अच्छा होगा अगर यह मिसाल कायम रहे, दागदार न हो।

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