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बारादरी- कुछ अच्छे लोग भी हैं ‘आप’ में

दिल्ली निगम चुनावों में भाजपा की भारी जीत के बाद गायक और नायक की प्राथमिक पहचान रखने वाले मनोज तिवारी राजनीति के मैदान में नायकत्व की ओर बढ़ चुके हैं। उनका दावा है कि जल्द ही पार्षदों को वेतन और निगमों को सीधे फंड आबंटन जैसे कदम उठा कर दिल्ली में निकाय शासन की तस्वीर बदली जा सकती है। भाजपा को मिले जनता के समर्थन और आम आदमी पार्टी से आम आदमी के दूर होने की बात करते हुए ‘बारादरी’ में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने मध्यावधि चुनावों की आशंका जाहिर की और दावा किया कि एक साल के अंदर दिल्ली में हमारी सरकार होगी। कार्यक्रम का संचालन किया कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज ने।
मनोज तिवारी इंटरव्यू के दौरान।

मनोज मिश्र : दिल्ली की व्यवस्था में बिखराव को दूर करने के लिए क्या होना चाहिए?
मनोज तिवारी : दिल्ली में कई दिल्ली है। एक दिल्ली लटयन की है, एक भारत के सभी हिस्सों से आए, कुछ करने की कोशिश करने वालों की दिल्ली है। उन सबके लिए कुछ करने के लिए दिल्ली का प्रदेश होना बहुत जरूरी है। मगर दिल्ली में जो व्यवस्था अभी है, वह ठीक है। केंद्र की भी एक व्यवस्था जरूरी है, क्योंकि यह देश की राजधानी है। अगर यहां सिर्फ मुख्यमंत्री बैठेंगे तो फिर प्रधानमंत्री कहां बैठेंगे। मगर इसके साथ जो दूसरी दिल्ली है, उसके लिए दिल्ली प्रदेश होना जरूरी है। उनका ध्यान रखने वाला मुख्यमंत्री होना चाहिए, इसलिए उसकी व्यवस्था है। जहां तक निगम के फंड वगैरह की बात है, तो उसे लेकर एक प्रभावी नीति बननी चाहिए। जिसके मद में जो पैसा है, उसे मिले।

मुकेश भारद्वाज : कितना अरसा पहले आपको पता चल गया था कि दिल्ली प्रदेश की कमान आपके पास आने वाली है?
मनोज तिवारी : मुझे अखबारों से पता चला था। जिस दिन ‘जनसत्ता’ में खबर छपी कि मुझे दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष बनाया जा सकता है, तो मैंने मान लिया कि ऐसा हो सकता है।

सूर्यनाथ सिंह : दिल्ली में दिग्गज नेताओं के रहते आपको प्रदेश भाजपा की कमान सौंपी गई। अध्यक्ष बनने के बाद आपको किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा?
मनोज तिवारी : बड़े नेताओं के होने से मुझे सहूलियत हुई, क्योंकि जो मेरा कम अनुभव था, प्रेम-मुहब्बत से उनका अनुभव मुझे मिल गया। मैं बहुत सकारात्मक ढंग से सोचता हूं। मैं अपने वरिष्ठों से तारतम्य बिठा लेता हूं। थोड़ा झुकने का स्वभाव है, तो जैसे-जैसे मैं उन लोगों से मिलता गया, वे लोग अपनी-अपनी शक्ति देते गए।

दीपक रस्तोगी : रवि किशन और आपके बीच प्रतिद्वंद्विता थी, उन्हें कैसे पार्टी में ले आए?
मनोज तिवारी : रवि किशन में राजनीतिक इच्छाशक्ति तो दिख ही रही थी। कांग्रेस से सांसद का चुनाव भी लड़ चुका था। मैंने उसे तब भी कहा था कि तुम गलत पार्टी में जा रहे हो, तुम्हें भाजपा में आना चाहिए। उसके बाद जब हम मिलते थे तो मुझे महसूस हुआ कि मुझे उन्हें पार्टी में आने का निमंत्रण देना चाहिए। उसका दिल साफ है। जब मैंने उसे प्रधानमंत्रीजी से मिलवा दिया तो उसने कहा कि इतनी जल्दी तो कांग्रेस में महासचिव से भेंट नहीं होती, जितनी जल्दी तुमने प्रधानमंत्री से मिलवा दिया। अब वह हमारा साथी है। हम दोनों का एक-दूसरे पर विश्वास है।

मनोज मिश्र : आपने एक स्टार का जीवन जिया है, अब उधर लौट कर जाने के बारे में क्या राय है?
मनोज तिवारी : जी लिया जितना जीना था वह जीवन। कभी-कभार अपनी बात कहने के लिए एकाध सिनेमा कर सकते हैं। लेकिन रोजगार के लिए उधर का रुख नहीं करूंगा। मैं गायक हूं और महीने में दो-तीन कार्यक्रम करके मुझे अपनी जरूरत भर का पैसा मिल जाता है।

सूर्यनाथ सिंह : दिल्ली नगर निगम चुनावों में आपने निवर्तमान पार्षदों को इसलिए टिकट नहीं दिया कि उन पर भ्रष्टाचार के आरोप थे। अब नए पार्षद ऐसा न कर पाएं, इसके लिए क्या उपाय किए हैं आपने?
मनोज तिवारी : हम उन्हें नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हैं। अभी सभी पार्षदों का एक प्रशिक्षण शिविर करने जा रहे हैं। हम लोग इस बार पार्षदों को वेतन की व्यवस्था करने जा रहे हैं। तीनों निगमों को एक करने का प्रस्ताव भी उनमें एक है। भाजपा शुरू से निगमों के बंटवारे के खिलाफ थी। इसी तरह हम निगम में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए आवासीय कालोनियों को नियमित करने की दिशा में काम करने जा रहे हैं। आजकल दिल्ली की गलियों में एक शब्द चल रहा है- ‘लेंटरमैन’। यानी हर लेंटर के लिए उनका रेट तय है। दिल्ली सरकार के तीन-चार विभागों ने मिल कर इसे संस्थागत भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है। पहले दिल्ली सरकार अवैध कॉलोनियां कटवा देती है। फिर बाद में पुलिस आंख बंद रखती है और फिर एमसीडी वाले आते हैं। जबकि हर घर बनाने वाला परेशान है। हम इस सिलसिले को बंद करना चाहते हैं। जो घर बन गया है, उसका राजस्व तय हो और आगे के निर्माणों पर कड़ाई से नजर रखी जाए। अगले चार महीने तक मैं कूड़ा-मुक्त दिल्ली और स्प्रेयुक्त दिल्ली बनाने का अभियान चलाने जा रहा हूं। मैं यह दावे के साथ कह रहा हूं कि गैरकानूनी रिहाइशी व्यवस्था को समाप्त करेंगे।

मृणाल वल्लरी : आपने एमसीडी की जीत को सुकमा के शहीदों को समर्पित किया था, इसके पीछे कोई खास वजह।
मनोज तिवारी : जिस दिन चुनाव के नतीजे आए उससे एक दिन पहले ही सुकमा में हमारे जवान शहीद हुए थे। वह बहुत दुखद घड़ी थी, इसलिए हमने जीत का जश्न रोक दिया था।

पारुल शर्मा : दिल्ली में आपकी आगामी योजना क्या है?
मनोज तिवारी : हमारा मुख्य मुद्दा दिल्ली सरकार के साथ फंड का है। नौ हजार करोड़ रुपए प्रतिवर्ष इस समय दिल्ली के तीनों निगमों को देना है, जिसमें से उन्होंने मात्र अट्ठाईस सौ करोड़ रुपए इस बार निर्गत किए हैं। इस कारण कर्मचारियों को समय से वेतन नहीं दिया जा पा रहा है, उनकी पेंशन रुकी हुई है, सफाई के आधुनिक उपकरण नहीं खरीदे जा पा रहे हैं। वह पैसा हम मांग रहे हैं। अगर नहीं मिलता है तो हमने दूसरे रास्ते भी सोच रखे हैं। हमने गृह मंत्रालय से कहा है कि जब प्रदेश सरकार भेदभाव कर रही है तो आप एमसीडी का फंड सीधा निर्गत करें।

मृणाल वल्लरी : नोटबंदी के समय कहा गया था कि इससे आतंकवाद, भ्रष्टाचार पर नकेल कसेगी। मगर आतंकी घटनाओं के साथ नक्सली हमलों में भी इजाफा हुआ है।
मनोज तिवारी : सरकार अपनी तरफ से कोशिश कर रही है। जो संभावनाएं हैं, उन पर काम हो रहा है। जिस वक्त नोटबंदी हुई थी, उस वक्त पत्थरबाजी रुक गई थी। यह तो साबित हुआ था कि लोगों को पैसे देकर पत्थर फिंकवाए जा रहे हैं। सरकार नई स्थितियों के मुताबिक काम कर रही है। यह गंभीर चुनौती है।

मनोज मिश्र : आम आदमी पार्टी का भविष्य क्या है?
मनोज तिवारी : खत्म है। ये जो भी कर रहे हैं, सिर्फ बातों में कर रहे हैं। चाहे वह स्वास्थ्य का क्षेत्र हो, शिक्षा का या दूसरा, सब जगह समस्याएं पहले से बढ़ गई हैं। सबको पता है कि दिल्ली में पानी माफ है और बिजली हाफ है, मगर हकीकत यह है कि लोगों को पानी के लिए घंटों कतार में खड़े रहना पड़ता है। झुग्गियों के लोग कहते हैं कि हमें पानी नहीं मिल रहा। लोग औसतन तीन-चार घंटा पानी भरने में समय लगाते हैं। एक परिवार के कम से कम दो सदस्य इस काम में लगते हैं। इस तरह पानी भरने में जो समय लगता है, उसकी मजदूरी करीब चार सौ रुपए प्रति दिन बैठती है। अगर पानी का मीटर लगा दें तो इतना खर्चा तो नहीं आएगा। इन सबके कारण लोग गुस्से में हैं।

रामजन्म पाठक : दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने में आपकी तरफ से अड़ंगा क्यों है?
मनोज तिवारी : अड़ंगा हमारी तरफ से नहीं, केजरीवाल की तरफ से है।

मनोज मिश्र : आम आदमी पार्टी में झगड़े की क्या वजह है? कुछ लोगों का कहना है कि आप उनके लोगों को फोड़ रहे हैं।
मनोज तिवारी : उनके झगड़े की वजह उनकी नाकामी है। हर पार्टी में कुछ अच्छे लोग हैं, पर उनकी बात नहीं सुनी जाती तो मुश्किल खड़ी होती है। केजरीवाल साहब इसलिए डरे कि विश्वास सुकमा के शहीदों के बारे में बोलने लगे। केजरीवाल एक बार भी सुकमा के शहीदों के बारे में नहीं बोले।

मुकेश भारद्वाज : आपने कहा कि हर पार्टी में कुछ अच्छे लोग हैं। क्या कुमार विश्वास अच्छे आदमी हैं?
मनोज तिवारी : मैंने व्यक्ति की बात नहीं की। विचार की बात की। जब कुमार विश्वास ने कहा कि आम आदमी पार्टी जनता से कट चुकी है तो जनता भी तो वही कह रही थी। कुमार ने कहा कि चाहे जो हो जाए वे देशभक्ति वाला वीडियो डिलीट नहीं करेंगे। सवाल है कि आप उस वीडियो को डिलीट करने का दबाव बना ही क्यों रहे थे।

सूर्यनाथ सिंह : अमानतुल्ला के इस दावे में कितनी सच्चाई है कि कुमार विश्वास लोगों को तोड़ कर भाजपा में ले जाना चाहते हैं?
मनोज तिवारी : इसमें कोई सच्चाई नहीं है। अगर हमसे कोई जुड़ना चाहेगा, आकर कहेगा कि जुड़ना चाहते हैं और हमें लगेगा कि उसे जोड़ा जाना चाहिए तो जोड़ेंगे।

मनोज मिश्र : दिल्ली विधानसभा का चुनाव कितनी दूर है? क्या अगले मुख्यमंत्री का चेहरा आप होंगे?
मनोज तिवारी : ऐसा आभास हो रहा है कि यह सब साल भर के भीतर हो जाएगा। जिस तरह से इन लोगों के भीतर झगड़े हैं और जनता दुखी है, उसे देखते हुए ऐसा लगता है कि ये लोग बहुत दिन चलेंगे नहीं। इक्कीस विधायकों का फैसला जैसे ही आएगा, आम आदमी पार्टी बिखर जाएगी।

पारुल शर्मा : फिल्म निर्माण को लेकर किसी नीति की योजना है आपके मन में?
मनोज तिवारी : राज्य सरकारों को चाहिए कि फिल्म टूरिज्म को बढ़ावा दें। बहुत सारे देश फिल्म निर्माताओं को सबसिडी देते हैं। हम नहीं दे रहे हैं। मुंबई से फिल्म इंडस्ट्री को निकाल कर पूरे देश में फैलाना है तो इस तरह की योजनाएं बनानी पड़ेंगी। अभी उत्तर प्रदेश की फिल्म नीति सबसे बढ़िया है। वे फिल्मों की शूटिंग के लिए जाने वालों को होटल आदि में ठहरने पर छूट देते हैं। उससे हर राज्य सरकार को प्रेरणा लेनी चाहिए।

मृणाल वल्लरी : भोजपुरी फिल्मों में गंभीर विमर्श नहीं हो पाता। उस पर अश्लीलता के आरोप लगते हैं। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे।
मनोज तिवारी : असल में देखा और सुना ही वही जा रहा है जो अश्लील है। उसके समांतर अच्छी फिल्में भी बन रही हैं। भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल न किए जाने की वजह से परेशानियां पैदा हो रही हैं। जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक न तो भोजपुरी फिल्मों और न उनके कलाकारों को सम्मान मिलेगा और न अच्छी फिल्में बनाने का प्रयास होगा।

अरविंद शेष : दिल्ली में सारे सिनेमा हॉलों के टिकट महंगे हो गए हैं। इससे पाइरेसी बढ़ रही है। इससे कैसे पार पाया जा सकता है?
मनोज तिवारी : सिनेमा के टिकटों का रेट कम होना चाहिए। सिनेमा हालों को टूरिस्ट प्लेस की तरह डेवलप किया जाना चाहिए। मध्यवर्गीय सिनेमा हॉल भी बनने चाहिए। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी तो सारे सिनेमा हॉलों को सुधारने का प्रयास किया जाएगा।

दीपक रस्तोगी: आने वाले समय में योगी आदित्यनाथ और नरेंद्र मोदी में से किसका कद बड़ा होगा?
मनोज तिवारी : मोदी जी के सपनों के भारत को बनाने में जो भी योगदान करेगा, मोदी जी उसका कद निश्चित रूप से बढ़ा देंगे। हम सभी प्रदेश अध्यक्ष और भाजपा शासित राज्यों के लोग मोदी जी के सपनों को साकार करने में लगे हुए हैं। हम कामना करते हैं कि वे 2034 तक इसी तरह काम करते रहें।

पारुल शर्मा : अगर पार्टी कहती है कि आपको दिल्ली का मुख्यमंत्री बनना है तो क्या आप उस जिम्मेवारी के लिए तैयार हैं?
मनोज तिवारी : अभी मैं पार्टी अध्यक्ष के रूप में अच्छा काम करने का प्रयास कर रहा हूं। आने वाले दिनों में दिल्ली में हम लोग अच्छा मुख्यमंत्री देंगे। यह तो तय है कि अगला मुख्यमंत्री भाजपा का होगा। और केजरीवाल जी से हम यही प्रार्थना करना चाहेंगे कि जो उनका बचा हुआ समय है उसे वे अनर्गल प्रचार में व्यर्थ न गंवाएं। एमसीडी के साथ सहयोग करें ताकि दिल्ली को अच्छा बनाया जा सके।

 

 

प्रस्तुति: सूर्यनाथ सिंह / मृणाल वल्लरी

 

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