June 28, 2017

ताज़ा खबर
 

रविवारीय स्तम्भ

बाखबर- दलित विमर्श का जलवा

कई चरचाकार रामनाथ की जीत के प्रति इतने आश्वस्त दिखते हैं कि उनको ‘केंडीडेट’ की जगह सीधे नए ‘राष्ट्रपति’ बोल देते हैं!

वक्त की नब्ज- बेकाबू होता कश्मीर

अयूब पंडित की हत्या साबित करती है कि अभी तक जो मोदी सरकार की कश्मीर में रणनीति रही है वह विफल हो गई है।...

दूसरी नजर: नए कर विधान का मंगलाचरण

जीएसटी का रास्ता आसान या आराम का नहीं है, बल्कि हमें सतत प्रयास करने होंगे ताकि हम संसद में की गई प्रतिज्ञाओं को, और...

लोग-गीत: विरह से उपजा गान

अधिकांश लोकगीतों की रचना आस्था के दौर में हुई है इसलिए आस्तिक आचार-विचार इनमें अवश्य दिखते हैं।

नए पाठ का मानस

‘तेहिं कीन्ह प्रकट पाखंड’ (लंकाकांड) जैसी पंक्ति में रावण की माया और बाजार के पाखंड में एक साम्यता दिखती है। राम-रावण युद्ध में रावण...

साहित्यकार की जगह

हिंदी लेखक आज भी पता नहीं कैसे इस मुगालते में हैं कि भाषा नहीं बचेगी फिर भी साहित्य बचा रहेगा।

बाखबर- दादी मां के नुस्खे

एक चैनल लालू के पीछे पड़ा है। एक ‘डॉक्टर डैथ’ के पीछे लगा है। एक माल्या को धर लेने के लिए अड़ा है। अगर...

तीरंदाज: संवाद का राजधर्म

अगर देखा जाए तो महाभारत के सौ कौरव और पांच पांडव प्रतिभावान लोग थे। मिल कर या फिर अलग-अलग भी उनमें प्रजाहित करने...

प्रतिरोध रचती धुनें

भारतीय संगीत के क्षेत्र में प्रचलित मुहावरा है- ‘ओल्ड इज गोल्ड’। माना जाता है कि पुराने गीतों में कलात्मक औदात्य है, इसलिए वे हमारी...

पश्चिमी संगीत और युवा

पुरानी हिंदी फिल्मों में अक्सर गांव से आकर शहर में पढ़ने-लिखने वाले किसी लड़के को शहर के किसी धनीमानी परिवार की लड़की से...

वक्त की नब्ज: नए देशभक्त

मैं उन लोगों से माफी मांगती हूं, जिनकी धार्मिक भावनाओं को मैंने गलती से आहत किया उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की नकली तस्वीर ट्वीट...

दूसरी नजर- क्यों नाराज हैं किसान

सरकार को सूखे के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता, पर सरकार सूखे से पैदा हुए हालात को न संभाल पाने की दोषी तो...

बाखबर- हैपी देश में हाय हाय

केंद्रीय कृषिमंत्री राधामोहन सिंह जब रामदेव के साथ योग साधना करते दिखे, तो टाइम्स नाउ ने लाख रुपए की लाइन लगाई: किसान खाएं बुलेट,...

शिक्षा का बाजारवाद

शिक्षा को जब हम अपने अतीत से जोड़ते हैं तो संस्कार की ध्वनि सुनाई देती है, लेकिन जब अपने वर्तमान समय से जोड़ते हैं...

वक्त की नब्ज-नए भी पुरानी लीक पर

किसानों का आक्रोश अगर बढ़ता दिख रहा है दिन-ब-दिन तो इसलिए कि कृषि नीति हमारी दशकों से गलत रही है। निवेश होना चाहिए था...

दूसरी नजर: मेक इन इंडिया का फ्लॉप शो

भारत के जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा करीब 16.5 फीसद है। कृषिक्षेत्र का हिस्सा तेजी से कम हुआ है और सेवाक्षेत्र का हिस्सा तेजी...

इंटरव्यू: स्वरा भास्कर- समाज की सोच को सामने लाता है सिनेमा

मुझे रोज गालियां मिलती हैं। यह स्थिति बहुत भयावह लगती है। मुझे लगता है कि जब ऐसी गैर-कानूनी बातें हमारे कानून बनाने वाले करें...

फिर भी वही उदासी!

जीडीपी के गिरने की खबर जैसे ही टूटी, सबने धांय करके ब्रेकिंग न्यूज बना डाली कि अनुमान से नीचे, बहुत नीचे आया जीडीपी! सौजन्य...

सबरंग