April 23, 2017

ताज़ा खबर

 

रविवारीय स्तम्भ

अल्पसंख्यक भाषाओं की वेदना

ये महज जीवन-निर्वाह के कुछ तत्त्व नहीं होते, बल्कि अपने समाज के प्रतिरोध के विभिन्न स्तर होते हैं, जिनके समाप्त होते ही उस...

साहित्य और क्षोभ

मध्यकाल में क्षोभ के सबसे बड़े कवि कबीर हैं। अलंकारशास्त्री इसे बेशक न समझते हों, कबीर की रचनाओं को कंठहार बनाने वाली जनता इसे...

बाखबर: जैसी आपकी मर्जी महाराज!

जनता से कनेक्शन है तो मोदी जी का है, किसी और का तो दूर-दूर नहीं है... वे गुजराती प्राइड के प्रतीक हैं... बीजपी की...

तीरंदाज- वास्तविक पहलवान आभासी अखाड़ा

ट्विटर पर आपको गंवार भी उतने ही मिलेंगे, जितने कि सयाने बुद्धिजीवी। अंधभक्त भी उतने ही हैं, जितने कि अनीश्वरवादी।

वक्त की नब्ज- घाटी में नई नीति की जरूरत

क्या उनसे भी बातचीत हो सकती है, जो अल्लाह के नाम पर लड़ रहे हैं हमारे ‘काफिर’ मुल्क के खिलाफ? किस तरह? किस आधार...

दूसरी नजर: जॉर्ज आरवेल को फिर पढ़ें

विशिष्ट पहचान नंबर जरूरी है, लेकिन इसे लोगों की जिंदगी के बारे में संभावित जासूसी या निजी सूचनाएं इकट्ठा करने का जरिया नहीं...

नन्ही दुनिया- गुब्बारा

एक लाल रंग की मारुति कार केतन के सामने रुकी। केतन को कार मैं बैठी छोटी बच्ची साफ नजर आ रही थी।

समाज-अपशिक्षा से उपजा अपराध तंत्र

यूरोप में शिक्षा का औपचारिक तरीका चर्च में अपनाया गया। वहां बच्चों, किशोरों, युवाओं की धार्मिक शिक्षा-दीक्षा होने लगी।

संगीत-बौद्धिक संपदा में अनधिकार

हिंदी संगीत जगत की कोकिला मानी जाने वाली लता मंगेशकर के साथ भी है। उनकी आवाज को बेच कर कंपनियां करोड़ों-अरबों रुपए बना रही...

कुछ उत्तर-सत्य कथाएं

जो कहूंगा सच कहूंगा, सच के अलावा कुछ न कहूंगा। जो कहूंगा चैनल देखी-सुनी कहूंगा।

समकाल में महाभारत

से तो इस महाकाव्य की कहानियां और उनमें बसे चरित्र हमारे जीवन का हिस्सा हैं, पर महाभारत के कई और आयाम भी हैं, जिनको...

वक्त की नब्ज- गोरक्षा के नाम पर

राज्यसभा में मुख्तार अब्बास नकवी ने पहले तो कहा कि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं है जैसा कि मीडिया में प्रचार किया जा...

दूसरी नजर: क्या हमारी प्राथमिकताएं सही हैं

मैं तो यह भी कहूंगा कि केंद्र सरकार और सबसे बड़े राज्य की प्राथमिकताएं भिन्न नहीं हो सकतीं, खासकर तब, जब दोनों जगह एक...

पहल की जरूरत

टीवी शो में बच्चे जल्दी बड़े होने के फिराक में और बॉलीवुड में ‘पचास साल’ के युवा बीस साल के ‘तरुण’ बनने की जुगत...

अभाव का परिदृश्य

आज बौद्धिकता की आड़ में ऐसी फिल्में खो रही हैं। बौद्धिक फिल्में बच्चों को तेजी से बड़ा कर रही हैं। यह हमारी चिंता का...

परदे पर बच्चे

‘तारे जमीं पर’ की रिकॉर्ड सफलता के बाद बाल-केंद्रित फिल्मों का चलन बढ़ा है।

बाखबर- शकुन पर शकुन

यूपी में अच्छे दिन आते दिख रहे हैं। इसे चपलाशयोक्ति कहें या अंतत्यातिशयोक्ति कहें कि यूपी में सतयुग सचमुच आ गया है।

तीरंदाज- उदारवाद बनाम कट्टरपंथ

1979 में तेहरान के पहलवी राजवंश को इस्लामिक क्रांति ने सत्ता विहीन कर दिया और यकायक तरक्की पसंद ईरान कट्टरवादी इस्लाम के साथ हो...

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