May 23, 2017

ताज़ा खबर

 

रविवारीय स्तम्भ

बाखबर: सच्ची खुशी कभी कभी

हेग अदालत के फैसले पर इस कदर वीरता बरसी कि किसी को जरा-सा भी किंतु परंतु गवारा नहीं था, जबकि कई पैनलिस्ट जानते थे...

तीरंदाज- चक्कर घनचक्कर

एक दिन पंडित जी एक सेंटेंस बोले और फिर कहा सेमी कोलन। हमसे न रहा गया और हमारे मुंह से निकल गया, नहीं चचा...

वक्त की नब्ज- अभी बहुत कुछ करना बाकी है

शहरीकरण और अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा जरूरत है परिवर्तन की, क्योंकि इन क्षेत्रों में परिवर्तन आएगा तो पूरे देश का माहौल बदल जाएगा। इन...

दूसरी नजर- वे आशंकाएं-3

सत्ता के सामने सच्चाई बयान करना एक दुर्लभ गुण है। देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन में यह गुण है।

साहित्य और सिनेमा: आज तक साहित्य पढ़ कर कोई डाकू या बलात्कारी नहीं हुआ, जबकि सिनेमा से यह भी हो सका है

साहित्य और सिनेमा का संबंध उतना ही पुराना है, जितना सिनेमा का इतिहास। दोनों भिन्न और अपनी-अपनी तरह के बेजोड़ कला-माध्यम हैं।

चर्चा: साहित्य का अनुवाद नहीं है सिनेमा

साहित्य को उसके मूल रूप में उतार पाना सिनेमा के बूते की बात नहीं, पर कहानी के स्तर पर वह साहित्य की तरफ जरूर...

कंपटीशन का बाजार गरम है

अंग्रेजी चैनल सीएनएन न्यूज अठारह में ‘हिंदू युवा वाहिनी’ की एक दिन की एक हिंसक कथा कही जा रही थी, लेकिन स्क्रीन पर बड़े-बड़े...

भाषा का लोकतंत्र

लोकतंत्र वाणी की स्वतंत्रता देता है, लेकिन वाणी के प्रदूषण या हवस की नहीं। लोकतंत्र व्यवस्था की स्वायत्तता देता है, लेकिन सत्ता की निरंकुशता...

दूसरी नजर: वे आशंकाएं-2

भारत एक रक्तरंजित क्षेत्र हो गया है, न केवल उग्रवादियों और माओवादियों के कारण, बल्कि पसंदगियों और नापसंदगियों की वजह से भी हत्या होती...

दिल्ली का दमामा बाज रहा

मार्क्सवादी और गैरमार्क्सवादी दोनों तरह के लेखकों के लिए दिल्ली एकमात्र तीर्थस्थली के रूप में तब्दील हो गई।

उजड़ने का संताप

महावीर प्रसाद द्विवेदी के बाद रूपनारायण पांडे, शिवपूजन सहाय, नवजादिक लाल श्रीवास्तव, देवीदत्त शुक्ल, बनारसीदास चतुर्वेदी, माखनलाल चतुर्वेदी और मातादीन शुक्ल आदि पहले दौर...

बारादरी- कुछ अच्छे लोग भी हैं ‘आप’ में

दिल्ली निगम चुनावों में भाजपा की भारी जीत के बाद गायक और नायक की प्राथमिक पहचान रखने वाले मनोज तिवारी राजनीति के मैदान में...

बाखबर कॉलम: स्टूडियो की देशभक्ति

देश का प्राइम टाइम युद्धोत्सुक वीरों के हवाले था। एंकरों को ‘देशभक्तों’ के बरक्स ‘देश-अभक्तों’ को पेश करना था, क्योंकि ऐसे ‘अभक्तों’ की धुलाई...

तीरंदाज: माफिया के शिकंजे में कश्मीरी अवाम

वास्तव में कश्मीर में लड़ाई न इस्लामियत की है और न ही आजादी की।

वक्त की नब्ज: हिंसा से सिर्फ हिंसा पैदा होगी

एक बार फिर हिंदुत्व के वीर जवानों ने एक बुजुर्ग मुसलमान की हत्या कर डाली पिछले सप्ताह।

दूसरी नजर: वे आशंकाएं

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीर बहुत निराशाजनक है और साफ दिख रहा है कि स्थिति दिनोंदिन और बिगड़ रही है।

डॉ हर्षवर्धन का इंटरव्यू: वही टिकेगा जो शुचिता में विश्वास करेगा, आप का पतन शुरू

भाजपा को खुद छुआछूत की वजह से काफी कुछ झेलना पड़ा है। और ऐसा भी नहीं कि हमने कांग्रेसियों के लिए फाटक खोल दिया...

बाखबर: चैनल तुम्हें चैन से मरने नहीं देगा

इधर मोदीजी ने दिल्ली जीती, उधर सेंसेक्स ने रिकार्ड तोड़ा। चंचल चैनल चकित चित्त चर्चाए।

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