March 27, 2017

ताज़ा खबर

 

रविवारीय स्तम्भ

पहल की जरूरत

टीवी शो में बच्चे जल्दी बड़े होने के फिराक में और बॉलीवुड में ‘पचास साल’ के युवा बीस साल के ‘तरुण’ बनने की जुगत...

अभाव का परिदृश्य

आज बौद्धिकता की आड़ में ऐसी फिल्में खो रही हैं। बौद्धिक फिल्में बच्चों को तेजी से बड़ा कर रही हैं। यह हमारी चिंता का...

परदे पर बच्चे

‘तारे जमीं पर’ की रिकॉर्ड सफलता के बाद बाल-केंद्रित फिल्मों का चलन बढ़ा है।

बाखबर- शकुन पर शकुन

यूपी में अच्छे दिन आते दिख रहे हैं। इसे चपलाशयोक्ति कहें या अंतत्यातिशयोक्ति कहें कि यूपी में सतयुग सचमुच आ गया है।

तीरंदाज- उदारवाद बनाम कट्टरपंथ

1979 में तेहरान के पहलवी राजवंश को इस्लामिक क्रांति ने सत्ता विहीन कर दिया और यकायक तरक्की पसंद ईरान कट्टरवादी इस्लाम के साथ हो...

वक्त की नब्ज- नाहक पहरेदारी

इस्लाम इतने बुरे दिनों से गुजर रहा है जिहादी आतंकवाद के कारण कि मुसलमानों के लिए किसी गैर-इस्लामी देश का वीजा लेना भी तकरीबन...

दूसरी नज़र: जहां बच्चे उपेक्षित हैं

मानव संसाधन विकास की हमारी परिकल्पना में बच्चों का विकास, बच्चों का स्वास्थ्य और बच्चों का पोषण शामिल नहीं है।

सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत है

हर बार एक नई लाइन, एक नया नारा, एक नया संकल्प। एकदम ‘हाइपर टू हाइपर’, ‘इवेंट टू इवेंट’, ‘दृश्य दर दृश्य’ बनाते हुए वे...

विपक्ष में साहित्य

जहां सत्ता और उसकी राजनीति का विजन तात्कालिक और छोटा होता है, वहीं साहित्य का विजन व्यापक और दूरगामी होता है।

बारादरी- वैश्विक ज्ञान का परिसर बनें विश्वविद्यालय

सत्ता परिवर्तन की हवा का सबसे ज्यादा असर विश्वविद्यालय परिसरों पर होता है। विश्वविद्यालयों में ज्ञान-अनुसंधान, नियुक्तियां, छात्र संगठन हो या गोष्ठी, इन सबका...

वक्त की नब्ज: प्रधानमंत्री की नई चुनौती

क्या अब उत्तर प्रदेश को गुजरात बना सकेंगे प्रधानमंत्री? जिम्मेदारी उनकी होगी, राज्य सरकार की नहीं, क्योंकि उत्तर प्रदेश के मतदाताओं ने वोट उनको...

दूसरी नज़र: यहां जीत वहां सेंध

त्रिशुंक विधानसभा की सूरत में सरकार के गठन को लेकर एक अलिखित नियम रहा है, जो बिल्कुल साफ है। जिस पार्टी को सबसे ज्यादा...

बाखबर: गाइए मोदी जग वंदन

पत्रकार आरती जैरथ एनडीटीवी पर कहती हैं कि नोटबंदी पर हमारी समझ गलत निकली। शेखर गुप्ता कहते हैं कि हम लोग गलत रहे, मोदी...

रचनाकार का विपक्ष

साहित्यकार का विपक्ष क्या है? क्या सत्ता है? क्या कोई विचारधारा है? क्या कोई राजनीति है? क्या किसी भी प्रकार की निरंकुशता या तानाशाही...

वक्त की नब्ज़- कारवां गुजर गया

अब परिणाम हमारे सामने हैं, जो साबित करते हैं कि देश बदल गया है, देश के मतदाता बदल गए हैं, लेकिन हम राजनीतिक पंडित...

दूसरी नज़र: जनादेश के बाद की उम्मीद

इस स्तंभ को एक दिन देर से भेजने की इजाजत मैंने संपादकों से ले ली थी, ताकि पांच राज्यों के चुनाव नतीजों का जायजा...

हिंसा विमर्श को बाधित करती है

राकेश सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रवाद में उन सबकी जगह है, जो उस देश में पैदा हुए और उस देश के विचार को मानते...

किताबें मिलीं : प्रिय भग्गन

सबसे बड़ी बात यह है कि इन पत्रों ने साहित्यानुरागी अपने अनुज में न केवल साहित्य के प्रति उत्सुकता और ललक जगाई, बल्कि भविष्य...

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