ताज़ा खबर
 

Movie Review ‘सिंह इज ब्लिंग’: कॉमेडी, एक्शन और मां

Singh Is Bliing review: इसमें कॉमेडी है और साथ ही एक्शन भी। और दो-दो मां भी है। एक हीरो की और दूसरी हीरोइन की। लेकिन इतना सब होने के बाद सवाल उठता है कि फिल्म में क्या है? तो इसका जवाब है कि हंसी-मजाक के अलावा ‘क्या है’ का जवाब देना कठिन है।
सिंह इज ब्लिंग- इसमें कॉमेडी है और साथ ही एक्शन भी

सिंह इज ब्लिंग

निर्देशक- प्रभुदेवा

कलाकार- अक्षय कुमार, एमी जैक्शन, लारा दत्ता

 

इसमें कॉमेडी है और साथ ही एक्शन भी। और दो-दो मां भी है। एक हीरो की और दूसरी हीरोइन की। लेकिन इतना सब होने के बाद सवाल उठता है कि फिल्म में क्या है? तो इसका जवाब है कि हंसी-मजाक के अलावा ‘क्या है’ का जवाब देना कठिन है।

एक्शन के ज्यादातर सीन भी फिल्म की हीरोइन एमी जैक्शन के हैं, अक्षय कुमार के एक्शन सीन तो आखिर में आते हैं, बस दो-तीन मिनटों के लिए। प्रभुदेवा की इस फिल्म में हीरो-हीरोइन का डांस भी है। लेकिन उसमें दम नहीं है और न उस पर प्रभुदेवा की छाप है। हां, फिल्म का सकारात्मक पक्ष यह जरूर है कि इसमें विदेश के कई खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य हैं। नर्गिस और दूसरे फूलों के नयनाभिराम बाग हैं। फिल्म पंजाब, गोवा और रोमानिया की सैर कराती है।

अक्षय कुमार ने इसमें रफ्तार सिंह नाम के ऐसे युवा सरदार का किरदार निभाया है, जो पंजाब के एक गांव में रहता है और सारा दिन मौज-मस्ती करता रहता है। परेशान पिता (योगराज सिंह) उसे अपने दोस्त के पास गोवा भेज देता है ताकि वहां कोई ढंग की नौकरी करे।

जिस शख्स के यहां उसे नौकरी मिलती है वह उसे सारा (एमी जैक्शन) नाम की लड़की की देखभाल का काम सौंपता है जो रोमानिया से आई है। सारा के पीछे रोमानिया में ही रहनेवाला एक बदमाश मार्क (केके मेनन) पड़ा हुआ है और वह उससे जबर्दस्ती शादी करना चाहता है। इसके बाद पूरी फिल्म इस बात पर टिकी है कि सारा रफ्तार की होगी या मार्क की। कोई पूछ सकता है कि लारा दत्ता क्या कर रही हैं इस फिल्म में। उनका काम दुभाषिए का है। चूंकि सारा को हिंदी नहीं आती और रफ्तार को अंग्रेजी नहीं आती तो एमिली (यानी लारा दत्ता) दोनों को बताती रहती हैं कि दोनों ने एक-दूसरे को क्या कहा। कहने का तात्पर्य कि लारा दत्त अब चरित्र भूमिका में आ गई हैं।

फिल्म अक्षय कुमार के मजाकिया लहजे पर टिकी है और उसी कारण दर्शकों को हंसने के लिए भरपूर मौका है। चिड़ियाखाना में शेर के खुला छूटने वाला दृश्य लोटपोट करनेवाला है। लेकिन फिल्म का जज्बाती पहलू कमजोर है। सारा रोमानिया से गोवा आती है अपनी मां को खोजने के लिए और वे मिल भी जाती हैं।

लेकिन यह सब इतने संक्षेप में दिखाया गया है कि उसका भावनात्मक असर नहीं पड़ता। रति अग्निहोत्री अक्षय कुमार की मां बनी हैं। यह फिल्म अक्षय कुमार की पहले वाली फिल्म ‘सिंह इज किंग’ से नहीं जुड़ती है। बस दो मायने में दोनों में समानता है-दोनों में ही अक्षय कुमार ने एक सिख युवक का किरदार निभाया है और दोनों में ही शादी के आखिरी दृश्य में बाजी पलट जाती है। एमी जैक्शन एक शब्द भी हिंदी में नहीं बोली हैं। अगर यही हाल रहा तो वे कब तक हिंदी फिल्मों में टिकेंगी?

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. N
    Naveen Bhargava
    Oct 3, 2015 at 1:14 pm
    (0)(0)
    Reply
    सबरंग