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सात उचक्के रिव्यू: दमदार स्टार कास्ट और कमजोर स्क्रिप्ट से बनी है फिल्म

Saat Uchakkey Movie Review: संजीव शर्मा निर्देशित फिल्म 'सात उचक्के' की कहानी एक पागलखाने से शुरू होती है, और पुरानी दिल्ली की दीवान साहेब (अनुपम खेर) की हवेली में जाकर खत्म होती है।
फिल्म 7 उचक्के के पोस्टर में सभी अभिनेता।

संजीव शर्मा निर्देशित फिल्म ‘सात उचक्के’ की कहानी एक पागलखाने से शुरू होती है, और पुरानी दिल्ली की दीवान साहेब (अनुपम खेर) की हवेली में जाकर खत्म होती है। जितना आपको ट्रेलर में दिखाई दिया था, फिल्म में उससे कहीं कुछ ज्यादा है। सबसे जरूरी बात यह कि सेंसर के विरोध के बावजूद फिल्म गाली-गलौज से भरी पड़ी है। ये गालियां भी वे गालियां हैं जो कि सेंसर के 90 कट और बदलाव के बाद भी बज निकलीं। फिल्म को रिलीज के लिए 3 साल तक इंतिजार करना पड़ा। इसलिए यदि आप बच्चों के साथ फिल्म देखने जाने का प्लान बना रहे हैं तो एक बार फिर गंभीरता से सोच लें।

फिल्म की कहानी पुरानी दिल्ली की कुछ जिंदगियों के बारे में, हालांकि यह दिल्ली वह कबूतरों और उड़ती पतंगों पुरानी इमारतों वाली दिल्ली नहीं है। संजीव की फिल्म की दिल्ली पुराने भूतों और नए ख्वाबों वाली दिल्ली है। यह कुछ ऐसे लोगों के बारे में है जिनके अजीबोगरीब आइडल हैं और अपनी जीविका चलाने के लिए जो ऊटपटांग काम करते हैं। इन कामों में 90 साल पुराने तालों की चाभी बनाने से लेकर, विदेशियों के लिए सेक्स टॉय बनाने तक, और अजीब केस लड़ने वाले वकीलों से लेकर चाकू को वेल्डिंग करने वाले लड़के तक फिल्म में हर किरदार अपने आप में अनूठा है।

लेकिन इन पतली गलियों, कचौड़ियों, ताश के पत्तों और रोजी रोटी की भूल भुलैया से निकलने का भी तरीका है। जिसमें से पहला तरीका पप्पी यानि मनोज बाजपेई के हाथ लगता है। फिल्म में पप्पी जाट (मनोज बाजपेयी ) अपने दोस्तों हग्गू, खप्पे, अज्जी ,बब्बे, और जग्गी तिरछा (विजय राज ) के साथ एक खजाने को लूटने का प्लान बनाता है। इस टास्क में उसकी मदद करती है उसकी गर्लफ्रेंड सोना (अदिति शर्मा)। लेकिन इनके लिए बीच में रोड़ा बनता है पुलिसमैन तेजपाल राठी (के के मेनन)। फिल्म में बिच्ची (अन्नू कपूर) का भी अहम रोल है। अब क्या पप्पी जाट अपने गिरोह के साथ खजाना लूट पाने में सफल हो पाता है, इसका पता आपको फिल्म देखकर ही चलेगा।

संजीव शर्मा की ‘सात उचक्के’ का सबसे बड़ा आकर्षण दिग्गज अभिनेता मनोज बाजपेयी, के.के. मेनन और विजय राज का एक साथ एक फिल्म में होना है। यह तीनों अभिनेता थिएटर की से बॉलवुड के अखाड़े में आए हैं और तीनों की एक्टिंग बेहद दमदार है। तीनों का एक्टिंग स्टाइल और काम करने का तरीका हालांकि थोड़ा अलग जरूर है। लेकिन जब फिल्म के कुछ सीन में तीनों साथ आते हैं तो सीन में जान आ जाती है। तीनों ही अभिनेताओं ने जबरदस्त एक्टिंग की है। मनोज ने पहली बार इस तरह का कॉमेडी केरेक्टर निभाया है। वे अपने किरदार के साथ इन गलियों में बखूबी फिट हुए हैं। जहां तक मेनन और विजय राज की बात है तो वह भी उनका पूरा साथ देते हैं। फिल्म में अन्नू कपूर और अनुपम खेर भी विशेष भूमिकाओं में हैं। फिल्म में कुछ जोड़े बगैर वे अपने दृश्यों को निभा ले जाते हैं।

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हालांकि एक बात जो कि फिल्म में खलती है वह यह है कि निर्देशक संजीव जो कि पीपली लाइव और रघु रोमियो जैसी फिल्में कर चुके हैं वह फिल्म को कोई खास अंत नहीं दे पाए। फिल्म का क्लाइमेक्स उतना दमदार नहीं है।

अवधि- 139 मिनट
प्रमुख कलाकार- मनोज बाजपेयी, के के मेनन और विजय राज।
निर्देशक- संजीव शर्मा
संगीत निर्देशक- अभिषेक राय

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