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Saala Khadoos movie review: एक बॉक्सिंग गुरु का किस्सा 

`साला खड़ूस’ खेलकूद केंद्रित फिल्म है और बॉक्सिंग की दुनिया पर आधारित है। सब जानते हैं कि भारत में खेल एक अलग चीज है और खेल की राजनीति यानी खेल संघों की राजनीति अलग।
Author नई द‍िल्‍ली | January 29, 2016 15:59 pm
माधवन को दक्षिण भारतीय होने की वजह से हिंदी रफ्तार में बोलने में परेशानी होती है। फिर भी उनका अभिनय लाजवाब है।

जिन लोगों ने आर माधवन को `थ्री इडियट्स’, `तनु वेड्स मनु’ और `तनु वेड्स मनु रिटर्न्स‘ मे देखा है, उनके लिए `साला खड़ूस’ में उनकी भूमिका सुखद रूप से अप्रत्याशित है। इस फिल्म में उनका किरदार बिल्कुल नए तरह का है और ये बताता है कि उनमें बतौर अभिनेता कितनी विविधता है। `साला खड़ूस’ में वे बॉक्सिंग कोच बने हैं। दबंगई और अवसाद के बीच उनका व्यक्तित्व कई तरह की परछाई लिए हुए है।

`साला खड़ूस’ खेलकूद केंद्रित फिल्म है और बॉक्सिंग की दुनिया पर आधारित है। सब जानते हैं कि भारत में खेल एक अलग चीज है और खेल की राजनीति यानी खेल संघों की राजनीति अलग। खेल संघों की अंदरुनी राजनीति वास्तव‍िक राजनीति से भी ज्यादा पेंचीदा है। अखबारों और चैनलों में इसकी कहानियां रोज ही आती हैं। `साला खड़ूस’ बॉक्सिंग संसार के दोनों पक्षों का ध्यान रखता है। इस फिल्म का केंद्रीय चर‍ित्र आदि तोमर ( माधवन) एक दमदार बॉक्सर हैं और कोच भी। हालांकि, राजनीति की वजह से उसे कोचिंग के सही अवसर नहीं मिलते। उसकी छवि खड़ूस आदमी की बना दी जाती है। बतौर कोच उसका तबादला चेन्नई कर दिया जाता है। दूसरी भाषा में उन्‍हें ‘काला पानी’ भेज दिया जाता है। यहां उनकी मुलाकात मदी (रितिका सिंह) नाम की मछुआरन से होती है, जो मुहम्मद अली की फैन है। आदि उसमें संभावनाएं देखता है और उसकी कोचिंग शुरू करता है। लेकिन यहां भी कई अड़चने हैं और राजनीति का दलदल भी। सबसे पहले तो मदी की बहन लक्स (मुमताज सरकार) ही उसके और अपनी बहन के खिलाफ साज‍िश रचती है। और फिर कई तरह के रोड़े हैं, जिसके कारण मदी और आदि तोमर झंझट में फंसते रहते हैं। कहानी कई तरह की ऊंचनीच के साथ आगे बढ़ती है और दर्शक को आखिर तक उत्सुकता बनी रहती है कि आगे क्या होगा?

कुछ दृश्य जल्‍दबाजी में शूट किए गए मालूम होते हैं। माधवन की संवाद अदायगी में भी थोड़ी हड़बड़ी है। शायद दक्षिण भारतीय होने की वजह से हिंदी रफ्तार में बोलने में उनको परेशानी होती है। फिर भी उनका अभिनय लाजवाब है। उन्होने अपनी शरीर पर भी काफी मेहनत किया है। रितिका सिंह भी दमदार लगीं है और उनका शारीरिक सौष्ठव भी एक बॉक्सर का है। हालांकि, इसकी वजह यह भी है क‍ि वे एक प्रोफेशनल बॉक्‍सर हैं। अगर यही किरदार बॉलीवुड की किसी चर्चित अभिनेत्री को मिलता तो उसे ज्यादा वक्त और मेहनत की दरकार होती। रितिका इन सबसे बच गई होंगी। उनके अभिनय में एक कच्चापन भी है और यह इस फिल्म का सकारात्मक पक्ष भी है। मदी की बहन की किरदार निभानेवाली मुमताज सरकार जागूगर पीसी सरकार की पुत्री हैं और उनका काम भी प्रभावित करता है।

फिल्म की निर्देशक सुधा कोंगरा प्रसाद को इस फिल्म को बनाने में राजकुमार हिरानी की काफी मदद मिली है। हिरानी इसे प्रमोट भी काफी कर रहे हैं। कह सकते हैं `साला खड़ूस’ हिरानी घराने की फिल्म है। ये फिल्म तमिल में भी बनी है।

डायरेक्‍टर-सुधा कोंगरा प्रसाद
कलाकार- आर माधवन, रितिका सिंह, मुमताज सरकार, जाकिर हुसैन, नासेर

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