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Mastizaade movie review: फिल्‍म में सनी लियोनी के खूबसूरत शरीर के अलावा और कुछ भी नहीं

दो घंटे लंबी इस मूर्खतापूर्ण फिल्‍म को देखकर यही कहा जा सकता है क‍ि इस कथ‍ित कॉमेडी फ‍िल्‍म में शायद ही आपको हंसने का मौका म‍िले।
Mastizaade movie review: अर्नगल संवादों और दृश्‍यों के बजाए बीप से भरी पूरी फिल्‍म ही शायद ज्‍यादा बेहतर होती। लेक‍िन हां, फिल्‍म हमारे सामने सनी लियोनी को भी पेश करती है। सनी, जिनका खूबसूरत शरीर और अपनी काया को लेकर उनका गजब का आत्‍मव‍िश्‍वास ही इस फिल्‍म के अस्‍त‍ित्‍व पर सवाल खड़े होने नहीं देता। हालांक‍ि, जैसे ही वे कुछ बोलती हैं, वे बोर‍िंग हो जाती हैं। उनका अंगप्रदर्शन भी फिल्‍म को बचा नहीं पाता।

Mastizaade के प्रोड्यूसर इसे दूसरी सेक्‍स कॉमडी फिल्‍मों से अलग बताने के लिए फ‍िल्‍म को देश की पहली पॉर्न कॉमेडी करार दे रहे हैं। हालांक‍ि, सचाई यही है क‍ि खूबसूरत शरीर की मालक‍िन सनी लियोनी ही इस फिल्‍म की सबसे बड़ी प्रॉपर्टी हैं। दो घंटे लंबी इस मूर्खतापूर्ण फिल्‍म को देखकर यही कहा जा सकता है क‍ि इस कथ‍ित कॉमेडी फ‍िल्‍म में शायद ही आपको हंसने का मौका म‍िले। फ‍िल्‍म में बताई गई कथ‍ित ”मस्‍ती” इतनी सस्‍ती है क‍ि ये सिर्फ न‍िराश करती है।

सनी ने फिल्‍म में डबल रोल न‍िभाया है। एक का नाम लैला है जबक‍ि दूसरी का लिली। और हां, दोनों का सरनेम लेले है। इसी सरनेम के सहारे फिल्‍म में हास्‍य पैदा करने की कोश‍िश की जाती है। तुषार कपूर के क‍िरदार का नाम सनी केले है। यहां पटकथा लेखक को केले को लेकर अश्‍लील लाइंस और दृश्‍य ल‍िखने की आजादी म‍िलती है। फिल्‍म के कलाकार ”लेना और देना”, ”लूंगी और दूंगी”, ”खड़ा है और बैठा है” जैसे शब्‍द बहुतायत में इस्‍तेमाल करते हैं। इसके अलावा, शरीर के खास अंग पर रखे स‍िक्‍के का उछलना और एक न बताई जा सकने वाली जगह पर उसका जाकर चिपकना, यह भी फ‍िल्‍म का ही ह‍िस्‍सा है। वीरदास ने फिल्‍म में आद‍ित्‍य चोट‍िया का क‍िरदार न‍िभाया है। हां ब‍िलकुल, आप उनके नाम का सही मतलब भी समझ ही गए होंगे।

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कहानी यही है क‍ि केले और चोट‍िया सेक्‍स एडिक्‍ट्स हैं। और उनको ठीक करने का ज‍िम्‍मा लैला और लिली का है। लैला और लिली में आप सिर्फ इस बात से फर्क कर सकते हैं क‍ि एक ने चश्‍मा पहन रखा है। इनके अलावा, व्‍हीलचेयर पर बैठे एक शख्‍स का क‍िरदार शाद रंधावा ने निभाया है, ज‍िनके शरीर के आधे से ऊपर का ह‍िस्‍सा पूरी तरह काम करता है। बाकी सफेद बालों वाले असरानी व क्‍या कूल हैं हम 3 में काम कर चुकीं सुष्‍म‍िता भी फिल्‍म में हैं। सुरेश मेनन ने एक ऐसे समलैंग‍िक का क‍िरदार न‍िभाया है जो अपने होठों को काटने और दूसरी भाव भंग‍िमाओं से हंसने की आख‍िरी उम्‍मीद को भी खत्‍म कर देता है।

फ‍िल्‍म में तमाम कैरेक्‍टर आते और आते रहते हैं। रीतेश देशमुख का भी छोटा सा रोल है। वे पुरुषों की यौन संतुष्‍ट‍ि के बारे में बातें करते नजर आते हैं। बाकी वक्‍त उनकी बातचीत को सिर्फ बीप-बीप में बताया जाता है। हालांक‍ि, ये अच्‍छा ही है। अर्नगल संवादों और दृश्‍यों के बजाए बीप से भरी पूरी फिल्‍म ही शायद ज्‍यादा बेहतर होती। लेक‍िन हां, फिल्‍म हमारे सामने सनी लियोनी को भी पेश करती है। सनी, जिनका खूबसूरत शरीर और अपनी काया को लेकर उनका गजब का आत्‍मव‍िश्‍वास ही इस फिल्‍म के अस्‍त‍ित्‍व पर सवाल खड़े होने नहीं देता। हालांक‍ि, जैसे ही वे कुछ बोलती हैं, वे बोर‍िंग हो जाती हैं। उनका अंगप्रदर्शन भी फिल्‍म को बचा नहीं पाता।

मस्‍तीजादे: सनी ल‍ियोनी, तुषार कपूर, वीर दास, सुरेश मेनन, असरानी, व‍िवेक वासवानी, सुष्‍म‍िता मुखर्जी
डायरेक्‍टर: म‍िलाप जावेरी

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