December 08, 2016

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लव डे मूवी रिव्यू: कॉमेडी से शुरू हुई ये फिल्म धीरे धीरे हॉरर फिल्म की फीलिंग देती है,कुल मिलाकर इसमें कुछ नहीं है

एजाज खान को छोड़ दें तो बाकी के किरदारों को कोई व्यक्तित्व नहीं उभरता है। वैसे निर्देशक का आरंभिक मंसूबा शायद ये था कि तीन दोस्तों की कहानी दिखाई जाए लेकिन थोड़ी देर के बाद वो लाइन से भटक गए।

कलाकार-एजाज खान, साहिल आनंद, हर्ष नागर, शालू सिंह, अनंत महादेवन
 निर्देशक-  हरीश कोटियान/संदीप चौधरी
यह हास्य फिल्म के रूप में शुरू होती है और अंत की ओर बढ़ते हुए हॉरर फिल्म का आभास देने लगती है और फिर एक ऐसा मुरब्बा बन जाती है जिसका कोई स्वाद नहीं है। तीन बचपन के दोस्त हैं- मोंटी (एजाज खान), सैंडी (साहिल आनंद) और हैरी (हर्ष नागर)। साहेबा (शालू सिंह) नाम की एक लड़की है जो कब किसकी प्रेमिका बन जाती है, ये कहना कठिन है। मोंटी बचपन से शरारती है और उसकी वजह से सैंडी और हैरी बार-बार कई मुश्किलों में फंसते हैं लेकिन बिना देरी किए उसकी बातों में फिर आ भी जाते हैं। स्थितियां ऐसी बनती हैं कि पहले सैंडी और हैरी मुंबई पहुंच जाते हैं और फिर मोंटी भी। वहीं वे बड़े होते हैं और पैसे कमाने के लिए कई तरह के धंधे करते हैं। फिर मोंटी ऐसी योजना बनाता है कि वे सब मिलकर बत्तीस करोड़ कमाने वाले हैं। यहीं से फिल्म दूसरी दिशा में मुड़ती है और मुड़कर उस तरफ चली जाती है जहां से वापसी का रास्ता नहीं मिलता। दर्शक को ये तय करना मुश्किल हो जाता है कि वह तीन बेवकूफों को देख रहा है या चालू किस्म के लोगों को।
एजाज खान को छोड़ दें तो बाकी के किरदारों को कोई व्यक्तित्व नहीं उभरता है। वैसे निर्देशक का आरंभिक मंसूबा शायद ये था कि तीन दोस्तों की कहानी दिखाई जाए लेकिन थोड़ी देर के बाद लगता है कि ये एक मवाली किस्म के शख्स और दो बेवड़ों की ऐसी कथा है जिसका सिर पैर नहीं है।
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First Published on October 24, 2016 2:40 pm

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