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Daddy Movie Review LIVE: गैंगस्टर अरुण गवली की सच्ची कहानी से रूबरू कराती है अर्जुन रामपाल की फिल्म

Daddy Movie Review: गैंगस्टर से राजनेता बने अरुण गवली की जिंदगी के साथ ही अंडरवर्ल्ड के काले चेहरे को दिखाने की कोशिश करती है अर्जुन रामपाल की फिल्म।
अरुण गवली की जिंदगी को डैडी के जरिए सामने ला रहे हैं अर्जुन रामपाल।

Daddy Movie Review: अर्जुन रामपाल की डैडी मुंबई के दगड़ी चॉल की कहानी को दिखाता है। जो 70 के दशक में मिल में काम करने वाले लोगों का घर हुआ करता था। अरुण गुलाब गवली वहीं का रहने वाला एक स्थानीय नागरिक था जो अंडरवर्ल्ड की चपेट में आया और एक बहुत बड़ा डॉन बन गया। उसके डॉन बनने की वजह थी टेक्साटाइल मिल पर लगा ताला। जिसकी वजह से हजारों लोग बेरोजगार हो गए थे। कुछ समय बाद अपनी छवि को बदलने के लिए गवली एक राजनेता बन गया और गांधी टोपी लगाने लगा। गवली दाऊद इब्राहिम का मुख्य विरोधी था। जो मुंबई पर दाऊद की नहीं बल्कि अपनी हुकूमत चलाना चाहता था।

मुंबई में रहने वाले लोग गवली के उदय से भलीभांति परिचित हैं उन्हें पता है कि कैसे एक मिल वर्कर का बेटा चोरी, मर्डर और जबरन वसूली करने जैसे कामों में लिप्त हो गया था। इसके बाद वो अंडरवर्ल्ड का जाना-माना चेहरा बन गया था। जिन लोगों को नहीं पता उन्हें बता दें कि फिल्म की कहानी बीआरए गैंग यानी कि बाबू आनंद, रमा राजेश और अरुण गवली की है। जिन्होंने 70 से 80 के दशक में सेंट्रल मुंबई में आतंक मचाया हुआ था। गवली के इस तरह हुए उदय से उसका प्रतिद्वंदी दाऊद उसके खिलाफ हो गया था। फिल्म में दाऊद के किरदार में फरहान अख्तर नजर आएंगे।

गवली के बारे में ज्यादातर बातें सभी को पता हैं इसलिए फिल्म में आपको कुछ भी नयापन नहीं मिलेगा। कई मौकों पर आपको लगेगा कि आप केवल एक प्वाइंट से दूसरे प्लाइंट पर जा रहे हैं। आशिम अहलूवालिया के निर्देशन में बनी फिल्म में सामान्य कहानी दिखाई है जिसमें वो दर्शकों को कम ड्रामे के साथ अंडरवर्ल्ड के स्याह और अप्रिय दुनिया में ले जाते हैं। फिल्म देखते समय आपको लगेगा कि गैंग किसी भूत की तरह अपने ऑपरेशन को अंजाम दे रहा है। हिंदी फिल्मों की तरह इसमें एक लालची और अतिमहत्वकांक्षी पुलिस अधिकारी विजयकर नितिन (निशिकांत) उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रहा है। जैसा कि आप क्राइम पेट्रोल के एपिसोड में भी देखते हैं।

फिल्म की कहानी के पहले हाफ में गवली के बनने और अंडरवर्ल्ड की दुनिया पर राज करने को दिखाया गया है। वहीं दूसरे हिस्से में उसे एक फैमिली फैन और राजनेता के तौर पर दिखाया गया है। हिंदू होने के बावजूद गवली ने एक मुस्लिम लड़की जुबैदा (ऐश्वर्या राजेश) के साथ शादी की थी। फिल्म में गवली के सेक्युलर पक्ष पर प्रकाश डाला गया है। हालांकि उसने अपनी पत्नी का धर्म परिवर्तन करनवा दिया और उसे आशा नाम दिया। इसके बावजूद मुंबई में हुए दंगों में उसने हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लिए पुण्यात्मा बनकर उभरा। अगर आपको क्राइम ड्रामा पसंद है तो यह फिल्म आप देख सकते हैं।

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