December 04, 2016

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31 अक्टूबर मूवी रिव्यू: कमजोर स्क्रीन प्ले में फंस गया मजबूत सब्जेक्ट, इंप्रेस नहीं कर पाईं सोहा अली खान

31 अक्टूबर रिव्यू: फिल्म में 31 अक्टूबर 1984 की सुबह से लेकर देर रात तक के घटनाक्रम को दिखाया गया है। इस दिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की गोली मारकर हत्या की गई थी।

31 अक्टूबर कास्ट: वीर दास, सोहा अली खान, दीपराज राणा, लक्खा लखविंदर सिंग, नागेश भोसले

31 अक्टूबर डायरेक्टर: शिवजी लोटन पाटिल

सोहा अली खान और वीर दास स्टारर इस फिल्म में 1984 की दौर में लगी इमरजेंसी के दौरान हुई घटनाओं को दिखाया गया है। फिल्म के डायरेक्शन की जिम्मेदारी मराठी फिल्म ‘धग’ के लिए नेशनल अवॉर्ड जीत चुके शिवजी लोटन पाटिल ने निभाई। यह फिल्म रिलीड होने से पहले कई फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाई जा चुकी है।

फिल्म में 31 अक्टूबर 1984 की सुबह से लेकर देर रात तक के घटनाक्रम को दिखाया गया है। इस दिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की गोली मारकर हत्या की गई थी। इस घटना के बाद दंगे भड़के थे। फिल्म में इस घटना को भी दिखाया गया है। इसी दौरान फिल्म में अहम भूमिका निभाने वाले तेजिंदर कौर (सोहा अली खान) और देविंदर सिंह (वीर दास) दंगे के बीच अपनी जान बचाने की कोशिश करते हैं। फिल्म में जिस तरह एक बड़े मुद्दे को उठाने की कोशिश की गई है। उस तरह फिल्म लोगों से कनेक्ट करने में उतनी सफल नहीं है। फिल्म के डायलॉग्स कमजोर हैं। फिल्म के स्क्रीनप्ले की बात करें तो यह उतना असरदार नहीं है।

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सिख के रोल में वीर दास पर्दे पर इंप्रेसिव नहीं लगे। वो ऑडियंस से एक कनेक्शन बना पाने में कामयाब नहीं हैं। फिल्म में दंगों को काफी सीमित तौर पर दिखाया है। इसे और बेहतर तरीके से दिखाया जा सकता था। लंबे टाइम बाद पर्दे पर लौटीं सोहा फिल्म के जरिए एक छाप नहीं छोड़ पाईं। हालांकि कुछ सीन्स में उन्हें देखकर अच्छा लगता है।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या पर बनी फिल्म ‘31 अक्तूबर’ के कई सीन काटने के बाद और चार महीने की देरी के बाद सेंसर बोर्ड ने इसे हरी झंडी दी थी। इस फिल्म को हैरी सचदेवा ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म के हीर झंडी मिलने के बाद उन्होंने बताया था कि इसमें नौ बड़े सीन काट दिए गए हैं। सेंसर बोर्ड का कहना था कि इनमें से कुछ सीन और डयलॉग एक कम्यूनिटी को उकसा सकते थे इसलिए उन्हें हटाना जरूरी था।

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First Published on October 21, 2016 10:39 am

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