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जब बनता है शनि और चंद्रमा का विष योग तो व्यक्ति के जीवन में आती हैं ये परेशानियां

जानकार बताते हैं कि जब किसी व्यक्ति की कुंडली में ये योग बनता है तो उसे शारीरिक तौर पर कष्ट उठाना पड़ सकता है।
अहमदनगर का शनि शिगनापुर मंदिर (photo source- PTI)

ज्योतिषी व्यक्ति की कुंडली को देखकर उसके गृहों के बारें में बताते हैं। ज्योतिषी कहते हैं कि गृहों से ही व्यक्ति का भाग्य तय होता है और इन्हें से पता चलता है कि आने वाले समय में जातक के साथ क्या होने वाला है। ज्योतिषियों के मुताबिक अगर किसी की कुंडली में शनि की महादशा चल रही है तो ये सबसे कष्टदायी होती है। अगर शनि के साथ चंद्रमा भी मिल जाते हैं तो ये अत्यंत कष्टकारी होता है। दूसरे गृहों के मुकाबले शनि को सबसे मारक माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की महादशा चल रही होती है तो उसे सावधान रहने की सलाह दी जाती है।

जानकार बताते हैं कि जब किसी व्यक्ति की कुंडली में ये योग बनता है तो उसे शारीरिक तौर परउसे कष्ट उठाना पड़ सकता है। ऐसे लोगों को जीवन में कंगाली और दरिद्रता का सामना करना पड़ सकता है। अगर किसी जातक की कुड़ली के लग्न में शनि-चंद्र के बैठ जाते हैं तो उसका प्रभाव और भी नकारात्मक होता है। घर में शांति की कमी आती है। एक- दूसरे के साथ झगड़े होने लगते हैं। इसके पीछे की मुख्य वजह होती है लग्न, लग्न  हमारे शरीर का प्रतिनिधित्व करता है अगर ये दशा शुरु होती है तो बहुत बुरा असर होता है।

विष योग को ज्योतिषी सबसे घातक मानते हैं। जिन लोगों का कुंडली में ये योग बनता है उसे सारी जिंदगी बिमारियों भ्रम, रोग, बिगड़े दाम्पत्य आदि मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। ज्योतिषियों का कहना है कि इस समय में कोई बुरा समाचार मिल सकता है। ऐसे समय में व्यक्ति को संयम बरतने की सलाह दी जाती है।

अगर किसी व्यक्ति के छठे भाव में शनि देव आते हैं तो एक्सिडेंट होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं अगर किसी व्यक्ति की कंडली के बारहवें भाव में शनि-चंद्र आ जाएं तो आय से बहुत अधिक बढ़ाकर खर्चा होता है। अगर शनि देवता की पूजा कि जाए तो शनि देवता की मार से बचा भी जाता है। कई ज्योतिषी लोगों को शनिवार को शनि देवता के मंदिर में जाकर पूजा करनी चाहिए। पूजा करने से कई मुसीबतों को हाल होता है।

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