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‘ऊँ’ जाप से क्या होता है फायदा और क्या है जाप करने का तरीका

ऊँ एक पवित्र ध्वनि ही नहीं बल्कि अनंत शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है।
सांकेतिक फोटो

कई मंत्रों का जाप करने से पहले ऊँ शब्द का प्रयोग किया जाता है। संस्कृत में ओम शब्द तीन अक्षरों के मेल से बना है ‘अ’, ‘उ’ और ‘म’। ऊँ को संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है। ऊँ का उच्चारण करने से आसापास सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है। ऊँ के बारे में कई जानकारों का कहना है कि ऊँ को प्रथम ध्वनि माना जाता है। ऊँ को ब्रह्मांड की आवाज भी कहा जाता है क्योंकि ब्रह्मांड के अस्तित्व में आने से पहले जो प्राकृतिक ध्वनि थी, वो थी ऊँ की गूंज।

क्यों किया जाता है ऊँ का जाप- इसके जाप से कई शारीरिक लाभ मिलते हैं। ऊँ एक पवित्र ध्वनि ही नहीं बल्कि अनंत शक्ति का प्रतीक भी है। कहा जाता है कि ऊँ का जाप करने से साधकों का अपने उद्देश्य की प्राप्ति होती है। इसके जाप से शरीर को कई लाभ मिलते हैं-
-इसका जाप करने से तनाव दूर हो जाता है।
-इसके लगातार जाप करने से पाचन शक्ति तेज होती है।
-अगर आप कोई काम करते हुए थक गए हैं तो ऊँ का जाप करे लें, इससे थकान दूर हो जाती है।
-ऊँ का जाप करने से घबराहट दूर होती है।
-लगातार जाप करने से शरीर निरंतर शांति से भर जाता है। ऊँ का जाप हमारे शरीर में कंपन उत्पन्न करता है।

ऊँ का जाप करने की विधि- जानकारों का कहना है कि ऊँ का जाप करने से पहले इसका अर्थ और इसका महत्व दिमाग में रखकर बैठ जाएं। ऊँ का जाप करने से पहले ईश्वर का ध्यान रखना जरूरी है।
-पहले आसन पर बैंठे। ऊँ का जाप करते समय रीढ़ की हड्डी, गर्दन और सिर को बिल्कुल सीधा रखें।
-जाप करते समय अपनी आंखों को बंद कर लें और गहरी सांस छोड़ते हुए ऊँ बोलना शुरू करें।
-आप इस जाप को दो या दो से ज्यादा बार दोहरा सकते हैं। ऊँ का उच्चारण 5,7,10,21 बार अपने समयानुसार करें।

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