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सावन शिवरात्रि 2017: जानिए, किस दिन होगा शिवलिंग पर जलाभिषेक और कब है शुभ मुहूर्त

Sawan Shivratri, Jal Abhishek 2017 Date: वैसे तो शिवरात्रि हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है लेकिन साल में दो बार आने वाली विशेष शिवरात्रि का हिंदू परंपरा में बड़ा ही महत्वपूर्ण स्थान है। फाल्गुन महीने में कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को आने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है।
शिवलिंग की पूजा करते श्रद्धालू। (Photo Source: PTI)

वैसे तो शिवरात्रि हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है लेकिन साल में दो बार आने वाली विशेष शिवरात्रि का हिंदू परंपरा में बड़ा ही महत्वपूर्ण स्थान है। फाल्गुन महीने में कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को आने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। इसके अलावा दूसरी बार सावन महीने में कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को भी भगवान शंकर की आराधना के साथ शिवरात्रि मनाई जाती है। भगवान शंकर देवताओं में सबसे सरल और सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता माने जाते हैं। भगवान शिव को सावन महीना बहुत प्रिय है। इसलिए सावन माह के प्रत्येक सोमवार को शिवभक्त भगवान शंकर को जल चढ़ाकर श्रद्धा अर्पित करते हैं।

इस साल सावन की शिवरात्रि शुक्रवार को पड़ रही है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 21 जुलाई को देश भर में सावन शिवरात्रि मनाई जाएगी। 21 जुलाई को रात्रि 9 बजकर 49 मिनट से चतुर्दशी तिथि आरंभ होगी और अगले दिन यानी कि 22 जुलाई को 6 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। इस दौरान सभी शिवभक्त भक्तिभाव से शिवपूजन में संलग्न होते हैं। कहा जाता है कि सावन माह के प्रारंभ होते ही सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु विश्राम के लिए अपने लोक चले जाते हैं और अपना सारा कार्यभार भगवान शिव को सौंप देते हैं। भगवान शिव माता पार्वती के संग पृथ्वी लोक पर रहकर समस्त धरतीवासियों के संरक्षण का काम करते हैं। भगवान शिव को लेकर सावन महीना इसलिए भी खास है।

शिवलिंग पर कौन सी चीज नहीं चढ़ाई जाती है?

इसके अलावा शिव के सावनप्रियता को लेकर एक और मान्यता यह है कि श्रावण मास में वर्षा के आसार सबसे अधिक होते हैं। शिव के तीनों नेत्र स्वयं सूर्य, चंद्र और अग्नि के स्वरूप हैं। इसके अलावा कंठ में विष होने के कारण शिव का शरीर काफी गर्म रहता है। सावन में वर्षा ऋतु होने की वजह से शिव के शरीर को काफी ठंडक मिलती है। इस वजह से भी शिव को सावन माह अत्यधिक प्रिय है।

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