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जानें, क्या है सावन की शिवरात्रि का महत्व, इस दिन शिवमंदिर जाकर पूजा करने से दूर होता है कालसर्प दोष

Sawan Shivaratri, Jal Abhishek 2017: चांदी के नाग-नागिन के जोड़े को शिवलिंग पर चढ़ाने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।
जलाभिषेक करने जाता एक शिवभक्त। (Photo Source: PTI)

भगवान शंकर को सावन महीना सबसे ज्यादा प्रिय है। यही कारण है कि फाल्गुन की शिवरात्रि के बाद शिवभक्तों को सावन की शिवरात्रि का बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है। सावन में हर सोमवार का शिवभक्ति की दृष्टि से काफी महत्व है। इस पूरे महीने शिव का जलाभिषेक करना बहुत पुण्यकारी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि सावन महीने की शिवरात्रि के दिन जो भी सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करते हैं उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा उनके सारे दुखों का निवारण होता है।

साल भर शिवभक्त सोमवार को व्रत रखते हैं लेकिन सावन की शिवरात्रि में व्रत करने वालों की संख्या बहुत बढ़ जाती है। शिवरात्रि के व्रत की मान्यता बहुत है। शिवरात्रि में शिवलिंग पर जलाभिषेक करना आवश्यक माना गया है। इससे भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। शंकर सभी देवी-देवताओं में सहसे अधिक सुलभ देवता माने जाते हैं। सावन महीना उनकी पूजा के लिए श्रेष्ठ महीना होता है। इस महीने रुद्राभिषेक करने से भक्तों के समस्त पापों का नाश हो जाता है।

शिवलिंग पर कौन सी चीज नहीं चढ़ाई जाती है?

कालसर्प दोष से मुक्ति की कामना रखने वाले लोगों को ब्रह्म मुहुर्त में शिव मंदिर जाना चाहिए। वहां षोडशोपचार से शिव अराधना के उपरांत शिव को धतूरा चढ़ाकर 108 बार ओम् नमः शिवाय का जाप करना चाहिए। साथ ही चांदी के नाग-नागिन के जोड़े को शिवलिंग पर चढ़ाने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। शारीरिक पीड़ा से पीड़ित लोग महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। इसके अलावा पंचमुखी रूद्राक्ष की माला लेकर भगवान शिव के मंत्र ओम् नमः शिवाय का जाप करें। ऐसा करने से तमाम तरह के क्लेश शांत हो जाते हैं।

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