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शनि के प्रथम भाव में आने से हो सकता है संतान का कष्ट, जाने आपका शनि किस भाव में है

अगर शनि आपकी कुंडली के प्रथम भाव में है तो इसे सोने का पाया कहा जाता है। इस अवधि को शनि व्यक्ति के स्वास्थ्य सुख में वृद्धि करता है। ऐसे लोगों को संतान से कष्ट हो सकता है।
इस तस्वीर का इस्तेमाल सांकेतिक तौर पर किया गया है।

शनि देवता को कष्टकारी गृह होने के साथ-साथ रहस्यमयी देवता भी कहा जाता है। सभी गृहों के मुकाबले शनि देवता को सबसे कष्टकारी गृह माना जाता है। अगर आपकी कुंडली में शनि की महादशा चल रही है तो तो इसे अत्यंत दुखदायक गृह माना जाता है। आज हम आपके लिए लाएं हैं आपकी कुंडली के भाव में शनि का दशा की जानकारी। जिसमें तय होता है कि कुंडली के आधार पर शनि आपके लिए कैसा रहेगा।

अगर शनि आपकी कुंडली के प्रथम भाव में है तो इसे सोने का पाया कहा जाता है। इस अवधि को शनि व्यक्ति के स्वास्थ्य सुख में वृद्धि करता है। ऐसे लोगों को संतान से कष्ट हो सकता है। इस व्यक्ति के रुके हुए कार्य पूरे होते हैं। अगर इस दौरान आप कोई व्यापार करते हैं तो आपको काफी लाभ मिलता है। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

जब शनि द्वितीय भाव में होते हैं तो इसे चांदी का पाया कहा जाता है। इस दौरान आप कुछ नए दोस्तों से मिलते हैं। व्यक्ति को अपने लगभग सभी कार्यों में सफलता मिलती है। व्यापार के लिए भी इसे अच्छा समय माना जाता है। ऐसे समय में व्यापार के लिए ठीक माना जाता है। वहीं जब शनि तीसरे भाव में आता है तो आपके शत्रुओं को हार का सामना करना पड़ता है। साथ ही इस समय वैवाहिक जीवन भी अच्छा नहीं माना जाता है। इस समय आपकी कमाई में बढ़ोतरी हो सकती है लेकन दुर्घटनाओं में वृद्धि हो सकती है।

शनि जब चौथे भाव में आता है तो इसे लोहे का पाया बताया जाता है। कहा जाता है हो सकता है कि इस समय में व्यक्ति अपनी आजिविका में बदलाव भी कर सकता है। हो सकता है इस दौरान आपको हानि भी हो। इस दौरान व्यक्ति को मानसिक तनाव बहुत होता है साथ ही पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जब शनि पांचवें भाव में आता है तो व्यापार के लिए इसे सही समय माना जाता है। इस अवधि को शुभ समय माना जाता है। दांम्पत्य जीवन के लिए यह सही समय नहीं माना जाता।

शनि के छठे भाव में आ जाने के बाद व्यक्ति के जीवन में शुभ समाचार मिलने की शुरुआत होती है। छठे भाव में आने के बाद व्यक्ति के मान-सम्मान में बढ़ोतरी होती है। मनुष्य के जीवन में धन लाभ का योग बनता है। इसे जमीन खरीदने का भी सही समय कहा जाता है। जब व्यक्ति के जीवन में शनि सातवें भाव में आ जाता है तो उसकी जीवन की सुख-सुविधाओं के बढ़ता है। जीवन साथी की सेहत चिंता का विषय हो सकती है।

अष्टम भाव में जब शनि आ जाता है तो इस समय व्यक्ति के जीवन में कष्टों में बढ़ोतरी होती है। परिवार से साथ भी मतभेद हो सकता है। इस समय व्यक्ति के जीवन में कोई भी नई खबर परेशानी बढ़ा सकती है। हो सकता है कि इस समय व्यक्ति को कर्ज लेना पड़े।

नवम भाग में व्यक्ति को शुभ समाचार मिलते हैं साथ ही कमाई में भी बढ़ोतरी मिल सकती है। जब व्यक्ति की कुंडली में दशम भाव पाया जाता है तो व्यक्ति की सफलता में बढ़ोतरी होती है। प्लानिंग करके किया गया काम सफल होता है। इस वक्त आलस्य का भाव गलत होता है। शनि के एकादश में आने के बाद बहुत ही शुभ फल मिलते हैं। धन में कोई कमी नहीं रहती। सम्मान में वृद्धि होती है। जब शनि द्वादश भाव में प्रवेश करता है तो सगे-संबन्धियों के साथ रिश्ते खराब हो सकते हैं।

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