ताज़ा खबर
 

Pitru Paksha 2017: गया में प्रेतशिला वेदी पर पुरखों का पिंडदान करेंगे तो जल्द मिलेगी उन्हें प्रेतात्मा योनि से मुक्ति

Pitru Paksha 2017, Shradh Date, Puja Vidhi: हर कोई अपने पितरों को प्रेतात्मा योनि से मुक्ति दिलाना चाहता है, क्या उपाय अपनाकर मुक्त करें पितरों को।
Author September 13, 2017 10:41 am
पितृ मुक्ति की पूजा करते लोग फाइल फोटो(आईएएनएस)

ऐसे तो आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष ‘पितृपक्ष’ के प्रारंभ होने के बाद अपने पुरखों की आत्मा की शांति और उनके उधार (मोक्ष) के लिए लाखों लोग मोक्षस्थली गया में पिंडदान के लिए आते हैं। परंतु पिंडदान के लिए विश्व में सर्वश्रेष्ठ इस गया में वे प्रेतशिला वेदी पर पिंडदान करना नहीं भूलते। मान्यता है कि प्रेतशिला में पिंडदान के बाद ही पितरों को प्रेतात्मा योनि से मुक्ति मिलती है। आत्मा और प्रेतात्मा में विश्वास रखने वाले लोग आष्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से पूरे पितृपक्ष की समाप्ति तक गया में आकर पिंडदान करते हैं। गया में पुराने समय में 365 वेदियां थी जहां लोग पिंडदान किया करते थे, परंतु वर्तमान समय में 45 वेदियां हैं जहां लोग पिंडदान कर तथा नौ स्थानों पर तर्पण कर अपने पुरखों का श्राद्ध करते हैं। इन्हीं 45 वेदियों में से एक वेदी प्रेतशिला वेदी है। गया शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर उत्तर पश्चिम में अवस्थित प्रेतशिला पर्वत एक पिंड वेदी है। हिंदू संस्कारों में पंचतीर्थ वेदी में प्रेतशिला की गणना की जाती है।

Pitru Paksha, Pitru Paksha 2017, Shradh 2017, Shradh, Shradh 2017 Start date, Pitru Paksha Date, Pitru Paksha 2017 Start date, Pitru Paksha start Date, Pitru Paksha Puja, Pitru Paksha Vidhi, Shradh Start date, Shradh date, Shradh Puja Vidhi, Shradh Vidhi in Hindi, Shradh Puja Vidhi in Hindi, Pitru Paksha Puja Vidhi in Hindi, Pitru Paksha Vidhi in Hindi, Pitru Paksha Puja Procedure, Shradh News in Hindi, Latest updates News, Religion News in Hindi, gaya, bihar, gayaji गया में पितरों का पिंड दान करने जाते लोग (फाइल फोटो)

गयावाल तीर्थव्रती सुधारिनी सभा के अध्यक्ष गजाधर लाल जी ने आईएएनएस को बताया, “प्रेतिशिला वेदी पर अकाल मृत्यु को प्राप्त जातक का श्राद्ध और पिंडदान का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस पर्वत पर पिंडदान करने से अकाल मृत्यु को प्राप्त पूर्वजों तक पिंड सीधे पहुंच जाते है, जिनसे उन्हें कष्टदायी योनियों से मुक्ति मिल जाती है। “इस पर्वत को प्रेतशिला के अलावा प्रेत पर्वत, प्रेतकला एवं प्रेतगिरि भी कहा जाता है पंचतीर्थ वेदी गया तीर्थ के उत्तर एवं दक्षिण में भी है। उत्तर के पंचतीर्थ में प्रेतशिला, ब्रह्मकुंड, रामशिला, रामकुंड और कागबलि की गणना की जाती है। प्रेतशिला 876 फीट ऊंचा पुराने परतदार पर्वत पर निर्मित है। किवंदतियों के मुताबिक, इस पर्वत पर श्रीराम, लक्ष्मण एवं सीता भी पहुंचकर अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्ध किया था। कहा जाता है कि पर्वत पर ब्रह्मा के अंगूठे से खींची गई दो रेखाएं आज भी देखी जाती हैं। गया शहर से लगभग चार किलोमीटर दूर प्रेतशिला तक पहुंचने के लिए 873 फीट उंचे प्रेतशिला पहाड़ी के शिखर तक जाना पड़ता है। ऐसे तो सभी श्रद्धालु पिंडदान करने वाले यहां पहुंचते हैं, परंतु शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को इतनी ऊंचाई पर वेदी के होने के कारण वहां तक पहुंचना मुश्किल होता है। उस वेदी तक पहुंचने के लिए यहां पालकी की व्यवस्था भी है, जिस पर सवार होकर शारीरिक रूप से कमजोर लोग यहां तक पहुंचते हैं।

पंडा मनीलाल बारीक आईएएनएस से कहते हैं, “प्रेतशिला वेदी के पास विष्णु भगवान के चरण के निशान हैं तथा इस वेदी के पास पत्थरों में दरार है। मान्यता है कि यहां पिंड दान करने से अकाल मृत्यु को प्राप्त पूर्वजों या परिवार का कोई सदस्य तक पिंड सीधे उन्हीं तक जाता है तथा उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।” उन्होंने बताया कि सभी वेदियों पर तिल, गुड़, जौ आदि से पिंड दिया जाता है, परंतु इस पिंड के पास तिल मिश्रित सत्तु छिंटा (उड़ाया) जाता है। उन्होंने बताया कि पूर्वज जो मृत्यु के बाद प्रेतयोनि में प्रवेश कर जाते हैं तथा अपने ही घर में लोगों को तंग करने लगते हैं, उनका यहां पिंडदान हो जाने से उन्हें शांति मिल जाती है और वे मोक्ष को प्राप्त कर लेते हैं।
उन्होंने बताया कि पहले प्रेतशिला का नाम प्रेतपर्वत हुआ करता था, परंतु भगवान राम के यहां आकर पिंडदान करने के बाद इस स्थान का नाम प्रेतशिला हुआ। प्रेतशिला में पिंडदान के पूर्व ब्रह्म कुंड में स्नान-तर्पण करना होता है। ब्रह्म कुंड के बारे में कहा जाता है कि इसका प्रथम संस्कार भगवान ब्रह्मा जी द्वारा किया गया था।गया में पिंडदान करने आए नेपाल के महेश लेपचा कहते हैं कि मरने के बाद कौन कहां जाता है यह गूढ़ रहस्य है, परंतु सनातन परंपरा के मुताबिक पिंडदान आवश्यक है, जिसका पालन कर रहा हूं। उनका मानना है कि पिंडदान से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.