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करता है बीमारियां से मुक्त, जानें क्या होता है पारद शिवलिंग

पारद को शिव का स्वरुप माना गया है तो तांबे को मां पार्वती का स्वरुप माना जाता है। इन दोनों को मिलाने से शिव और पार्वती का सशक्त रुप सामने आता है।
हाई ब्लड प्रेशर से पीडित लोग, अस्थमा, डायबिटीज जैसी बिमारीयों से ग्रस्त हैं तो पारद से बना मणिबंध शुभ मुहूर्त में धारण करना चाहिए।

पारद शिवलिंग का पूजन समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है। पारद को अंग्रेजी में एलम कहा जाता है। ये एक तरह का तरह पदार्थ होता है और इसे ठोस रुप में लाने के लिए विभिन्न अन्य धातुओं जैसे कि स्वर्ण, रजत, ताम्र सहित विभिन्न जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है। इसे बहुत अधिक तापमान में पिघलाकर स्वर्ण और ताम्र के साथ मिलाकर और पिघलाकर आकार दिया जाता है। पारद को भगवान शिव का स्वरुप माना जाता है और ब्रह्माण को जन्म देने वाले उनके वीर्य का प्रतीक भी मानते हैं। धातुओं में अगर पारद को शिव का स्वरुप माना गया है तो तांबे को मां पार्वती का स्वरुप माना जाता है। इन दोनों को मिलाने से शिव और पार्वती का सशक्त रुप सामने आता है और इस लिंग को सुवर्ण लिंग भी कहा जाता है। पारद के इस लिंग का वर्णन कई प्राचीन ग्रंथों रुद्र सहिंता, पारद सहिंता, ब्रह्म पुराण और शिव पुराण आदि में पाया जाता है।

– जीवन में अत्याधिक कष्ट हैं और उनसे छुटकारा नहीं मिल पा रहा है और इसके साथ ही बीमारियों से ग्रस्त रहते हैं तो पारद शिवलिंग की विधि के साथ पूजा करनी चाहिए। पारद शिवलिंग के पूजन से शरीर और मानसिक सभी रोग नष्ट हो जाते हैं।
– यदि लोग आपके साथ विश्वासघात करते हों या किसी प्रकार से आपको नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं तो अवश्य ही हर सोमवार को पारद शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए।
– धन-धान्य की कमी के बनी रहती है। मेहनत के कारण भी फल की प्राप्ति नहीं होती है तो पारे से बने हुए लक्ष्मी और गणेश को पूजा स्थान पर स्थापित करना चाहिए। मान्यता है जहां पारे का वास होता है वहां माता लक्ष्मी का वास होता है।
– घर में अशांति, क्लेश आदि बना रहता है तो पारे से बनी कटोरी में जल डालकर घर के मध्य में रख दें और रोजाना इस पानी को बदलें। इस पानी को किसी गमले में डालें। घर में धीरे-धीरे प्रेम भाव बढ़ना शुरु हो जाएगा।

– हाई ब्लड प्रेशर से पीडित लोग, अस्थमा, डायबिटीज जैसी बिमारीयों से ग्रस्त हैं तो पारद से बना मणिबंध शुभ मुहूर्त में धारण करना चाहिए। इससे कई घातक बिमारियों से मुक्ति पा सकते हैं।

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