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शन‍िदेव को प्रसन्‍न करने के हैं तीन तरीके, साढ़ेसाती और ढैया से बचने के ल‍िए है अलग मंत्र

शनि को नियंत्रित करने और अपने जीवन में संघर्ष कम करने के लिए भगवान शनि के विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है तो हमें काफी फायदा मिलेगा।
शनि देव (सांकेतिक फोटो)

मंत्रों का जाप करने से शनिदेव जीवन की बहुत सारी मुसिबतें दूर कर सकते हैं। शनि को नियंत्रित करने और अपने जीवन में संघर्ष कम करने के लिए भगवान शनि के विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है तो हमें काफी फायदा मिलेगा। मंत्रों के जाप से हम शनिदेव को प्रसन्न करके हम जीवन में संघर्ष कम कर सकते हैं। शनि को प्रसन्न करने की तीन विधियां हैं। इनमें पहली है आचरण से, दूसरी रत्न से और तीसरा तरीका है मंत्रों से। शनि को खुश करने के लिए सबसे आपको अपना आचरण सही करना होगा। इसके लिए आपको अपने व्यवहार और विचारों में सुधार करना होगा और दान देते रहना होगा। अगर आपने यह सब ठीक कर लिया तो शनि से होने वाली परेशानियां कम हो सकती हैं। इसके अलावा जलीय या वायु तत्व के रत्न अगर आप धारण कर लते हैं तो उससे भी शनि प्रसन्न हो सकते हैं। लेकिन शनि के प्रसन्न करने का सबसे ताकतवर तरीका उनके मंत्रों का जाप है। बताया जाता है कि मंत्रों के जाप से शनिदेव जल्दी प्रसन्न होते हैं और अलग-अलग परेशानियों के निवारण के लिए शनि देव के अलग-अलग मंत्रों का जाप किया जाता है।

कब करें शनिदेव के मंत्रों का जाप-
-जब आपकी कुंडली में प्रबल समस्याओं की दिशा बन रही हो या फिर शनि के कारण दुर्घटनाओं या प्राण संकट के योग बन गए हैं तो मंत्रों का जाप करें। शनि आपको लिए मारक हो गया है तो शनि के मंत्र ही काम करेंगे।
-जब शनि की वजह से कदम-कदम पर संघर्ष का सामना करना पड़ता है।
-जब आपको अपने अधिकारी नहीं मिलें या शनि की साढ़ेसाती और ढैया चल रही हो तो मंत्रों का जाप करें। इससे शनिदेव प्रसन्न होंगे और शनि से जुड़ी आपकी सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी।

शनि मंत्र और जाप का तरीका-
शनिदेव के मंत्रों का जाप स्त्री और पुरुष दोनों कर सकते हैं। मंत्रों का जाप पूर्व-पश्चिम दिशा की तरफ मुंह करके करना उत्तम रहेगा। शनिदेव के मंत्रों के जाप का उत्तम समय समय संध्या काल है। शनिदेव की तस्वीर के साथ मंत्रों का जाप नहीं करना चाहिए और इनका जाप रुद्राक्ष की माला पर ही करना चाहिए। जाप करते वक्त सफेद या नीले रंग के वस्त्र धारण किए होने चाहिए।

कौन-कौन से हैं शनि के मंत्र-
बीज मंत्र- ‘शं’ लिखकर अपने पास रख सकते हैं या काम की जगह पर भी लगा सकते हैं।
वैदिक मंत्र- ‘ऊँ शं शनैश्चराय नम:’ मंत्र का जाप सुबह-शाम 108 बार करने चाहिए। इससे शनि कभी नाराज नहीं होगा।
तांत्रिक मंत्र- शनि की दशा लगी है तो ‘ऊँ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:’ मंत्र का जाप करना चाहिए।
पौराणिक मंत्र- शनि संबंधि किसी भी पूजा की शुरुआत करने से पहले ‘नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामी शनैश्चरम्’ मंत्र का जाप करना चाहिए।
सबसे शक्तिशाली मंत्र- ‘सूर्यपुत्रो दीर्घ देहो विशालाक्ष: शिवप्रिय: मंदचार: प्रसन्नात्मा पीड़ां हरतु में शनि:!!’ यह मंत्र सबसे शक्तिशाली है। साढ़ेसाती और ढैया से बचने के लिए इस मंत्र का लगातार 108 दिन तक जाप करना चाहिए।

(यह जानकारी टीवी चैनल तेज पर ज्योतिषि शैलेंद्र पांडे के कार्यक्रम से ली गई है।)

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