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उत्पन्ना एकादशी 2017 व्रत कथा: जानिए किस राक्षस ने किया था भगवान विष्णु के वध का प्रयास

Utpanna Ekadashi 2017 Vrat Katha: भगवान कृष्ण ने खुद पांडव पुत्र युद्धिष्ठिर को भगवान विष्णु और मुर राक्षस की कथा सुनाई थी, इस दिन से ही एकादशी व्रत की शुरुआत हुई थी।
Utpanna Ekadashi 2017 Vrat Katha: सभी एकादशी के व्रत भगवान विष्णु की शक्ति देवी एकादशी को समर्पित किए जाते हैं।

हिंदू पंचाग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष के 11वें दिन को उत्पन्ना एकादशी के रूप में मनाया जाता है। ये देवउठना एकादशी की अगली एकादशी होती है। ये एकादशी सभी एकादशी में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन देवी एकादशी का जन्म हुआ था। देवी एकादशी भगवान विष्णु की एक शक्ति का रुप हैं। सभी एकादशी के व्रत भगवान विष्णु के इस शक्ति रूप को समर्पित किए जाते हैं। उन्होनें राक्षस मुर का इस दिन उतपन्न होकर वध किया था। इसलिए इस एकादशी को उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है। राक्षस मुर ने भगवान विष्णु को नींद में मारने का प्रयास किया था। इसलिए देवी एकादशी को विष्णु की सभी शक्तियों में से एक शक्ति माना जाता है। देवी वैष्णवी भी विष्णु की शक्ति का रुप हैं। जो लोग हर माह एकादशी का व्रत करते हैं वो इस दिन से अपना व्रत शुरु करते हैं।

भगवान कृष्ण ने पांडव पुत्र युधिष्ठिर को देवी एकादशी के जन्म की कथा सुनाई थी। इस कथा में एक महाबलशाली राक्षस था, जिसका नाम मुर था। उसने अपनी शक्तियों से स्वर्ग को जीत लिया था। उसकी शक्तियों के आगे सभी ने हार मान ली थी और इस कारण उन्हें मृत्युलोक आना पड़ा। इसके बाद इंद्र देव परेशान होकर भगवान शिव के पास कैलाश जाते हैं और अपनी परेशानी बताते हैं। भगवान शिव उन्हें विष्णु के पास जाने के लिए कहते हैं। उनकी इस सलाह के बाद सभी देव एकसाथ क्षीरसागर पहुंचते हैं, वहां वो देखते हैं कि भगवान विष्णु निंद्रा में हैं। थोड़ी देर बाद भगवान विष्णु के जागने पर सभी देवता उनकी प्रार्थना करते हैं। विष्णु उनसे क्षीर सागर आने का कारण पूछते हैं तो वो सभी राक्षस मुर के बारे में बताते हैं कि किस तरह उसने सभी देवताओं को स्वर्ग से जाने पर मजबूर कर दिया है।

भगवान विष्णु उन्हें आश्वासन देते हैं और इसके बाद सभी देव मुर से युद्ध करने उसकी नगरी जाते हैं। कई वर्षों तक भगवान विष्णु और मुर में युद्ध चलता है। इस युद्ध के दौरान भगवान विष्णु को नींद आने लगती है और वो विश्राम करने के लिए बदरिकाश्रम चले जाते हैं। वहां एक गुफा में वो निंद्रावस्था में चले जाते हैं। उन्हें सोता देख मुर उनपर आक्रमण करने की सोचता है। जैसे ही वो आक्रमण करने जाता है। भगवान विष्णु से एक कन्या का उत्पन्न होता है। इसके बाद मुर और उस कन्या में युद्ध चलता है और इसमें मुर घायल होकर मूर्छित हो जाता है और देवी एकादशी उसका सिर धड़ से अलग कर देती हैं। इसके बाद भगवान विष्णु की नींद खुलने पर उन्हें पता चला कि किस तरह से उस कन्या ने भगवान विष्णु की रक्षा की है। इसपर भगवान विष्णु उसे वरदान देते हैं कि तुम्हारी पूजा करने वाले के सभी पाप नष्ट हो जाएंगे और उसे विष्णुलोक की प्राप्ति होगी।

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