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मुस्लिम गड़ेरिए ने खोजी थी अमरनाथ की गुफा, वंशजों को जाता है चौथाई चढ़ावा

इस गुफा में एक स्थान पर लगातार पानी की बूंदे एक जगह टपकती रहती हैं। इन्ही बूंदों के साथ करीब दस फीट ऊंचा शिवलिंग निर्मित होता है।
मान्यताओं में प्रचलित है कि इसी गुफा में माता पार्वती को भगवान शिव नें अमरकथा सुनाई थी।

हिमालय की गोद में बसा हिंदूओं का पवित्र तीर्थ स्थल अमरनाथ गुफा है। इसकी दूरी श्रीनगर से करीब 135 किलोमीटर की है। अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। अमरनाथ को सभी तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है। मान्यता है कि यहीं पर भगवान शिव ने पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। इस गुफा की विशेषता बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्माण होना है। प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहा जाता है। इस गुफा में एक स्थान पर लगातार पानी की बूंदे एक जगह टपकती रहती हैं। इन्ही बूंदों के साथ करीब दस फीट ऊंचा शिवलिंग निर्मित होता है। आश्चर्य की बात है कि आमतौर पर गुफाओं में कच्ची बर्फ होती है जो हाथ लगाने पर ही टूट जाती है लेकिन ये शिवलिंग ठोस बर्फ से बना होता है। इस गुफा को लगभग 5000 वर्ष पुराना माना जाता है। इस गुफा की ऊंचाई समुन्द्र तल से करीब 3888 मीटर है।

मान्यताओं में प्रचलित है कि इसी गुफा में माता पार्वती को भगवान शिव नें अमरकथा सुनाई थी। जब भगवान शिव माता पार्वती को कथा सुना रहे थे तो वहां बैठे दो पक्षियों ने भी वो कथा सुन ली थी और उसके बाद उन्हें अमरत्व प्राप्त हो गया। गुफा में आज भी एक कबूतर का जोड़ा दिखाई देता है जिसे श्रद्धालु अमर पक्षी मानते हैं। इसके साथ ही एक मान्यता है कि भगवान शिव ने माता पार्वती को एक कथा सुनाई जिसमें इस गुफा और इसके रास्ते में आने वाले स्थानों का वर्णन होता है। इस कथा को अमरकथा कहा जाता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव जब माता को अमरकथा सुनाने ले जा रहे थे तो उन्होनें छोटे-छोटे नागों को अनंतनाग में छोड़ दिया था, माथे के चंदन को चंदनबाड़ी में उतारा, अन्य पिस्सुओं को पिस्सू टॉप पर और गले के शेषनाग को शेषनाग नामक स्थल पर छोड़ा था। ये सभी स्थल अमरनाथ की यात्रा के दौरान आते हैं।

अमरनाथ गुफा का पता सबसे पहले सोलहवीं शताब्दी के पूर्वाध में एक मुसलमान गडरिए को पता चला था। आज अमरनाथ के कुल चढ़ावें में से एक चौथाई उस मुसलमान गडरिए के वंशजों को मिलता है। अमरनाथ जाने के दो रास्ते हैं एक जो पहलगाम से होकर गुजरता है और एक दूसरा जिसमें से एक बलटाल से निकलता है। इन जगहों तक किसी वाहन से आया जा सकता है। रेलगाड़ी से आने वालों के लिए जम्मू नजदीकी स्टेशन है और हवाई जहाज से आने वालों के लिए श्रीनगर नजदीक है, लेकिन जम्मू और कश्मीर की लोकप्रियता के कारण जल्द ही श्रीनगर तक रेलगाड़ी से पहुंचा जा सकता है। पहलगाम के रास्ते में सरकारी कैम्प और सुरक्षा के इंतजाम किए जाते हैं इस रास्ते से गुफा की दूरी करीब 30 किमी है। बलटाल से अमरनाथ गुफा की दूरी 14 किमी है लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से ये रास्ता उचित नहीं है, इस रास्ते से यात्रा करने के सलाह नहीं दी जाती है, लेकिन इस रास्ते से जाने वाले यात्रियों की जिम्मेदारी किसी की नहीं होती है।

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