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सावन शिवरात्रि 2017: इस मुहूर्त पर कांवड़िए करें शिवलिंग पर जलाभिषेक

Sawan Shivratri 2017, Kawad Jal Abhishek Date: सावन के महीने में शिव भक्त केसरिया रंग के कपड़े पहनकर कंधों पर गंगाजल लेकर यात्रा करते हैं।
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

10 जुलाई से सावन का महीना शुरू होकर सात अगस्त को रक्षाबंधन के दिन खत्म हो जाएगा। सावन के महीने को भगवान शिवजी का महीना माना जाता है। इस महीने में भगवान शिवजी को खुश करने के लिए उनके भक्त पूजा-पाठ करते हैं, वहीं कुछ भक्त इस महीने में कांवड़ लाकर भगवान शिवजी को प्रसन्न करते हैं। मान्यता है कि सावन के महीने में कावंड़ लाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साल 2017 में कावंड़ लाने वाले भक्त 21 जुलाई को शिवलिंग पर जलार्पण करेंगे।

सावन के महीने में शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस महीने में शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित किया जाता है। भगवान शिवजी के भक्त केसरिया रंग के कपड़े पहनकर कंधों पर गंगाजल लेकर यात्रा करते हैं और शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जलार्पण करते हैं।

शिवलिंग पर कौन सी चीज नहीं चढ़ाई जाती है?

कहा जाता है कि सावन के महीने में सभी देवता शयन करते हैं वहीं भगवनान भोलनाथ जाग्रत रहकर अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। साल में कांवड़ को सिर्फ एक बार सावन के महीने में लाया जाता है। सावन के महीने में कांवड़ लाने के बारे में मान्यता है कि सावन के महीने में समुद्र मंथन के दौरान विष निकला था, दुनिया को बचाने के लिए भगवान शिव ने इस विष का सेवन कर लिया था। विष का सेवन करने के बाद भगवान भोलनाथ को नीलकंठ कहा जाने लगा।

विष का सेवन करने से दुनिया तो बच गई लेकिन भगवान शिव का शरीर जलने लगा। भगवान शिव के शरीर को जलता देख देवताओं ने उन पर जल अर्पित करना शुरू कर दिया। जल अर्पित करने के कारण भगवान शिवजी का शरीर ठंडा हो गया और उन्हें विष से राहत मिली। तभी से कांवड़ लाने की परंपरा शुरू हुई।

वहीं एक दूसरी पौराणिक कथा के मुताबिक भगवान परशुराम सावन के महीने में हर सोमवार कांवड़ में जल लाकर भगवान शिवजी की पूजा- अर्चना करते थे। सावन के महीने में गंगाजल व पंचामृत से अभिषेक करने से शीतलता मिलती है। हर सोमवार भगवान शिवजी के पूजन में भांग, धतूरे और लाल कनेर के फूलों से पूजन का विधान है।

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