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2 जुलाई को खत्म हो रहे हैं गुप्त नवरात्रि, उससे पहले इस तरह करें पूजा-पाठ

गुप्त नवरात्र को तंत्र साधना के लिए बेहद विशेष माना जाता है।
सांकेतिक फोटो

गुप्त नवरात्रि रविवार(25 जून) से शुरू हुए हैं और 2 जुलाई को खत्म होंगे। इस दौरान दुर्गा मां की पूजा करना शुभ बताया जाता है। ज्योतिषियों के मुताबिक इन दिनों में अलग-अलग तंत्र विद्याएं सीखने के लिए विशेष पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्र को तंत्र साधना के लिए बेहद विशेष माना जाता है। साल के आषाद और माघ के शुल्क में होने के कारण इसे गुप्त नवरात्र कहा जाता है। गुप्त रात्रि के दौरान पूजा-पाठ करके कई तांत्रिक विशेष शक्ति लेने का प्रयास करते हैं।

ज्योतिषियों के मुताबिक इस दौरान नवदुर्गा के नौं रूपों की पूजा की जाती है। इनमें मां काली, भुवनेश्वरी, त्रिपुरी भैंरवीं, मां धूमावती, त्रिपुर सुन्दरी, माता छिन्न महता, माता बगुला मुखी, तारा, देवी, मांतगी व कमला देवी शामिल हैं।

तांत्रिक विद्या सिखने के अलावा इस दौरान अगर आप अपने घर में भी पूजा करते हैं तो इसे भी काफी शुभ माना जाता है। पूजा की विधि- घर में मिट्टी के कलश में पानी भरकर रख दिया जाता है। साथ ही मिट्टी के दो बर्तनों में मिट्टी भरकर उसमें गेहूं या जौ के दाने बोए जाते हैं। बोने के बाद उसमें रोज पानी ड़ाला जाता है। दस दिन पूरे होने के बाद देवी की प्रतिमाओं और मिट्टी के बर्तन में रखे गेंहू और जौ का विसर्जन कर दिया जाता है।

ज्योतिषियों का कहना है कि इन नौ दिनों में जो कुछ भी दान किया जाता है, उसे उसका कई गुना करोड़ों मिलता है। इस दौरान व्रत करना बहुत शुभ होता है। अष्टमी के दौरान कन्या पूजा का बहुत महत्व माना जाता है। यही कारण है कि अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करके व्रत का उद्यापन करना चाहिए।

बता दें गुप्त नवरात्रि की पूजा भी अन्य नवरात्रि की तरह होती हैं। इस दौरान सुबह और शाम दुर्गा मां की पूजा करें।

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