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फ्रेंडशिप डे 2017: भारत में ‘महाभारत’ और ‘रामायण’ के समय से है दोस्ती की मिसाल

Friendship Day 2017: भारत में 'महाभारत' और 'रामायण' के समय से ही दोस्ती का बड़ा महत्व रहा है। राम-कृष्ण ने, हनुमान-सुग्रीव ने और कृष्ण-सुदामा ने भी सच्ची दोस्ती का समाज को अच्छा मैसेज दिया है।
Friendship Day 2017: इस बार 6 अगस्त को फ्रेंडशिप डे मनाया जाएगा।(फोटो सोर्स- यूट्यूब)

भारत में फ्रेंडशिप डे का महत्व आज से नहीं है, अगर इतिहास के पन्ने पलटोगे तो दोस्ती की ऐसी ऐसी मिसाल मिलेंगी जो आज भी जीवंत नजर आती हैं। वैसे तो भारत में फ्रेंडशिप डे इंटरनेशनल के रूप में कुछ ही सालों से मनाया जाता है लेकिन भारत में ‘महाभारत’ और ‘रामायण’ के समय से ही दोस्ती का बड़ा महत्व रहा है। राम-कृष्ण ने, हनुमान-सुग्रीव ने और कृष्ण-सुदामा ने भी अच्छे दोस्त बनकर समाज को अच्छा मैसेज दिया है। आज भी दोस्त का जिक्र होने पर इनकी दोस्ती की बात की जाती है। बीते साल फ्रेंडशिप डे 7 अगस्त को मनाया गया था और इस बार 6 अगस्त को फ्रेंडशिप डे मनाया जाएगा।

हनुमान – सुग्रीव
दोस्ती की बात हो बजरंगबली हनुमान का जिक्र ना हो तो सब अधूरा है। इनकी दोस्ती सुग्रीव से थी, जिन्होंने पूरी तरह हर परिस्थिति में हनुमान जी का साथ दिया था और सीता जी को रावण की कैद से छुड़ाने में भी मदद की थी।

कृष्ण – सुदामा
कृष्ण-सुदामा की दोस्ती के बिना सबकुछ अधूरा है। दोस्त वो है, जो बिना कहे अपने दोस्त की हर मुश्किल आसान कर दें। कुछ ऐसा ही भगवान कृष्ण ने किया था। उन्होंने अपने गरीब मित्र की मित्रता का भी मान रखा और उनकी गरीबी को भी हर लिया था।

नारायण धाम मंदिर उज्जैन जिले की महिदपुर तहसील से करीब 9 किलोमीटर दूर स्थित एक ऐसी जगह है जिसे आज भी कृष्ण और सुदामा की मित्रता के रूप में देखा जाता हैं। ये भारत में एक मात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान श्रीकृष्ण अपने मित्र सुदामा के साथ मूर्ति रूप में विराजित हैं। श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता का प्रमाण नारायण धाम मंदिर में स्थित पेड़ों के रूप में आज भी देखा जा सकता है। मंदिर प्रबंध समिति व प्रशासन के सहयोग से अब इस मंदिर को मित्र स्थल के रूप में नई पहचान दी जा रही है। मान्यता है कि नारायण धाम वही स्थान है जहां श्रीकृष्ण व सुदामा बारिश से बचने के लिए रुके थे। इस मंदिर में दोनों ओर स्थित हरे-भरे पेड़ों के बारे में लोग कहते हैं कि ये पेड़ उन्हीं लकड़ियों के गट्ठर से फले-फूले हैं, जो श्रीकृष्ण व सुदामा ने एकत्रित की थी।

कृष्ण – अर्जुन
कृष्ण-अर्जुन के एक अच्छे मित्र और मार्गदर्शक रहे हैं। उन्होंने अर्जुन को उस वक्त संभाला जब वो परिस्थितियों के भंवर में फंसकर युद्ध छोड़कर जा रहे थे। तब कृष्ण ने अर्जुन को मार्ग दिखाया और अर्जुन ने भी मित्र की बातों का मान रखा। इतिहास और धर्मशास्त्र गवाह है कि भारत मित्रता के क्षेत्र में सबसे आगे रहा है। यहां की मित्रता जन्म-जनमांतर की होती है।

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