June 24, 2017

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हथेली में इस जगह होती है मस्तिष्क रेखा, खोलती है प्यार, पेशा और दिमाग से जुड़े राज

हथेली में मस्तिष्क रेखा को स्पष्ट, पुष्ट, सुदृढ होना जरूरी है, क्योंकि जिसके हाथ में ये रेखा नहीं होती वह बुद्धिविहीन होता है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

हथेली के किनारे से निकलकर अंगूठे और तर्जनी के बीच वाले हिस्से तक तीन रेखाएं जाती हैं, जिन्हें गोत्र, द्रव्य और आयु रेखा कहा जाता है। गोत्र रेखा को जीवन रेखा, द्रव्य रेखा को धन, वैभव सम्पन्नता रेखा भारतीय विद्वानों-मनीषियों ने कहा है, लेकिन पश्चिमी विद्वानों ने इसे मस्तिष्क रेखा या शीर्ष रेखा कहा है। हथेली में मस्तिष्क रेखा को स्पष्ट, पुष्ट, सुदृढ होना जरूरी है, क्योंकि जिसके हाथ में ये रेखा नहीं होती वह बुद्धिविहीन होता है। इसी रेखा से जीवन में प्रतिष्ठा, यश, मन, धन, संपन्नता मिलती है। यदि बुद्धि विकृत हो तो संपत्ति, मान-सम्मान सब कुछ नष्ट हो जाता है।

जीवन रेखा के कई महत्व है, इस रेखा में आपके दिमाग, पेशा और प्यार से जुड़े कई राज छुपे होते हैं। ऐसे में हम आपको ‘कीरो हस्तरेखा शास्त्र’ पुस्तक में लिखे गए कुछ ऐसे तरीके बताते हैं, जिससे आप खुद पता कर सकते हैं कि आपकी मस्तिष्क रेखा में क्या लिखा है।

1.
मस्तिष्क रेखा चलती हुई हृदय रेखा की ओर झुककर फिर अपने रास्ते पर चले तो जातक जिनसे प्यार करता है वह उससे बेवफाई करते हैं और वह उनके प्यार में पागल हुआ फिरता है।

2.
अगर मस्तिष्क रेखा छोटी और स्पष्ट हो अथवा लंबी और कमजोर हो तो जातक किसी भी मामले में निश्चित फैसला नहीं कर पाता। उसका मन चंचल, अस्थिर रहता है। अगर मस्तिष्क रेखा हाथ में न हो तो जातक मूर्ख होता है, दिमागी रोगी भी हो सकता है।

3.
मस्तिष्क रेखा लंबी-सीधी और स्पष्ट हो तो जातक कुशाग्र बुद्धि वाला होता है और सोचने समझने की शक्ति अच्छी होती है।

4.
यदि यह रेखा जीवन रेखा को स्पर्श करती हुई लंबी और स्पष्ट होकर मंगल क्षेत्र तक जाए तो व्यक्ति शासन में निपुण होता है। उसके मन में अधिकार और महत्वकांक्षा की भावना प्रबल होती है। गुरु क्षेत्र और जीवन रेखा के संयोग से जातक में बौद्धिक शक्ति और प्राण शक्ति में समन्वय होता है। इसमें साहस, विचारशक्ति, सावधानी और सतर्कता प्रयाप्त मात्रा में होती है।

5.
अगर मस्तिष्क रेखा चंद्र पर्वत के बीच तक आए और तर्जनी के दूसरे पर्व में खड़ी रेखाओं हों तो व्यक्ति ज्योतिष, तंत्र-मंत्र विद्याओं में पारंगत होता है।

6.
मस्तिष्क रेखा थोड़ा चलकर शुक्र पर्वत की ओर मुड़े तो जातक डरपोक बनता है और उसमें शक्ति की कमी होती है।

7.
अगर सूर्य व बुध पर्वत उभरे हुए हों, भाग्य रेखा, सूर्य रेखा अच्छी हों तब मस्तिष्क रेखा चंद्र पर्वत तक नीचे तक आए तो जातक छोटी आयु में ही बड़ा कलाकार, संगीतज्ञ होता है।

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First Published on April 20, 2017 12:47 pm

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