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पूर्व NSA एम के नारायण की सलाह- ‘कैदियों की अदला-बदली से सुलझ सकता है जाधव मामला’

पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के.नारायणन ने सोमवार को कहा कि कैदियों का अदला-बदली संभवत: एक मात्र तरीका है, जिससे कथित जासूस कुलभूषण जाधव का मामला हल किया जा सकता है।
Author कोलकाता | April 17, 2017 20:11 pm
पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के.नारायणन

पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के.नारायणन ने सोमवार को कहा कि कैदियों का अदला-बदली संभवत: एक मात्र तरीका है, जिससे कथित जासूस कुलभूषण जाधव का मामला हल किया जा सकता है। नारायणन ने यहां कहा, “मेरे विचार से कैदियों की अदला-बदली ही एकमात्र तरीका है, जिससे हम इस मुद्दे को सुलझा सकते हैं। लेकिन बाद में उन्होंने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। भारत ने चेतावनी दी है कि यदि जाधव को फांसी हुई तो इसे ‘सुनियोजित हत्या’ माना जाएगा।

जाधव को जासूसी और पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोपों में फांसी की सजा सुनाई गई है। पाकिस्तान का कहना है कि जाधव को बलूचिस्तान में गिरफ्तार किया गया था। भारत का कहना है कि उसे ईरान से अपहरण करके लाया गया। इस मामले को लेकर भारत ने शनिवार को 17 अप्रैल को निर्धारित द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा वार्ता को रद्द कर दिया। द नेवतिया युनिवर्सिटी द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन से इतर नारायणन ने यह बात कही।

वहीं दूसरी ओर भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी कुलभूषण जाधव के मामले में भारत ने पाकिस्तान से जो दस्तावेज मांगे थे, वे अभी तक मुहैया नहीं कराए गए हैं और न ही पाकिस्तान की ओर से कोई जवाब मिला है। राजनयिक चैनल के जरिए भारत ने जाधव के खिलाफ दायर किए गए आरोपपत्र और सैन्य अदालत के फैसले की प्रमाणित प्रतियां मुहैया कराने की मांग की थी। इस बीच, रविवार को भारतीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और थल सेनाध्यक्ष बिपिन रावत के बीच मुलाकात के दौरान जाधव मुद्दे के चलते पैदा हुए पर बातचीत हुई। दोनों ने सीमा पर हालात की समीक्षा की।  विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने रविवार को कहा, ‘हमने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से आरोपपत्र की प्रमाणित प्र्रति के साथ-साथ जाधव को सुनाई गई मौत की सजा के फैसले की प्रति मांगी थी लेकिन पाकिस्तान की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।’  इस बीच, पाकिस्तान जाधव मामले में तैयार किए गए डोजियर को संयुक्त राष्ट्र के साथ ही इस्लामाबाद स्थित विभिन्न राजनयिक मिशनों को सौंपने की तैयारी में है। पाकिस्तान की इस गतिविधि पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने निगाह लगा रखी है। रक्षा मंत्रालय भी अपनी ओर से एहतियात बरत रहा है। सीमा पर सेना की चौकसी की लगातार समीक्षा की जा रही है। इस बारे में अजित  डोभाल और जनरल बिपिन रावत के बीच बातचीत हुई बताई जा रही है।

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