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नृत्य : मालती श्याम का कथक

इन दिनों राजधानी के प्रगति मैदान में विश्व पुस्तक मेला चल रहा है। इस दौरान साहित्यिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक उत्सव ने मेले की रौनक और बढ़ा दी है।
मालती श्याम की एक प्रस्तुति। (फाइल फोटो)

इन दिनों राजधानी के प्रगति मैदान में विश्व पुस्तक मेला चल रहा है। इस दौरान साहित्यिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक उत्सव ने मेले की रौनक और बढ़ा दी है। हर शाम कलाकार लाल चौक में संगीत और नृत्य विभाग की ओर से लोक संगीत और नृत्य के कार्यक्रम पेश कर रहे हैं। इसके अलावा एक शाम कथक नृत्यांगना मालती श्याम व उनकी शिष्याओं ने कथक नृत्य और मुरासु कल्चरल कम्युनिटी नगरकॉयल के कलाकारों ने करगट्टम लोक नृत्य पेश किया।

विविध भारत-विविधता में एकात्मकता मंच पर कथक नृत्यांगना मालती श्याम ने कथक नृत्य पेश किया। अपनी एकल प्रस्तुति का आरंभ उन्होंने गणेश स्तुति से किया। यह श्लोक-‘वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि’ और भजन ‘गाइए गणपति जगवंदन’ पर आधारित थी। तुलसीदास की इस रचना में नृत्यांगना मालती श्याम ने गणेश के स्वरूप का विवेचन किया। उन्होंने तीन ताल में शुद्ध नृत्य पेश किया। विलंबित लय में उपज में पैर के निकास के अंदाज को दिखाया। वहीं थाट में नायिका के खड़े होने का अंदाज पेश किया।

उन्होंने थाट की पेशकश में कलाई का घुमाव, सांसों पर नियंत्रण, डोरा, कसक-मसक को बखूबी निभाया। आमद ‘थेई-तत-तत’ में लास्य और तांडव के भाव को दर्शाया। इसके बाद, मध्य लय में तिहाई ‘आ-थेई-तत’ व ‘धा-धिंना-धा’ और लड़ी में पैर का काम पेश किया। उन्होंने गत भाव में पनघट की गत व घूंघट की गत को प्रस्तुत किया। उन्होंने द्रुत लय में एक से पांच अंकों की तिहाई व जुगलबंदी पेश किया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति का समापन ठुमरी ‘आज मोरी कलाई मुरक गई’ पर भाव से किया। उनके भाव में नायिका और नायक के भावों के विवेचन में काफी परिपक्वता और सहजता दिखी।

कथक नृत्यांगना मालती श्याम के साथ तबले पर अखिलेश भट्ट और गायन पर अमजद अली ने संगत किया। नृत्यांगना मालती श्याम की शिष्याओं ने प्रगति मैदान के लाल चौक मंच पर कथक नृत्य पेश किया। इस प्रस्तुति का आरंभ गणेश स्तुति ‘हे गणनायक विघ्न विनायक’ से हुआ। इसे अक्षी, कोपल और मेघा ने पेश किया। दूसरी प्रस्तुति राग कलावती और तीन ताल में निबद्ध तराना थी। इसमें मेघा, कोपल और प्रेरणा तिवारी ने पेश किया। इस प्रस्तुति के क्रम में शिष्याओं ने तिहाई ‘तक-धिंन-गिन’ और परमेलू ‘धग-त-किट-तक-धित-ताम’ के बोल पर मोहक काम पेश किया। ठुमरी ‘श्याम कर गईयां’ पर मीनल और आरोही लायल ने भाव और अभिनय निरूपित किया।

पंडित बिंदादीन महाराज की ठुमरी पर भाव को दर्शाते हुए, दोनों नृत्यांगना ने बेहतरीन तालमेल दर्शाया। लयकारी और पैर के काम को खासतौर पर अगले तराने में पेश किया गया। इसमें शिरकत करने वाले कलाकार थे-यामिका महेश, मीनल और रितुब्रत चक्रवर्ती। राग मालकौंस और तीन ताल में निबद्ध तराने को कलाकारों ने सामूहिक रूप से पेश किया। इसमें शिरकत करने वाले शिष्य-शिष्याओं में शामिल थे-अक्षी, आरोही, यामिका महेश, रेणू कुमार, सुचिता दास, संगीता मजूमदार, रितुब्रत चक्रवर्ती और सिमर सोखी। प्रस्तुति का समापन तराने से हुआ। इसे यामिका महेश, अक्षी और रितुब्रत चक्रवर्ती ने प्रस्तुत किया। कलाकारों का आपसी सामंजस्य और तालमेल अच्छा था। संगीत सुंदर और मधुर थी।

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