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आंखों में सपने लिए घाटी छोड़ रहे कश्मीरी विद्यार्थी

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले की निवासी 17 साल की सुरैया गुलजार सिविल सेवाओं में जाना चाहती हैं और पुलवामा के खुर्शीद (बदला हुआ नाम) हृदयरोग विशेषज्ञ बनना चाहते हैं।
Author जम्मू | October 18, 2016 00:57 am
तस्वीर का इस्तेामल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले की निवासी 17 साल की सुरैया गुलजार सिविल सेवाओं में जाना चाहती हैं और पुलवामा के खुर्शीद (बदला हुआ नाम) हृदयरोग विशेषज्ञ बनना चाहते हैं। बारहवीं के छात्र खुर्शीद कहते हैं, ‘लेकिन जब हम पढ़ ही नहीं पाएंगे तो दुनिया की प्रतिस्पर्धा में कैसे खड़े होंगे।’ वे और उनके जैसे कश्मीर के कई अन्य विद्यार्थियों के पास घाटी को छोड़ कर जम्मू के किसी स्कूल में जाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है क्योंकि यहां अशांति के कारण बीते सौ दिनों से शैक्षणिक संस्थान बंद हैं।गुलजार ने भी यहीं के एक स्कूल में प्रवेश लिया है। वे शाह फजल के पदचिह्नों पर चलना चाहती हैं। कश्मीर घाटी के फजल ने 2009-10 की सिविल सेवाओं में टॉप किया था। वे कहती हैं, ‘स्कूलों को जबरदस्ती बंद कर दिया जाएगा तो आप आइएएस या डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन सकते है। हमने कुछ दिन तक स्कूल खुलने का इंतजार किया लेकिन महीने गुजरते गए और आखिरकार अभिभावकों ने मुझे जम्मू के स्कूल में प्रवेश दिलवा दिया ताकि मैं पढ़ाई जारी रख सकूं।’खुर्शीद बताते हैं कि उनके कई दोस्त ऐसे हैं जो पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं लेकिन आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं हैं कि घाटी से बाहर कहीं दाखिला ले सकें।

गुलजार समेत कश्मीर के 30 अन्य विद्यार्थियों ने जम्मू के सुनजवान क्षेत्र में सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में नियमित प्रवेश ले लिया है। यहां उनके लिए विशेष कक्षाएं लगाई जा रही हैं। उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य प्रेम सिंह ने बताया, ‘अब तक कश्मीर के 30 विद्यार्थियों ने हमारे स्कूल में नियमित प्रवेश लिया हैै। यह संख्या दिन पर दिन बढ़ रही है।’

उन्होंने बताया कि उनके पास हर रोज कश्मीर से फोन कॉल आते हैं जो ऐसे अभिभावकों के होते हैं जो अपने बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलवाना चाहते हैं। खुर्शीद ने कहा, ‘विरोध प्रदर्शनों से विद्यार्थियों की पढ़ाई-लिखाई को दूर रखना चाहिए। इसका खमियाजा हम क्यों उठाएं।’ वैसे भी सरकार घाटी में दसवीं और बारहवीं की सालाना परीक्षाओं को नहीं टाल रही है जिस वजह से कश्मीर के विद्यार्थी बहुत परेशान हैं। राज्य के शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने कहा है कि परीक्षाओं को टालने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने बताया, ‘मेरे पास अनगिनत कॉल आ रहे हैं। कॉल करने वाले विद्यार्थी और अभिभावक चाहते हैं कि परीक्षाएं तय समय पर ही ली जाएं। सरकार का भी यही फैसला है।’ जम्मू के निजी स्कूलों में बीते तीन महीने से कश्मीर घाटी के बड़ी संख्या में छात्र प्रवेश ले रहे हैं।

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