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बसपा संस्थापक कांशीराम का नाम लेकर उत्तर प्रदेश में सत्ता चाहती है बीजेपी, उनकी मौत की CBI जांच की मांग की

उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक 24 फीसदी है जिस पर मायावती का कब्जा है। लिहाजा, बीजेपी चाहती है कि कांशीराम के मुद्दे को उठाकर दलित वोट बैंक में सेंध लगाया जाए क्योंकि वो समाजवादी पार्टी मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा पाने में नाकाम साबित हो रही है।
Author October 13, 2016 18:48 pm
कांशीराम के साथ मायावती की मूर्ति (एक्सप्रेस फोटो)

उत्तर प्रदेश में चुनावी मौसम आ चुका है। सभी राजनीतिक पार्टियां सत्ता पाने के लिए जबरदस्त कोशिशें कर रही हैं। बीजेपी भी इसी दिशा में हाथ-पैर मारते हुए बसपा संस्थापक कांशीराम को याद कर रही है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि कांशीराम की संदिग्ध मौत की जांच होनी चाहिए। बीजेपी ने अखिलेश यादव सरकार से कांशीराम की मौत की जांच की मांग की है। उन्होने कहा कि अगर अखिलेश यादव ने जांच नहीं कराई तब बीजेपी के सत्ता में आने पर मामले की सीबीआई से जांच कराई जाएगी। दरअसल, बीजेपी ऐसा कर मायावती के वोट बैंक पर चोट करना चाहती है। अभी हाल ही में मायावती ने कांशीराम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया था और पीएम मोदी पर जमकर हमला बोला था। माया ने पीएम मोदी को झूठा करार देते हुए कहा था कि उन्होंने जितने भी वादे किए थे उनमें से एक भी पूरा नहीं हुआ, जबकि उनकी सरकार के ढाई साल हो चुके हैं। मायावती ने सर्जिकल स्ट्राइक का भी राजनीतिकरण करने के लिए पीएम मोदी की आलोचना की थी।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया है कि बीएसपी के कई नेताओं और कांशीराम के परिवार के लोगों ने उन्हें खत लिखकर इस बात की आशंका जताई है कि कांशीराम की मौत स्वभाविक नहीं हुई है बल्कि उनकी हत्या की गई है। गौरतलब है कि कांशीराम की मौत 9 अक्टूबर, 2006 को नई दिल्ली में हुई थी। उन्हें डायबिटीज, हाइपरटेंशन और स्ट्रोक समेत कई बीमारियां थीं। इस वजह से करीब दो साल तक वो बेड पर पड़े थे।

वीडियो देखिए: सर्वे में मायावती पहली पसंद

गौरतलब है कि कांशीराम की बहन स्वर्ण कौर ने भी मायावती पर अपने भाई की हत्या का आरोप लगाया है। कांशीराम की बहन स्वर्ण कौर ने कहा है कि मायावती ने उनके भाई को तड़पाकर मारा है। उनका कहना है वो ऐसे नहीं मरा, तीन साल बीमार रहा, एक साल पहले मायावती ने मेरे भाई की जुबान बंद कर दी। मायावती हमें जवाब दे कि क्यों एक साल मेरे भाई की जुबान बंद कर दी। कांशीराम की बहन इस मामले में मायावती से जवाब चाहती हैं।

दरअसल, उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक 24 फीसदी है जिस पर मायावती का कब्जा है। लिहाजा, बीजेपी चाहती है कि कांशीराम के मुद्दे को उठाकर दलित वोट बैंक में सेंध लगाया जाए क्योंकि वो समाजवादी पार्टी मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा पाने में नाकाम साबित हो रही है। ऐसे में बीजेपी बीएसपी से निकले नेताओं को साथ कर और दलिता-पिछड़ों की आवाज बनकर लखनऊ का चुनावी जंग जीतना चाहती है।

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