April 30, 2017

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पश्चिम बंगाल में 14 नाबालिग बच्चों ने बाल तस्करी के 30 मामलों को सुलझाया, ममता बनर्जी सरकार ने सम्मानित किया

तनुजा और उसके दोस्तों को बच्चों के तस्करों के खिलाफ लड़ने के लिए राज्य सरकार की तरफ से पुरस्कार दिया जा चुका है।

Author कोलकाता | February 27, 2017 16:48 pm
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ़ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

वेस्ट बंगाल में नाबालिग बच्चों के एक ग्रुप ने चाइल्ड ट्रैफिकिंग के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है। मौली गांव की रहने वाली 17 साल की तनुजा खातून 14 बच्चों के इस ग्रुप का नेतृत्व कर रही है। तनुजा ने कहा कि हम किसी से नहीं डरते हैं। तनुजा और उसके दोस्तों को बच्चों के तस्करों के खिलाफ लड़ने के लिए राज्य सरकार की तरफ से पुरस्कार दिया जा चुका है। तनुजा ने बताया कि हाल ही में हमें एक व्यक्ति मिला जिसपर हमें शक था कि वह चाइल्ड ट्रैफिकर हो सकता है। हमने उससे सवाल किए तो वह हमारे सवालों का जवाब नहीं दे पाया। इसके बाद मैंने उससे कहा कि मैं उसके पैर को तोड़कर उसे कांटेदार झाड़ियों के ऊपर लटकाकर उसपर लाल चीटियां छोड़ दूंगी। यह सुनते ही वह आदमी वहां से भाग गया और फिर कभी गांव में नजर नहीं आया।

सरकार द्वारा मिले अपने पुरस्कार को दिखाते हुए तनुजा ने कहा कि उसने और उसकी टीम ने गांव में करीब 30 ऐसे मामलों को सुलझाया है। तस्करों से लड़ने के लिए इन बच्चों के ग्रुप को सरकार द्वारा एक एनजीओ सेव द चिल्ड्रेन तैयार किया है। यह ग्रुप वेस्ट बंगाल सरकार के चाइल्ड प्रोटेक्शन स्कीम से भी जुड़ा हुआ है। वहीं दक्षिण 24 परगना के 35 गांवों को चाइल्ड लेबर जैसी समस्या से मुक्त किया जा चुका है।

वेस्ट बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में बच्चों की तस्करी करने वाला गिरोह काफी सक्रिय है। यह गिरोह ऐसे परिवार पर नजर रखता जो कि बहुत गरीब होता और जिसके घर में लड़की होती है। इसके बाद वे शादी का रिश्ता लेकर लड़की के घर जाते हैं और उसके परिवार को पैसे का लालच देकर शादी कराने को कहते हैं। शादी के कुछ महीने बाद लड़की के परिवार को पैसा मिलना बंद हो जाता। जब लड़की के परिवार वाले शादी के दौरान दिए हुए लड़के के पते पर जाते हैं तो वह फर्जी निकलता है।

लड़कियों के अलावा वे लड़कों के लिए भी उनके परिवार को पैसों का लालच देकर उन्हें खरीदते जिसका भुगतान वे एडवांस सैलरी के रूप में करते हैं। यह गिरोह लड़कियों को खरीदने के बाद उन्हें या तो देहव्यापार में डाल देता या अलग-अलग राज्य में उन्हें किसी के घर में घरेलु काम पर लगा देता है। आपको बता दें कि पिछले साल बंगाल की रहने वाली 15 साल की रूपा धारा के परिवार को पैसे देकर उसकी दिल्ली के रहने वाले एक व्यक्ति से शादी करा दी गई थी जहां पर उसको 6 महीने तक बंधक बनाकर रखा गया था। बता दें कि असम और वेस्ट बंगाल में सबसे ज्यादा मानव तस्करी के मामले सामने आते हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की 2015 की रिपोर्ट के अनुसार 1,255 वेस्ट बंगाल से मानव तस्करी के मामले सामने आए थे।

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First Published on February 27, 2017 4:39 pm

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