June 24, 2017

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बहन के कंकाल के साथ 6 महीने तक रहने वाले पार्थ ने क्यों नहीं किया था उसका अंतिम संस्कार, जानिए पूरी कहानी

इस मामले का खुलासा 11 जून 2015 को उस वक्त हुआ था, जब रॉबिनसन लेन के एक फ्लैट से धुआं उठता नजर आया था।

इसी घर में पार्थ अपनी बहन के शव के साथ 6 महीने से रह रहा था।

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में बहन के शव के साथ रहने वाले शख्स की यहां मंगलवार (21 फरवरी) को मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, वातगुंगे स्ट्रीट पर पार्थ डे को जली हुई अवस्था में शौचालय में मृत पाया गया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल दहला देने वाला यह मामला था क्या। आइए आपको बताते हैं। इस मामले का खुलासा 11 जून 2015 को हुआ था। कोलकाता की रॉबिनसन लेन में सुबह एक फ्लैट से धुआं उठता दिखाई दिया। जब पुलिस पहुंची तो उसे फ्लैट में जला हुआ शव, एक कंकाल, हड्डियों भरा बैग और मानसिक तौर पर बीमार शख्स पार्थ मिला था। शायद ही किसी ने सोचा हो कि कोलकाता जैसे दोस्ताना शहर में एेसी घटना भी हो सकती है।

दिसंबर 2014 से ही पार्थ (44) और उसके पिता अराबिंदा डे (77) पार्थ की मरी हुई बहन देवयानी और दो कुत्तों के शव के साथ एक फ्लैट में 6 महीने से ज्यादा समय से रह रहे थे। अरबिदों ने 10 जून 2015 को खुद को आग लगा ली थी। शुरुआती जानकारी में पता चला था कि बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद था। पूछताछ में यह पता चला था कि पार्थ डे एक इंजीनियर था और 7 वर्ष पहले ही उसने टीसीएस से नौकरी छोड़ी थी। उसकी बहन देवयानी (50) एक स्कूल में बतौर म्यूजिक टीचर काम करती थी। लेकिन अगस्त 2014 में कु्त्तों के मरने के बाद वह डिप्रेशन में चली गई और खाना-पीना छोड़ दिया। इसके चार महीने बाद देवयानी की मौत हो गई।

एक पुलिस अफसर ने पार्थ के हवाले से बताया था कि वह कुत्तों और अपनी बहन को बहुत प्यार करता था और इसलिए उनका अंतिम संस्कार नहीं करना चाहता था। उसने अपने बेडरूम में ही देवयानी और कुत्तों की शवों को रखा हुआ था। उसे एक बीमारी भी थी, जिसमें उसे लगता था कि देवयानी की आत्मा रात में खाने के वक्त उससे मिलने आती है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी थी कि अराबिंदो ने खुदकुशी क्यों की थी।

सामने आई थीं कई थ्योरीज: पुलिस ने जब देवयानी के कंकाल बरामद किए थे तो वह पूरी तरह कपड़ों के ढकी हुई थी। काफी सारा खाना उसके आसपास पड़ा था। पुलिस को पार्थ डी डायरी भी मिली थी, जिसमें ठीक तरह से लालन-पालन न होने की बात लिखी थी। पुलिस ने यह भी कहा था कि यह मामला इंसानों द्वारा मांस खाए जाने के एेंगल की तरफ भी मुड़ सकता है। पुलिस अफसरों ने बताया था कि अगर यह थियोरी सही साबित होती है तो यह भी पता चल जाएगा कि आखिरी किसी बाहरी व्यक्ति को कुत्तों और पार्थ की बहन के शव की बदबू क्यों नहीं आई। पुलिस जानना चाहती है कि पार्थ और देवयानी ने मरे हुए कुत्तों की गंध बर्दाश्त कैसे की और बाद में पार्थ अपनी बहन की लाश की गंध कैसे सहता रहा। जांचकर्ता यह भी जानने में लगे थे कि देवयानी के कंकाल पर मांस और खाल क्यों नहीं थे। फॉरेंसिक दवाइयों के एक्सपर्ट्स की मदद लेने के बाद पता चला कि मौत के बाद शरीर से मांस का पूरी तरह गायब हो जाना संभव नहीं है। मौत के बाद शरीर कई चरणों से गुजरता है, लेकिन देवयानी के मामले में ऐसा नहीं हुआ।

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First Published on February 21, 2017 4:38 pm

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