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एमफिल, पीएचडी करके भी नहीं मिली नौकरी तो डोम बनने को भरा अप्लीकेशन

लैब अटेंडेंट्स की डी श्रेणी के कर्मचारियों को अस्पताल में शवों को संभालने-ट्रांस्पोर्ट करने का काम करना होता है। इस काम के लिए कई पीएचडी धारकों ने भी आवेदन किया है।
प्रतीकात्मक फोटो (Dreamstime)

पश्चिम बंगाल में एमफिल और पीएचडी होल्डर्स ने जिस नौकरी के लिए आवेदन किया है उसके बारे में जानकर आप दंग रह जाएंगे। मालदा मेडिकल कॉलेज को 300 से ज्यादा आवेदन लैब अटेंडेंट्स की डी श्रेणी के नौकरी के लिए मिले हैं। लैब अटेंडेंट्स की डी श्रेणी में वह कर्मचारी आते हैं जिन्हें अस्पताल में शवों को संभालने और ट्रांस्पोर्ट करने का काम करना होता है। अस्पताल प्रशासन भी इस बात से हैरान है कि उच्च शिक्षित लोगों को अपनी योग्यता से कम के काम के लिए आवेदन करना पड़ रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक हर आवेदनकर्ताओं में से हर चौथा आवेदनकर्ता या तो पीएचडी या फिर एमफिल की पढ़ाई कर रहा था। वहीं कई आवेदनकर्ताओं में से कुछ तो डबल एमए और लगभग हर तीसरा आवेदनकर्ता एक ग्रेजुएट है।

खबर के मुताबिक डी श्रेणी के लिए 7 जुलाई को अस्पताल प्रशासन ने आवेदनों की जांच शुरू की थी। अस्पताल प्रशासन भी “डोम” पोस्ट के लिए मिले आवेदनों को देखकर हैरान रह गया। बता दें डोम की नौकरी के लिए न्यूनतम क्वालिफिकेशन 8वीं पास तय की गई है। खबर के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल ने कहा, “यह बेहद शर्मनाक बात है कि उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद भी लोगों को योग्यता से छोटे कामों के लिए आवेदन करना पड़ रहा। हम लोग इन्हें मनाने की कोशिश करेंगे ताकी यह अपने आवेदन वापिस ले लें।”

गौरतलब है भारत में उच्च शिक्षित लोगों द्वारा अपनी योग्यता से कम की नौकरी के लिए आवेदन करने का यह पहला मामला नहीं है। साल 2015 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा सचिवालय में चपरासी के महज 368 पदों के लिए लगभग 23 लाख आवेदन हुए थे। यह 23 लाख आवेदनकर्ता पीएचडी धारक थे। साथ ही जनवरी 2016 में यूपी के ही अमरोहा जिले में रेलवे में सफाईकर्मी के 114 पदों के लिए, लगभग 17 हजार एमबीए, बीटेक और बीएससी डिग्री धारकों ने आवेदन किया था।

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