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बशीरहाट दंगा: तृणमूल विधायक पर आग को हवा देने का आरोप, भीड़ ने बोला घर पर हमला, पार्टी ने दिया इलाका छोड़ने का हुक्म

वरिष्ठ तृणमूल नेता ने कहा कि पहली बार विधायक बने दिपेंदू बिसवास के हस्तक्षेप के कारण पार्टी नाराज है।
लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़कों को जाम कर दिया। (Source: Express photo)

पश्चिम बंगाल के बशीरहाट में एक आपत्तिजनक पोस्ट के बाद भड़की हिंसा खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही। ग्रामीण इलाकों से फैलकर अब यह हिंसा शहर तक पहुंच गई। प. बंगाल की ममता सरकार का मानना है कि दो समुदायों के अलग-अलग संगठन आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। द टेलिग्राफ के मुताबिक, गुरुवार को बशीरहाट शहर में उस समय हिंसा भड़की जब तृणमूल विधायक दिपेंदू बिसवास के कथित हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया। हालांकि विधायक ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया।

दरअसल एक दिन पहले ही बार्सीलोना से लौटे बशीरहाट दक्षिण से विधायक और पूर्व फुटबॉलर बिसवास स्थानीय पुलिस स्टेशन गए थे। इसके बाद खापरा, धोपापारा और गोदवोंपाड़ा इलाकों में पुलिस ने रेड मारी। पुलिस ने इन छापेमारी में 15 लोगों को गिरफ्तार किया और सभी लोग एक ही समुदाय से थे। सूत्रों के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों ने पिछले कुछ दिनों में हिंसा भड़काने का काम किया था। पुलिस की कार्रवाई के बाद जिस समुदाय के लोगों को हिरासत में लिया गया, उसके कुछ लोग भड़क गए।

सकड़ों लोगों ने इसके बाद पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जो आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा में बदल गई। सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल नेतृत्व पर सवाल खड़े होने के बाद बिसवास को इलाका छोड़ने के आदेश दिए गए हैं। कुछ समय बाद ही, दो पार्टी दफ्तरों में तोड़फोड़ की गई और बिसवास के घर पर भी भीड़ ने हमला किया। वरिष्ठ तृणमूल नेता ने कहा कि पहली बार विधायक बने दिपेंदू बिसवास के हस्तक्षेप के कारण पार्टी नाराज है।

बता दें कि सोमवार (तीन जुलाई) को बशीरहाट में तब हिंसा भड़क उठी जब कथित तौर पर एक नाबालिग लड़के ने फेसबुक पर एक आपत्तिजनक पोस्ट डाल दी। हालांकि पुलिस हिरासत में ले लिए गए किशोर ने विवादित पोस्ट डालने से इनकार किया है। उसका कहना है कि उसका फोन चोरी हो गया था। बंगाल हिंसा में अब तक एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है।

देखिए दंगे की आग में जल रहे पश्चिम बंगाल के बशीरहाट की तस्वीरें

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