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बांगाल: राकेश सिन्हा पर सौहार्द बिगाड़ने का मामला दर्ज, नुपूर शर्मा समेत BJP के चार नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी

इस कार्रवाई से भड़के सिन्हा ने कहा है कि यह कदम राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलना चाहती हैं।
Author नई दिल्ली | July 18, 2017 03:29 am
संघ विचारक राकेश सिन्हा।

 

कोलकाता पुलिस ने संघ विचारक राकेश सिन्हा समेत भाजपा के चार नेताओं के खिलाफ सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश के आरोप में एफआइआर दर्ज की है। कोलकाता पुलिस में संयुक्त पुलिस कमिश्नर विशाल गर्ग ने इस बात की पुष्टि की कि दिल्ली भाजपा प्रवक्ता नुपूर शर्मा के खिलाफ गरियाहट और शेक्सपीयर सरणी थानों में एफआइआर दर्ज है जिनमें से एक में राकेश सिन्हा को सहआरोपी बनाया गया है। राकेश सिन्हा के खिलाफ सोशल मीडिया के माध्यम से सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली तस्वीरें साझा करने का आरोप है। इस कार्रवाई से भड़के सिन्हा ने कहा है कि यह कदम राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलना चाहती हैं। ममता बनर्जी को ‘अधिनायकवादी’ करार देते हुए सिन्हा ने कहा कि वह अंतिम सांस तक उनके ‘दमनकारी शासन’ के खिलाफ लड़ते रहेंगे।

राकेश सिन्हा के वकील ब्रजेश झा ने दावा किया कि पुलिस ने एफआइआर, कैमक स्ट्रीट पर दुकान चलाने वाले एक शख्स मनोज कुमार सिंह की 9 जुलाई की शिकायत पर दर्ज किया है और भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए1(अ)(ब)/ 505 (1)(ब)/ 295 ए के तहत मामला बनाया है। झा द्वारा साझा की गई मनोज सिंह की शिकायत की प्रति के मुताबिक, ‘राकेश सिन्हा ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें डाली हैं जिससे सांप्रदायिक सौहार्द को चोट पहुंच सकती है और बंगाल में किसी क्षण, किसी जगह दंगा फैल सकता है। मुझे डर है कि ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया पर इस तरह की भड़काऊ गतिविधियां जारी रहीं तो मैं, मेरा पूरा परिवार और जनता प्रभावित हो सकती है’।शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में नुपूर शर्मा और राकेश सिन्हा के अलावा मैसूर के भाजपा सांसद प्रताप सिन्हा, तेलंगाना के घोसामल विधायक राजा सिंह का भी नाम दिया है। नुपूर शर्मा के खिलाफ शिकायतकर्ता ने लिखा है कि 8 जुलाई 2017 को नुपूर शर्मा ने 2002 गुजरात दंगों की एक तस्वीर को बंगाल के बशीरहाट का दंगा बताते हुए ट्वीट किया। यह तस्वीर बीबीसी द्वारा 28 फरवरी 2002 में प्रकाशित की गई थी। जनसत्ता से बातचीत करते हुए संघ विचारक राकेश सिन्हा ने कहा, ‘ममता बनर्जी की एक मंशा है कि मैं दिल्ली की मीडिया में या अकादमिक क्षेत्र में पश्चिम बंगाल में हो रहे हिंसा और सांप्रदायिकता की राजनीति पर उनके खिलाफ बोलना बंद कर दूं। उनकी दूसरी मंशा है संघ पर प्रहार करना, वास्तव में वह भाजपा से हटकर संघ पर प्रहार करना चाहती हैं इसलिए चुन-चुन कर ऐसे लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा रहा है’। एक ट्वीट के जरिए उन्होंने कहा, ‘मैं ममता बनर्जी की दमनकारी शासन के खिलाफ अंतिम सांस तक लड़ता रहूंगा, महान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जमीन मुझे बलिदान की प्रेरणा देती है’।

पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए राकेश सिन्हा ने कहा, ‘शिकायतकर्ता द्वारा उनके खिलाफ की गई शिकायत के पक्ष में कोई प्रमाण नहीं दिया गया है। सोशल मीडिया के किसी पोस्ट को एफआइआर की प्रति में संलग्न नहीं किया गया है’। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वह न तो पश्चिम बंगाल गए और नहीं ऐसा पोस्ट डाला जिसपर कार्रवाई हो। बकौल सिन्हा, ‘मैंने अपने ट्विटर और फेसबुक पर जो फोटो डाला है, वो 9 जुलाई को उज्जैन में मां के साथ मंदिर में पूजा करते हुए फोटो है, एक और फोटो संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी की पुस्तक विमोचन का है। अगर महाकालेश्वर मंदिर में मां के साथ पूजा की तस्वीर से सांप्रदायिक हिंसा और सांप्रदायिक विभाजन बढ़ता है तो इसका जवाब तो सीधे-सीधे ममता बनर्जी ही दे सकती हैं, यह वास्तव में हिंदू विरोध की राजनीति है और वह पंथ निरपेक्षता को समाप्त कर चुकी हैं। ममता बनर्जी बंगाल या बंगाल के बाहर उन सभी आवाजों को कुचलना चाहती हैं जो उनकी नीतियों के खिलाफ उठती हैं, वह पूरी तरह से अधिनायकवादी शासन में लीन हैं, दंगा भड़काने वालों को संरक्षण दे रही हैं और राष्ट्रवादी ताकतों को कुचलना चाहती हैं, लेकिन उन्हें मालूम हो हम उनकी इस मानसिकता को ही कुचल देना चाहते हैं’। संघ विचारक राकेश सिन्हा माक्रोब्लोगिंग साइट के जरिए इस एफआइआर के संदर्भ में ममता बनर्जी के खिलाफ लगातार ट्वीट कर कहा है कि वह ममता बनर्जी के दमनकारी मानसिकता को कुचल कर रहेंगे।

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First Published on July 18, 2017 3:29 am

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