June 28, 2017

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बंगाल में तेज हुई राम और रहीम के नाम पर राजनीति

अबकी रामनवमी के मौके पर संघ परिवार की ओर से राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगभग दो सौ रैलियां हुईं। इनमें चाकू, तलवार और दूसरे धारदार हथियारों समेत स्कूल बच्चे भी शामिल थे।

Author कोलकाता | April 11, 2017 04:09 am
ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी।

प्रभाकर मणि तिवारी

कभी अपनी धर्मनिरपेक्षता के लिए मशहूर रहे पश्चिम बंगाल में अब राम और रहीम के नाम पर राजनीति तेज होने लगी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तो पहले से ही मुसलिम तुष्टिकरण की नीति पर चलने के आरोप लगते रहे हैं लेकिन अब खासकर अगले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा और संघ परिवार ने राम के नाम पर रामनवमी से यहां अपने पांव जमाने की जो कवायद शुरू की है। इससे टकराव तेज होने लगा है।  रामनवमी के जुलूस के मुद्दे पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के खिलाफ खड़गपुर में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। वैसे, सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा में कभी शारदा, कभी नारदा तो कभी एक-दूसरे के खिलाफ पुलिसिया शिकायत की वजह से तकरार चलती ही रहती थी। लेकिन राज्य में पहली बार बड़े पैमाने पर रामनवमी के आयोजन ने तृणमूल कांग्रेस नेताओं के कान खड़े कर दिए हैं। वामपंथी दलों ने भी इस मामले में कूद कर झगड़े को तिकोना बना दिया है। गौरतलब है कि अबकी रामनवमी के मौके पर संघ परिवार की ओर से राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगभग दो सौ रैलियां हुईं। इनमें चाकू, तलवार और दूसरे धारदार हथियारों समेत स्कूल बच्चे भी शामिल थे।

हाल की घटनाओं से तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के एक-दूसरे पर हमले तीखे हो गए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि भाजपा धर्म और राजनीति का घालमेल कर राज्य में सांप्रदायिक तनाव फैलाने का प्रयास कर रही है। वे कहती हैं कि अगर आम लोग बगैर मंजूरी के हथियार लेकर जुलूस निकालेंगे तो कानून इसकी मंजूरी नहीं देगा। तृणमूल कांग्रेस भेदभाव की राजनीति नहीं करती और उसकी सरकार बंगाल में एक भी सांप्रदायिक दंगा बर्दाश्त नहीं करेगी। ममता का कहना है कि बंगाल में राम व रहीम पर राजनीति नहीं की जा सकती। उनका कहना है कि कानून की निगाह में सब समान हैं। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख कहती हैं कि भगवान राम ने मां दुर्गा की पूजा फूलों से की थी, तलवार से नहीं। राम ने रावण को मारने के लिए दंगा नहीं फैलाया। दूसरी ओर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का कहना है कि राज्य सरकार ने बदले की राजनीति के तहत इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्होंने सवाल किया कि मुहर्रम के मौके पर जब खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन किया जाता है तो सरकार क्या करती है? घोष ने यहां पत्रकारों से कहा कि सरकार जितने चाहे मामले दर्ज करा दे, मुझे जुलूस में शामिल होने का कोई अफसोस नहीं है। उनका सवाल है कि जब मुहर्रम के जुलूसों के दौरान खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन किया गया था तो पुलिस व प्रशासन क्या कर रहे थे? उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस को वोट बैंक गड़बड़ होने के अंदेशे से ही प्रशासन ने तब कोई कार्रवाई नहीं की थी।माकपा के राज्य सचिव व पार्टी पोलित ब्यूरो के सदस्य सूर्यकांत मिश्र ने रामनवमी पर राज्य में ऐसी रैलियों के आयोजन को ह्यबेहद खतरनाकह्ण करार दिया है। उन्होंने ममता बनर्जी की सरकार से इस स्थिति का मुकाबला करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की अपील की है। सूर्यकांत का कहना है कि राज्य में लंबे समय से रामनवमी मनाई जाती रही है लेकिन ऐसी रैलियों की अनुमति नहीं दी जा सकती।

 

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First Published on April 11, 2017 4:09 am

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