December 05, 2016

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भाजपा-संघ के ख़िलाफ़ धर्मनिरपेक्ष ताकतों को साथ लाना चाहती है तृणमूल

सांप्रदायिक राजनीतिक के खिलाफ अपील के अलावा पुस्तिका में तृणमूल सरकार की उपलब्धियों, इसकी नीतियों तथा सिंगूर भूमि अधिग्रहण की तफसील होगी।

Author कोलकाता | November 1, 2016 14:31 pm
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। (PTI File Photo)

राष्ट्रीय राजनीति में 2019 के बाद बड़ी भूमिका निभाने की कोशिश के तहत तृणमूल कांग्रेस चाहती है कि भाजपा और आरएसएस की ‘विभाजनकारी राजनीति’ के खिलाफ धर्मनिरपेक्ष दल एकजुट हों। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कुछ दिन पहले अपनी पार्टी के नेताओं से एक पुस्तिका तैयार करने को कहा था, जिसमें समूचे देश में सांप्रदायिक राजनीति की बुराइयों और भाजपा तथा आरएसएस के उभार के खतरे को रेखांकित किया जाए। तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘हम समूचे देश में धर्मनिरपेक्ष दलों और पार्टियों को एक करना चाहते हैं। तृणमूल धर्मनिरपेक्ष ताकतों को साथ लाने के लिए एक अहम भूमिका अदा करेगी और गोंद की तरह काम करेगी।’ नेता ने कहा कि पुस्तिका का मसौदा तैयार कर लिया गया है और शीर्ष नेतृत्व से इसे मंजूरी मिलने का इंतजार है।

सांप्रदायिक राजनीतिक के खिलाफ अपील के अलावा पुस्तिका में तृणमूल सरकार की उपलब्धियों, इसकी नीतियों तथा सिंगूर भूमि अधिग्रहण की तफसील होगी। ममता ने राज्य में भगवा ब्रिगेड के उभार के खिलाफ तीन सूत्री कार्यक्रम तैयार किया है। पुस्तिका इसी तीन सूत्री कार्यक्रम का हिस्सा है जिसके तहत इन ताकतों को रोकने का कार्यक्रम है। साथ ही राज्य भर में तीन से 11 नवंबर के बीच छोटी रैलियां और नुक्कड़ सभाएं की जाएंगी, जहां राज्य पर सांप्रदायिकता और भाजपा-आरएसएस के तथाकथित आसन्न खतरे के बारे में बताया जाएगा। इस पुस्तिका में आगामी संसद सत्र में भाजपा के खिलाफ तृणमूल के आक्रमक रूख के बारे में भी बताया जाएगा।

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First Published on November 1, 2016 2:06 pm

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