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सिंगुर भूमि अधिग्रहण को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द, ममता बोली- अब चैन से मर सकती हूं

सिंगुर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मील का पत्थर करार देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को कहा कि अब किसानों की जमीन लौटाने के बाद वे चैन से मर सकती हैं।
Author नई दिल्ली | August 31, 2016 22:44 pm
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। (Photo Source: PTI/File)

दूरगामी नतीजे वाले एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सिंगुर में 2006 में टाटा मोटर्स के नैनो कार उत्पादन संयंत्र स्थापित करने के लिए 997.11 एकड़ जमीन के विवादास्पद अधिग्रहण को निरस्त कर दिया। अधिग्रहण के समय राज्य में माकपा की सरकार थी। यह फैसला आॅटो कंपनी के लिए बड़े झटके के तौर पर आया। यह फैसला न्यायमूर्ति वी गोपाल गौड़ा और न्यायमूर्ति अरुण मिश्र के पीठ ने सुनाया। पीठ ने बुद्धदेव भट्टाचार्य नीत वाम मोर्चा सरकार द्वारा की गई भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में खामियां बताते हुए इसे रद्द कर दिया। फैसले पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुशी जताई है, वहीं टाटा मोटर्स ने कहा है कि वह फैसले का अध्ययन करेगी।  इस फैसले ने तृणमूल सरकार, जो 2011 में पहली बार सत्ता में आई थी, के राजनैतिक घोषणापत्र पर मुहर लगा दी कि भूमि किसानों को लौटा दी जानी चाहिए। दोनों न्यायाधीश अधिग्रहण प्रक्रिया को निरस्त करने और भूस्वामियों और किसानों को 10 साल तक अपनी जमीन के इस्तेमाल से वंचित किए जाने को लेकर दिए गए मुआवजे को बरकरार रखने को लेकर सर्वसम्मत थे। निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए उन्होंने अपना अलग-अलग कारण दिया। उन्होंने सहमति जताई कि भूमि सर्वेक्षण, पहचान और अन्य औपचारिकताएं 10 सप्ताह के भीतर पूरी किए जाने के बाद भूस्वामियों और किसानों को 12 सप्ताह में भूमि लौटा दी जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार भूमि खोने वालों को दिए गए मुआवजे की राशि वापस नहीं मांग सकती क्योंकि उसने 10 साल तक अधिग्रहण की गई जमीन पर अधिकार का इस्तेमाल किया। दोनों न्यायाधीशों के बीच दो बिंदुओं पर असहमति थी। न्यायमूर्ति गौड़ा ने कहा कि टाटा मोटर्स द्वारा सार्वजनिक मकसद के लिए सीधे तौर पर भूमि का अधिग्रहण नहीं किया गया था जबकि न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि सार्वजनिक उद्देश्य के लिए जमीन के अधिग्रहण में कुछ भी अवैधता नहीं थी क्योंकि इससे बंगाल में हजारों लोगों को रोजगार मिलता।
दोनों न्यायाधीशों ने इस बात पर सहमति जताई कि भूस्वामियों और किसानों की आपत्तियों पर राज्य के प्राधिकारियों और उसके साधनों ने वस्तुनिष्ठ तरीके से विचार नहीं किया और राज्य मंत्रिमंडल के फैसले से प्रभावित थे। पीठ ने अधिग्रहण की प्रक्रिया और उसके बाद भूमि अधिग्रहण कलक्टर द्वारा मुआवजे की गणना में त्रुटि पाई और माना कि किसानों के दावों से सही तरीके से नहीं निपटा गया। पीठ ने कहा कि किसानों को कंपोजिट अवार्ड दिए जाने की कानून के तहत अनुमति नहीं है।

भूमि अधिग्रहण को निरस्त करने पर न्यायमूर्ति गौड़ा के साथ सहमति जताते हुए न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि हालांकि भूमि की जरूरत उस उद्देश्य के लिए नहीं थी, जिसके लिए इसका अधिग्रहण किया गया था क्योंकि परियोजना सिंगुर से साणंद स्थानांतरित कर दी गई थी। शीर्ष अदालत भूमि को मूल मालिकों को लौटाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 (सर्वोच्च न्यायालय की अंतर्निहित शक्ति) का इस्तेमाल कर सकती है।

पीठ ने कुछ किसानों और एनजीओ की अपील को मंजूर करते हुए ये निर्देश दिए और कलकत्ता हाई कोर्ट के 18 जनवरी 2008 के आदेश को निरस्त कर दिया। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ केदारनाथ यादव समेत विभिन्न किसानों और एनजीओ ने अपील दायर की थी। यह आरोप लगाया गया कि भूमि का अधिग्रहण भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के प्रासंगिक प्रावधानों और अन्य नियमों के खिलाफ था। याचिकाओं में तत्कालीन सरकार पर सर्वाधिक उपजाऊ और बहुमूल्य जमीन टाटा मोटर्स जैसे कॉरपोरेट घराने के नाम करने का आरोप लगाया गया था। दावा किया गया था कि तत्कालीन राज्य सरकार और डब्ल्यूबीआइडीसी ने राज्य में व्यापार, वाणिज्य और उद्योग का विकास सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम बंगाल औद्योगिक आधारभूत संरचना विकास निगम अधिनियम, 1974 के उद्देश्यों के अनुसार मास्टर प्लान नहीं तैयार किया। न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए अपीलों में कहा गया था कि अधिग्रहण की गई जमीन इतनी उपजाऊ थी कि उन पर साल में दो या तीन बार फसल उपजाई जा रही थी और सार्वजनिक उद्देश्यों के नाम पर अधिग्रहण करके किसानों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया।

सिंगुर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मील का पत्थर करार देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को कहा कि अब किसानों की जमीन लौटाने के बाद वे चैन से मर सकती हैं। उन्होंने कहा कि वे जमीन लौटाने के वादे के साथ सत्ता में आई थीं। लेकिन कानूनी अड़चनों के चलते यह काम अधूरा ही रह गया था। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए वे तय समय के भीतर किसानों की जमीन लौटा देंगी। इस फैसले पर अमल के लिए उन्होंने गुरुवार को एक उच्चस्तरीय बैठक भी बुलाई है। ममता ने इस मौके पर आंदोलन के दौरान जान देने वाले लोगों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सिंगुर के लोगों के लिए अदालत के इसी फैसले का सपना देखा था। अब राज्य का नाम बदलने के साथ ही फैसला किसानों के पक्ष में आ गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरा सिंगुर अब दुर्गापूजा की तर्ज पर इस जीत पर सिंगुर उत्सव मनाएगा।

ममता ने साफ किया कि नैनो परियोजना के विरोध के बावजूद यह नहीं भूलना चाहिए कि बंगाल निवेशकों के लिए एक बेहतर ठिकाना है। वह विरोध अनिच्छुक किसानों की जमीन के जबरन अधिग्रहण के खिलाफ था। मुख्यमंत्री ने सिंगुर के किसानों के मनोबल को सलाम करते हुए कहा कि तमाम अभावों और समस्याओं से जूझने के बावजूद नलोगों ने अन्याय के सामने सिर नहीं झुकाया। ममता ने कहा कि उनकी सरकार ने सत्ता में आने के बाद से ही किसानों की खेती की जमीन के जबरन अधिग्रहण नहीं करने की नीति अपना रखी है। अदालत के फैसले ने सरकार की नीति पर मुहर लगा दी है। सिंगुर में जमीन के अधिग्रहण को उन्होंने पूर्व वाममोर्चा सरकार को ऐतिहासिक आत्मघाती फैसला करार दिया।
इस मौके पर ममता ने सिंगुर आंदोलन के दौरान अपनी 26 दिन लंबी भूख हड़ताल को भी याद किया। उन्होंने आंदोलन के दौरान अपना समर्थन करने वालों का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि सिंगुर के लोगों के अलावा तृणमूल कांग्रेस ने भी इस जीत के लिए 10 साल तक इंतजार किया है। अब उत्सव का समय है।

’जजों ने निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए अपना अलग-अलग कारण दिया। उन्होंने सहमति जताई कि भूमि सर्वेक्षण, पहचान और अन्य औपचारिकताएं 10 हफ्ते के भीतर पूरी किए जाने के बाद भूस्वामियों और किसानों को तीन माह में भूमि लौटा दी जानी चाहिए।  ’जजों के बीच दो बिंदुओं पर असहमति थी। न्यायमूर्ति गौड़ा ने कहा कि टाटा मोटर्स द्वारा सार्वजनिक मकसद के लिए सीधे तौर पर भूमि का अधिग्रहण नहीं किया गया जबकि न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि सार्वजनिक उद्देश्य के लिए जमीन के अधिग्रहण में कुछ भी अवैधता नहीं थी क्योंकि बंगाल में हजारों लोगों को रोजगार मिलता। ’याचिकाओं में तत्कालीन वाममोर्चा सरकार पर सबसे उपजाऊ और बहुमूल्य जमीन टाटा मोटर्स जैसे कॉरपोरेट घराने के नाम करने का आरोप लगाया गया था।

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  1. J
    jai prakash
    Sep 1, 2016 at 8:06 am
    बंगाल का हजारो आदमी एनसीआर में मजदूरी करता हे मज़बूरी में क्यों की बहा पर मेडम कोई फैक्टरी लगाने नही देगी क्यों की इनकी राजनीती ख़त्म हो जायगी
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    सबरंग