ताज़ा खबर
 

समाजवादी चिंतक अशोक सेकसरिया का निधन

प्रखर समाजवादी चिंतक, पत्रकार और लेखक अशोक सेकसरिया का रविवार दोपहर दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित केवड़ातला श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। मुखाग्नि उनके भतीजे सौरभ सेकसरिया ने दी। राजस्थान के मारवाड़ी परिवार में जन्मे 82 साल के अशोक सेकसरिया का निधन शनिवार की रात मध्य कोलकाता के एक निजी अस्पताल में […]
Author December 1, 2014 09:51 am
प्रखर समाजवादी चिंतक, पत्रकार और लेखक अशोक सेकसरिया का निधन (फोटो: जनसत्ता)

प्रखर समाजवादी चिंतक, पत्रकार और लेखक अशोक सेकसरिया का रविवार दोपहर दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित केवड़ातला श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। मुखाग्नि उनके भतीजे सौरभ सेकसरिया ने दी। राजस्थान के मारवाड़ी परिवार में जन्मे 82 साल के अशोक सेकसरिया का निधन शनिवार की रात मध्य कोलकाता के एक निजी अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से हो गया था।

हफ्ते भर पहले घर में फिसलकर गिर जाने से उनके कमर के पास की रीढ़ की हड्डी टूट गई थी, जिसका आपरेशन होने के बाद शनिवार को अचानक दिल का दौरा पड़ा और वे चल बसे। वे अविवाहित थे। अशोक सेकसरिया गांधीवादी चिंतक व कार्यकर्ता पद्मविभूषण सीताराम सेकसरिया के बड़े पुत्र व भगीरथ कानोड़िया के भतीजे थे। सीताराम सेकसरिया व भगीरथ कानोड़िया ने ही भारतीय भाषा परिषद् की स्थापना की थी। अंत्येष्टि पर कोलकाता के साहित्य प्रेमी, लेखक, पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद थे। अशोक जी की स्मृति में ‘बैठकी’ एक दिसंबर को दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक उनके निवास 16 नंबर, लार्ड सिन्हा रोड में आयोजित की गई है।

शहर के एक निजी अस्पताल से रविवार सुबह अशोक जी का पार्थिव शरीर कोलकाता के उनके आवास पर लाया गया। वहां अलका सरावगी, कुसुम खेमानी, विद्यासागर गुप्त, संजय भारती, काजल चक्रवर्ती, यमुना केशवानी, सुरेश शॉ, रेखा शॉ, अवनेश शाह, जवाहर गोयल तो थे ही, उनके दोनों भतीजे सौरभ सेकसरिया व गौरव सेकसरिया के अलावा भांजे गौतम पोद्दार व प्रकाश पोद्दार, ममेरे भाई श्याम सुंदर सुरेका, सत्यनारायण सुरेका, उनके प्रिय व करीबी बालेश्वर राय, उनकी पत्नी सुशीला राय व दोनों पुत्र अवणींद्र व रवींद्र समेत अनेक लोग मौजूद थे। बालेश्वर राय को अशोक जी पुत्र तुल्य स्नेह व सम्मान देते थे।

अशोक सेकसरिया के मित्र व चाहने वालों में कृष्णा सोबती, अशोक वाजपेयी, प्रयाग शुक्ल, रमेशचंद्र शाह, सच्चिदानंद सिन्हा, ओम थानवी, योगेंद्र यादव, हरिवंश, प्रबोध कुमार प्रमुख हैं। हिंदी के वरिष्ठ पत्रकार दिवंगत प्रभाष जोशी, भीष्म साहनी, निर्मल वर्मा, मनोहर श्याम जोशी, किशन पटनायक, लेखिका ज्योत्सना मिलन व सुनील जब भी कोलकाता आते थे अशोक जी से मिले बगैर नहीं रह पाते थे।

समाजवादी विचारधारा को विस्तार देने व नई कहानी की यथार्थोन्मुखता को नया आयाम देने में अशोक सेकसरिया की महत्वपूर्ण भूमिका थी। एक जमाने में काफी लोकप्रिय उनका कहानी संग्रह ‘लेखकी’ वाग्देवी प्रकाशन से 2000 में प्रकाशित हुआ, जिसका पता अशोकजी को पुस्तक आने के बाद हुआ। इस प्रकाशन में वाग्देवी पब्लिकेशंस के मालिक साखलाजी व मित्रों में प्रयाग शुक्ल, गिरिधर राठी मुख्य थे। वे भगीरथ कानोड़िया के आदर्शों पर चलने वाले व्यक्ति थे जो यश की कामना से दूर रहते थे। वे कोलकाता की साहित्यिक संस्था भारतीय भाषा परिषद के अस्तित्व की लड़ाई व यहां के साधारण कर्मचारियों के पक्ष में सतत सक्रिय रहे।

एक जमाने में अशोक जी के घर पर राममनोहर लोहिया के अनुगामी जार्ज फर्नांडीस, मधु लिमये, कर्पूरी ठाकुर, किशन पटनायक आया करते थे। अशोक जी ने ‘दैनिक हिंदुस्तान’, सोशलिस्ट पार्टी की पत्रिका ‘जन’, ‘दिनमान’ व ‘सामयिक वार्ता’ में लगातार लिखा। उनकी रचनाओं का संकलन आना और मूल्यांकन होना बाकी है। अशोक जी ने ‘गुणेंद्र सिंह कंपानी’ और ‘रामफजल’ जैसे छद्म नामों से भी रचनाएं की हैं। साहित्य व सिनेमा के अलावा चित्रकला व खेलकूद की भी उन्हें गहरी समझ थी। वे नई पीढ़ी के पत्रकारों का हमेशा मार्गदर्शन करते थे। लेखिका अलका सरावगी के उपन्यास ‘कलि-कथा वाया बाईपास’ के मुख्य चरित्र अशोक सेकसरिया ही थे।

अशोक सेकसरिया के निधन पर प्रगतिशील लेखक संघ, पश्चिम बंगाल के सचिव ब्रजमोहन सिंह ने कहा कि अशोक जी हमेशा नए विकल्प की चिंताओं से युक्त साधारण जन के पक्षधर रहे।

 

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग