June 26, 2017

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बांग्लादेश को छोटी नदियों का ही पानी देंगे, तीस्ता मुद्दे पर मोदी और हसीना को ममता की दो टूक

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद के साथ अनौपचारिक बातचीत में अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं।

Author नई दिल्ली | April 10, 2017 02:04 am
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी

दीपक रस्तोगी

बांग्लादेश और भारत के बीच तीस्ता जल संधि का मुद्दा खटाई में पड़ गया है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद के साथ अनौपचारिक बातचीत में अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। वे तीस्ता नदी का पानी पड़ोसी देश के साथ बांटने को लेकर कोई बातचीत नहीं करेंगी। राष्ट्रपति भवन में दोनों नेताओं से अलग-अलग बातचीत के दौरान ममता बनर्जी ने नया प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है, ‘बांग्लादेश को पानी ही चाहिए- उसका इंतजाम हो जाएगा। उत्तर बंगाल की तीन छोटी पहाड़ी नदियों का पानी वे पड़ोसी मुल्क को दे सकती हैं। ये नदियां बांग्लादेश से गुजर कर बंगाल की खाड़ी में मिलती हैं।’ छोटी नदियों का पानी देने के साथ ही ममता बनर्जी ने बांग्लादेश को एक हजार मेगावॉट बिजली देने की भी पेशकश की है।इस बाबत प्रधानमंत्री मोदी ने ममता बनर्जी से औपचारिक प्रस्ताव केंद्र को भेजने के लिए कहा। ममता बनर्जी के निर्देश पर शनिवार की देर रात बंगाल के मुख्य सचिव ने लिखित प्रस्ताव विदेश मंत्रालय को भेज दिया है। इसकी प्रतिलिपि प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी गई है। ममता बनर्जी ने अपने प्रस्ताव में भारत और बांग्लादेश के विशेषज्ञों और राजनयिकों की कमेटी गठित करने की बात उठाई है, जो उत्तर बंगाल की पहाड़ी नदियों की जल-संपदा का अध्ययन कर उसके बेहतर इस्तेमाल के सुझाव देगी। राष्ट्रपति भवन के द्वारका सुइट में बांग्लादेशी प्रधानमंत्री को ठहराया गया है। ममता बनर्जी को शेख हसीना ने ‘अनौपचारिक और पारिवारिक बातचीत’ के लिए वहीं बुला भेजा था।

वहां ममता बनर्जी ने उन्हें कहा, ‘आपको सिंचाई के लिए पानी ही तो चाहिए। उसका इंतजाम हो जाएगा। उत्तर बंगाल की तोर्सा, मनसाई नदियों का पानी मिल जाएगा। तीस्ता में वैसे भी कम पानी है। जब उत्तर बंगाल में सिंचाई की जरूरत होती है तो पानी मुश्किल से पूरा पड़ता है। तीस्ता का पानी देना संभव नहीं है।’ दरअसल, तोर्सा, मनसाई समेत कई पहाड़ी नदियां मानसून में उफनने लगती हैं। दिसंबर तक पानी लबालब रहता है। तब बांग्लादेश में बुआई का मौसम होता है। बंगाल में दो महीने बाद बुआई शुरू होती है, तब तक इन नदियों का पानी खाड़ी में बेकार बह जाता है। शेख हसीना के साथ इस बैठक के बाद देर रात उनकी प्रधानमंत्री मोदी से टेलीफोन पर बात हुई। इस वार्ता में मोदी ने उन्हें अपना प्रस्ताव औपचारिक तौर पर भेजने को कहा। देर रात ही ममता बनर्जी ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया और विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के पास प्रस्ताव औपचारिक तौर पर पहुंच गया।तीस्ता जल का मुद्दा बांग्लादेश में राजनीतिक रूप ले चुका है। इस मुद्दे को ध्यान में रखते हुए ममता बनर्जी ने शेख हसीना को एक हजार मेगावॉट बिजली देने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने हसीना से कहा, ‘हमारे पास अतिरिक्त बिजली है। बांग्लादेश को कृषि और विकास योजनाओं के लिए बिजली चाहिए। बंगाल से हम दे सकते हैं।’ बंगाल से बांग्लादेश को पहले से ही पांच सौ मेगावॉट बिजली दी जा रही है। त्रिपुरा से 100 मेगावॉट बिजली दी जाती है। तीस्ता मुद्दे पर ममता बनर्जी के प्रस्ताव पर बर्फ गलने की स्थिति में बांग्लादेश की पद्मा नदी पर बन रहे बांध को लेकर भी अपनी आपत्ति दरकिनार करने के संकेत ममता बनर्जी ने दिए हैं। इस बांध परियोजना पर आधारित दो बड़े बिजलीघर बनाने के लिए भारत ने वित्तीय मदद की पेशकश बांग्लादेश को की है।

 

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First Published on April 10, 2017 2:04 am

  1. I
    indrajeet
    Apr 10, 2017 at 7:38 am
    mam ta banarji keval bharat virodh me agende par kaam Kane vali cm hai.vaise yah bhi congress ki b team ka hissa hai Jo bjp virodh naam par ikthhe ho hate hai
    Reply
    सबरंग