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मिशन बंगाल: मछली की आंख भेदना चाहते हैं अमित शाह

शाह ने कहा कि कोई भी हिंसा बंगाल में भाजपा का बढ़ना नहीं रोक सकती। उन्होंने मानवाधिकार संगठनों से भी तृणमूल की हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। भाजपा प्रमुख ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने पीड़ितों से मुलाकात की है।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह। (photo source Oinam Anand)

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मछली की आंख का लक्ष्य भेदना चाहते हैं। उनके लिए यह मछली की आंख है 2021 का विधानसभा चुनाव। वे भाजपा को पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज कराना चाहते हैं। इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए पार्टी अगले साल होने वाले पंचायत चुनावों और 2019 के लोकसभा चुनावों को अचूक तीरों की तरह इस्तेमाल करना चाहती है। अपने इस लक्ष्य को लेकर ही शाह महज पांच महीने के भीतर दूसरी बार बंगाल के तीन दिन के दौरे पर यहां पहुंचे हैं। यहां आते ही वे लगातार पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे हैं। शाह ने पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं को अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए तृणमूल कांग्रेस के अत्याचारों को चुपचाप सहने की बजाय उसके खिलाफ जवाबी हमले का भी मूल मंत्र दिया है। अपने तीन दिनों के दौरे में समय के अधिकतम इस्तेमाल की शाह की बेताबी को इसी बात से समझा जा सकता है कि वे सोमवार से शुरू हुए इस दौरे के लिए ही रविवार रात को ही यहां पहुंच गए। सोमवार को सुबह से ही उन्होंने तमाम नेताओं के साथ बैठक में पार्टी को मजबूत करने पर जोर देते हुए साफ कर दिया कि राज्य में सरकार बनाने की स्थिति में ही पार्टी अपने लक्ष्य में कामयाब होगी। प्रदेश भाजपा सचिव सायंतन बोस शाह के हवाले कहते हैं कि राज्य में हाल के बरसों में पार्टी का लगातार विकास हुआ है। लेकिन यहां सरकार के गठन के बाद ही वह अपनी मंजिल तक पहुंचेगी। उन्होंने तमाम नेताओं और कार्यकर्ताओं से तृणमूल कांग्रेस के अत्याचारों की शिकायत करने की बजाय उनसे उनकी यानी तृणमूल की ही भाषा में निपटने की सलाह दी। मंगलवार को शाह ने तृणमूल कांग्रेस के कथित अत्याचारों से पीड़ित भाजपाइयों व उनके परिजनों से भी मुलाकात की। उसके बाद वे इस हिंसा के लिए सत्तारूढ़ पार्टी पर जम कर बरसे।

शाह ने कहा कि कोई भी हिंसा बंगाल में भाजपा का बढ़ना नहीं रोक सकती। उन्होंने मानवाधिकार संगठनों से भी तृणमूल की हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। भाजपा प्रमुख ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने पीड़ितों से मुलाकात की है। इन लोगों को तृणमूल कांग्रेस के आदर्शों का समर्थन नहीं करने की वजह से ही पार्टी कार्यकर्ताओं का कोपभाजन बनना पड़ा। शाह ने सवाल किया कि क्या यह रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद का बंगाल है? उनका कहना था कि बंगाल में तृणमूल के अलावा दूसरी किसी राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं-समर्थकों को अभिव्यक्ति की आजादी नहीं है। शाह के मुताबिक, देश के दूसरे किसी हिस्से में ऐसी हिंसा देखने को नहीं मिलती। ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में जारी हिंसा में अब तक कई की जान गई है और कई लोग घायल हुए हैं। बावजूद इसके सरकार का इस मामले पर कोई ध्यान नहीं है। मौजूदा परिस्थिति में बंगाल में विकास नहीं हो सकता।शाह ने पार्टी के कार्यकर्ताओं से मोदी सरकार की ओर से शुरू की गई विकास परियोजनाओं को बंगाल के घर-घर तक पहुंचाने और प्रदेश नेतृत्व को तृणमूल कांग्रेस सरकार के कथित कुशासन के खिलाफ आम लोगों को साथ लेकर बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करने को कहा है।

प्रदेश नेतृत्व के साथ बैठक में उन्होंने साफ कर दिया कि अगले लोकसभा चुनावों में पार्टी राज्य की 42 में से कम से कम 21 सीटें जीतना चाहती है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनावों में बंगाल की भूमिका अहम होगी। शाह ने बीते साल नक्सलबाड़ी से शुरू विस्तारक योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए प्रदेश के नेताओं से अधिक से अधिक लोगों को पार्टी के खेमे में शामिल करने की दिशा में ठोस काम करने को कहा। तीसरे और आखिरी दिन व्यापारिक घरानों को भाजपा खेमे में खींचने के लिए वे मर्चेंट चैंबर आफ कॉमर्स की ओर से एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में भी शिरकत करेंगे।

अपने तीन दिनों के दौरे में समय के अधिकतम इस्तेमाल की शाह की बेताबी को इसी बात से समझा जा सकता है कि वे सोमवार से शुरू हुए इस दौरे के लिए ही रविवार रात को ही यहां पहुंच गए थे।  सोमवार को सुबह से ही उन्होंने तमाम नेताओं के साथ बैठक में पार्टी को मजबूत करने पर जोर देते हुए साफ कर दिया कि राज्य में सरकार बनाने की स्थिति में ही पार्टी अपने लक्ष्य में कामयाब होगी।

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