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कोलकाता: काली पूजा में 75 चीनी ‘सैनिकों’ ने की देवी की रखवाली

शियान प्रांत में दफन चीन के पहले राजा किन शी हुआंग की कब्र में टेराकोटा के बने करीब आठ हजार सैनिक, 130 रथवाले, 520 घोड़े और 150 घुड़सवार सैनिक उनके साथ दफन किए गए थे।
कोलकाता में कालजी की रक्षा में बनाए गए टेरोकोटा के चीनी सैनिक (स्क्रीनशॉट)

पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा पूरे देश में मशहूर है लेकिन यहां की काली पूजा भी कम नहीं होती। जब पूरे देश में रविवार (30 अक्टूबर) को दिवाली मनाई जा रही थी तो पश्चिम बंगाल में साथ-साथ काली पूजा भी मनाई जा रही थी। दुर्गा पूजा ही की तरह काली पूजा पर भी अलग-अलग तरह के पंडाल बनाए जाते हैं और देवी को विभिन्न स्वरूपों में दर्शाया जाता है। काली या “श्यामा” की पूजा में भी हर त्योहार की तरह चीनी लतर और पटाखे अहम भूमिका निभाते हैं लेकिन चीनी इतिहास का शायद ही इससे कोई संबंध हो। लेकिन कोलकाता के साल्ट लेक स्थित बीएल ब्लॉक में एक अनोखा काली पंडाल नजर आया। इस पंडाल में चीन के शियान प्रांत की प्रसिद्ध टेराकोटा सैनिकों की नकल पर 75 चीनी टेराकोटा सैनिक बनाए गए जो माँ काली की रक्षा कर रहे थे।

चीनी टेराकोटा वाले पंडाल में पूजा व्यवस्थापक रजत मंडल ने एनडीटीवी को बताया, “काली बुराई से रक्षा की प्रतीक हैं। शियान में जो टेराकोटा सैनिक मिले हैं वो चीन के राजा के संग दफन किए गए थे ताकि वो मृत्यु के बाद उनकी रक्षा कर सकें।”  आम तौर पर काली की मूर्तियां काली होती है लेकिन आजकल के पंडालों में उनका रंग रूप काफी अलग अलग नजर आता है।

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कुछ अन्य पंडालों में काली जी की मूर्ति सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों को समर्पित की गई है। राजरहाट में एक काली मूर्ति कन्या भ्रूण हत्या को समर्पित है। वहीं ओलंपिक मेडल जीतने पीवी सिंधू, साक्षी मलिक, दीपा करमाकर जैसी खिलाड़ियों को समर्पित मूर्तियां बनाई गई हैं। यहाँ के कई पंडालों में इंदिरा गांधी और राज्य की सीएम ममता बनर्जी की तस्वीरें भी लगाई गई हैं।

चीनी मान्यता के अनुसार शियान प्रांत में दफन चीन के पहले राजा किन शी हुआंग की कब्र में टेराकोटा के बने करीब आठ हजार सैनिक, 130 रथवाले, 520 घोड़े और 150 घुड़सवार सैनिक उनके साथ दफन किए गए थे। माना जाता है कि इन्हें 210-09 ईसा पूर्व में राजा के संग दफन किया गया था। इनकी खोज 1974 में स्थानीय किसानों ने की थी। सैनिकों के अलावा टेराकोटा के बने दूसरी मूर्तियां भी राजा के कब्र से मिली हैं। माना जाता है कि वो अन्य दरबारियों के प्रतीक के तौर पर दफन की गई हैं।

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