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बंगाल में तीसरे चरण का मतदान आज, एक लाख सुरक्षाकर्मी तैनात

तीसरे चरण में मुर्शिदाबाद, नदिया, बर्दवान जिलों और उत्तरी कोलकाता में फैली 62 सीटों के लिए 34 महिलाओं समेत 418 उम्मीदवार मैदान में हैं।
Author कोलकाता | April 20, 2016 23:29 pm
कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता एक रैली के दौरान। (पीटीआई फोटो)

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के तीसरे महत्त्वपूर्ण चरण में 62 सीटों के लिए मतदान गुरुवार (21 अप्रैल) को होगा। इसमें कोलकाता की सात विधानसभाएं शामिल हैं। तीसरे चरण में मुर्शिदाबाद, नदिया, बर्दवान जिलों और उत्तरी कोलकाता में फैली 62 सीटों के लिए 34 महिलाओं समेत 418 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनके भाग्य का फैसला 1.37 करोड़ मतदाताओं के हाथ में होगा। गुरुवार सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक 16461 मतदान केंद्रों पर मतदान होगा और कुल 1,37,13,594 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं।

मतदान से पहले कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के लिए पूरे राज्य में केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल के 75,000 जवानों सहित एक लाख सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। इस चरण में प्रमुख उम्मीदवारों में तृणमूल कांग्रेस सरकार के मंत्री शशि पांजा और साधन पांडे, भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा, पांच बार कांग्रेस के विधायक रहे मोहम्मद सोहराब, माकपा विधायक अनिसुर रहमान और सेवानिवृत्त आइपीएस अधिकारी नजरुल इस्लाम हैं।

चुनाव आयोग ने इस चरण में 3401 क्षेत्रों को संवेदनशील चिह्नित किया है। तृणमूल कांग्रेस, वाम-कांग्रेस गठबंधन और भाजपा ने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। छह साल पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए तृणमूल कांग्रेस से निकाले गए पूर्व मंत्री हुमायूं कबीर राजनगर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार हैं। कांग्रेस के प्रभाव वाले मुर्शिदाबाद जिले में पांच बार से कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री अबू हिना मैदान में हैं। लंदन में 2008 में जेपी मॉर्गन के उपाध्यक्ष पद से नौकरी छोड़ने वाले पूर्व इंवेस्टमेंट बैंकर महुआ मोइत्रा नदिया जिले की करीमपुर सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर राजनीति में किस्मत आजमा रहे हैं।

कोलकाता के उन कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव प्रचार मुहिम भले ही समाप्त हो चुकी है जहां गुरुवार को चुनाव होने हैं लेकिन इन इलाकों के आस-पास के 100 मीटर के दायरे को छोड़कर उन निकटवर्ती इलाकों में अब भी प्रचार किया जा सकता है जहां इस महीने बाद में चुनाव होने हैं। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने कहा कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव प्रचार पहले की समाप्त हो चुका है उनके निकटवर्ती इलाकों में प्रचार किया जा सकता है।अधिकारियों ने कहा, ‘हालांकि इस दौरान उन निर्वाचन क्षेत्रों के आस-पास के 100 मीटर के दायरे में चुनाव प्रचार नहीं किया जा सकता जहां प्रचार समाप्त हो चुका है।’

मतदान से पहले कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के लिए पूरे राज्य में केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल के 75,000 जवानों सहित एक लाख सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के करीब 75,000 जवानों वाली लगभग 700 कंपनियों ने अपना कार्यभार संभाल लिया है। मतदाताओं में विश्वास पैदा करने के लिए अर्द्धसैनिक बल अपने इलाके में मार्च निकाल रहे हैं।

स्थानीय भाषा या भौगोलिक स्थिति से अनभिज्ञ इन 75,000 अर्द्धसैनिक बल के जवानों की सहायता के लिए 25,000 राज्य पुलिस बल के जवानों को मुस्तैद किया गया है। सभी मतदान परिसरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय बलों के कंधों पर होगी जबकि स्थानीय भाषा को समझने वाले ‘लाठी’ से लैस राज्य पुलिस बल के जवान कतार प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे। राज्य पुलिस को मतदान केंद्र के भीतर गंभीर स्थितियों में तभी प्रवेश दिया जाएगा, जब पीठासीन अधिकारी ऐसा चाहेंगे।

इसी तरह केंद्रीय बलों की हरेक मोबाइल यूनिट की मदद के लिए राज्य पुलिस के एक जवान की भी सहयता ली जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि असम में मतदान समाप्त होने के कारण वहां तैनात सुरक्षा बलों के अब पश्चिम बंगाल आ जाने के चलते बलों की संख्या में बढ़ोतरी संभव हुई है। अर्द्धसैनिक बलों की बढ़ोतरी को देखते हुए वाहनों पर साफ शब्दों में ‘सेंट्रल फोर्सेस’ लिखा गया है। इसके अलावा उनके वाहनों में हूटर या साइरन भी लगाया गया है।

इस बीच बुढ़ापे की परेशानियों के बावजूद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मतदान करने को लेकर उत्साहित शतायु मतदाताओं के एक समूह को युवा पीढ़ी के लिए रोल माडल के तौर पर पेश किया जा रहा है ताकि युवा मतदाता मतदान के लिए आगे आएं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान दक्षिण 24 परगना के जिला अधिकारियों ने 31 विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे 1,086 मतदाताओं की पहचान की है जिनकी आयु कम से कम सौ साल है।

जिला चुनाव अधिकारी पीबी. सलीम ने बताया, ‘बुढ़ापे के बावजूद वे मतदान के लिए जाते रहे हैं, लेकिन हमने पाया कि न केवल पश्चिम बंगाल में, बल्कि पूरे देश में युवा मतदाता इस लोकतांत्रिक कवायद में हिस्सा लेने में बहुदा उदासीन रहते हैं।’

उन्होंने कहा कि उन्होंने जिले में शतायु मतदाताओं के लिए एक विशेष पहल की है। ‘वे जब मतदान करने आएंगे तो हम उन्हें बूथ के बाहर सार्वजनिक पहचान देंगे। उन्हें शॉल और फूलों के गुलदस्ते के साथ सम्मानित किया जाएगा।’
जो वयोवृद्ध मतदाता चल नहीं सकते, उन्हें व्हीलचेयर पर बूथ के भीतर पहुंचाया जाएगा। ऐसे मतदाताओं की मदद के लिए मतदान केंद्रों पर कारसेवक भी मौजूद रहेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि ऐसे मतदाता खुद से मतदान कर सकें और वह भी पूरी गोपनीयता के साथ। उनकी फोटो ली जाएगी और बाद में प्रचार सामग्री में इसका इस्तेमाल किया जाएगा।

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