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राजस्थान भाजपा की कलह संगठन से लेकर विधानसभा तक में उजागर

विधानसभा के बजट सत्र में कमजोर प्रतिपक्ष के बावजूद वसुंधरा सरकार के मंत्रियों की कमजोरी खूब उजागर हुई है।
Author जयपुर | April 3, 2016 20:23 pm
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुधंरा राजे। (फाइल फोटो)

राजस्थान में सत्ताधारी भाजपा की भीतरी कलह अब संगठन से लेकर विधानसभा तक में खूब उजागर हो रही है। संगठन और सरकार में निष्ठावान नेताओं की अनदेखी से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल भी गिर रहा है। मंत्रियों की कार्यशैली से सरकार की छवि बिगडने से पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व भी चिंतित हो उठा है। सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले वरिष्ठ मंत्री गुलाब चंद कटारिया की संगठन से पनपी नाराजगी उजागर होने के बाद तो पार्टी सकते में है। राज्य में करीब ढाई साल से शासन कर रही भाजपा के कुनबे में कलह अब सतह पर आ गई है। विधानसभा के बजट सत्र में कमजोर प्रतिपक्ष के बावजूद वसुंधरा सरकार के मंत्रियों की कमजोरी खूब उजागर हुई है। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाडी ने तो अपनी सरकार की कमियों को खूब उजागर किया है।

तिवाडी के विधानसभा में तीखे तेवरों से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ ही उनके मंत्रियों को परेशानियों का सामना करना पडा। तिवाडी का आरोप है कि वसुंधरा सरकार अपनी कमियों के लिए अपने ही दल की केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है। तिवाडी का कहना है कि वसुंधरा सरकार अपनी ही नीतियों के चलते जनहित के काम करने में नाकाम रही है। इसमें सुधार के बजाये प्रदेश की सरकार कमियों का ठीकरा केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर फोडने में लगी है। तिवाडी ने वसुंधरा सरकार की गडबडाई वित्तीय हालत के साथ ही बिजली के मामले में नाकामी का मुददा जोर शोर से उठाते हुए इसमें सुधार के तरीके भी बताये थे। उनका कहना है कि मोदी सरकार तो हर कदम पर प्रदेश सरकार का साथ दे रही है तभी हालत संभले हुए है। तिवाडी का कहना है कि राज्य सरकार को केंद्र से पूरी मदद मिल रही है।

विधानसभा में तिवाडी के अलावा भाजपा के करीब एक दर्जन विधायकों की नाराजगी कई मुददों पर सामने आई है। इनमें ज्यादातर विधायक आरएसएस से जुडे हुए है। विधानसभा में इस बार संसदीयकार्य मंत्री राजेंद्र राठौड भी अनमने तरीके से ही सरकार का बचाव करते दिखे। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से राठौड की दूरियां इस बार साफ तौर पर सामने आ गई। वरिष्ठ विधायक तिवाडी ने तो इसे पूरी तरह से तथ्यों के साथ उजागर भी किया। भाजपा के विधायकों का भी कहना है कि राठौड से अब मुख्यमंत्री ने दूरी बना ली है। राठौड के पास चिकित्सा महकमा भी है,इस विभाग में कामकाज में ढिलाई के चलते भी वसुंधरा राजे खासी नाराज है। मुख्यमंत्री जब भी केबिनेट में फेरबदल करेंगी तो राठौड से चिकित्सा महकमा लेकर उन्हें कमजोर किया जाएगा। मुख्यमंत्री अब राठौड के बजाये परिवहन मंत्री युनूस खान पर ज्यादा भरोसा करने लगी है।

प्रदेश भाजपा में सबसे ज्यादा चिंता गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया की नाराजगी को लेकर है। प्रदेश भाजपा की कार्यसमिति की बैठक में बार बार बुलाने के बावजूद कटारिया मंच पर नहीं गये। पार्टी सूत्रों का कहना है कि संगठन के साथ ही मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के रवैये से गृह मंत्री खफा हो गये है। गृह विभाग के कामकाज में सीएमओ के अफसरों की लगातार दखलंदाजी से कटारिया नाराज हो गये है। इसलिए उन्होंने संकेत के तौर पर कार्यसमिति की बैठक में अपनी नाराजगी भी दिखाई। प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी उजागर होने से पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी प्रभारी राष्ट्रीय संगठन सचिव वी सतीश से रिपोर्ट भी मांगी है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जल्द ही अपनी सरकार के मंत्रियों के साथ ही विधायकों की परफोरमेंस का आकलन कर फेरबदल करेंगी। मुख्यमंत्री बजट सत्र के बाद नौकरशाही को भी कसने की तैयार में है। वसुंधरा राजे का मानना है कि जिलों का प्रशासन बेहतर काम नहीं कर रहा है। इससे ही सरकार की छवि बिगड रही है।

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